संस्‍कृति मंत्रालय
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पारंपरिक कलाकारों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों को वित्तीय सहायता

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 12:50PM by PIB Delhi

 

संस्कृति मंत्रालय देश भर में पारंपरिक एवं लोक कलाओं सहित विभिन्न प्रकार की प्रदर्शन कलाओं से जुड़े संगठनों/कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) का संचालन करता है। यह एक केन्‍द्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसमें विभिन्न योजना घटक शामिल हैं। इन योजनाओं का संक्षिप्त विवरण परिशिष्ट में दिया गया है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान केएसवीवाई योजना के अंतर्गत प्रदान की गई वित्तीय सहायता की राशि का विवरण इस प्रकार है:-

वित्‍तीय वर्ष

               वितरित राशि

               (करोड़ रुपये में)

2022-23

                 213.76

2023-24

                 218.36

2024-25

                 201.67

 

संस्कृति मंत्रालय विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना का संचालन करता है। इस योजना के अंतर्गत 18–25 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, माइम, दृश्य कला, लोक, पारंपरिक एवं स्वदेशी कलाओं तथा लाइट क्लासिकल संगीत आदि क्षेत्रों में देश के भीतर उच्‍च श्रेणी के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत 2 वर्षों के लिए प्रति माह 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

योजना की प्रभावशीलता और पहुंच बढ़ाने के लिए योजना के दिशा-निर्देश और आवेदन पत्र मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त समाचार पत्रों में विज्ञापनों, मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट और उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से तथा संबंधित नोडल एजेंसियों के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसके अलावा क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्‍द्र (जैडसीसी) और संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) भी देश में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिनमें पूरे भारत से लोक/जनजातीय और पारंपरिक कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है, जो अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।

परिशिष्‍ट

1. गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता (रिपर्टरी अनुदान)

इस योजना घटक का उद्देश्य नाट्य समूहों, रंगमंच समूहों, संगीत मंडलियों, बाल रंगमंच आदि जैसी विभिन्न प्रकार की प्रदर्शन कला गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा गुरु–शिष्य परंपरा के अनुरूप कलाकारों को उनके संबंधित गुरु द्वारा नियमित रूप से प्रशिक्षण दिलाना है। योजना के अनुसार थिएटर, संगीत और नृत्य के क्षेत्र में 1 गुरु और अधिकतम 18 शिष्यों को सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत गुरु के लिए 15,000 रुपये प्रति माह तथा शिष्यों के लिए उनकी आयु के अनुसार 2,000 से 10,000 रुपये प्रति माह तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

2. कला एवं संस्कृति के संवर्धन हेतु वित्तीय सहायता: इस योजना के निम्नलिखित उप-घटक हैं:

i. राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति वाले सांस्कृतिक संगठनों को वित्तीय सहायता

इस योजना घटक का उद्देश्य पूरे देश में कला और संस्कृति के संवर्धन में संलग्न राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत सांस्कृतिक संगठनों को प्रोत्साहित करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है। यह अनुदान ऐसे संगठनों को दिया जाता है जिनकी विधिवत गठित प्रबंध समिति हो, जो भारत में पंजीकृत हों, जिनका कार्य संचालन राष्ट्रीय स्तर (पैन-इंडिया) पर हो, जिनके पास पर्याप्त कार्यबल हो, तथा जिन्होंने पिछले 5 वर्षों में से कम से कम 3 वर्षों के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों पर 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक व्यय किया हो। इस योजना के अंतर्गत 1.00 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 5.00 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है।

ii. सांस्कृतिक कार्य एवं उत्पादन अनुदान (सीएफपीजी)

इस योजना घटक का उद्देश्य सेमिनार, सम्मेलन, अनुसंधान, कार्यशालाएँ, महोत्सव, प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठियाँ, नृत्य, नाटक-थिएटर, संगीत आदि के निर्माण/आयोजन के लिए गैर-सरकारी संगठन (NGOs), समितियाँ, ट्रस्ट, विश्वविद्यालय आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत किसी संगठन को 5 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 20.00 लाख रुपये तक किया जा सकता है।

iii. हिमालय की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास हेतु वित्तीय सहायता

इस योजना घटक का उद्देश्य अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा ऑडियो-विज़ुअल कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालय की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना है। इस योजना के अंतर्गत हिमालयी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में स्थित संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत किसी संगठन को प्रति वर्ष 10.00 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 30.00 लाख रुपये तक किया जा सकता है।

iv. बौद्ध/तिब्बती संगठनों के संरक्षण एवं विकास के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना घटक के अंतर्गत बौद्ध/तिब्बती सांस्कृतिक परंपरा के प्रचार-प्रसार, वैज्ञानिक विकास तथा संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान में संलग्न स्वैच्छिक बौद्ध/तिब्बती संगठनों, जिनमें मठ (मोनास्ट्री) भी शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत किसी संगठन को प्रति वर्ष 30.00 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 1.00 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है।

v. स्टूडियो थिएटर सहित भवन अनुदान के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना घटक का उद्देश्य गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ट्रस्ट, समितियाँ, सरकारी प्रायोजित निकाय, विश्वविद्यालय, कॉलेज आदि को सांस्कृतिक अवसंरचना (जैसे स्टूडियो थिएटर, ऑडिटोरियम, रिहर्सल हॉल, कक्षाएँ आदि) के निर्माण तथा विद्युत, एयर कंडीशनिंग, ध्वनिकी (अकूस्टिक्स), प्रकाश एवं ध्वनि प्रणाली जैसी सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना घटक के अंतर्गत, अनुदान की अधिकतम राशि मेट्रो शहरों में 50 लाख रुपये तक और गैर-मेट्रो शहरों में 25 लाख रुपये तक है।

vi. घरेलू उत्सव और मेले

इस योजना का उद्देश्य संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सवोंके आयोजन के लिए सहायता प्रदान करना है। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव (आरएसएम) का आयोजन क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्‍द्रों (जैडसीसी) के माध्यम से किया जाता है, जिनमें देश भर से बड़ी संख्या में कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाता है। नवम्‍बर 2015 से अब तक संस्कृति मंत्रालय द्वारा देश में कुल चौदह (14) राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सवों का आयोजन किया जा चुका है।

3. टैगोर सांस्कृतिक परिसरों (टीसीसी) के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता

इस योजना घटक का उद्देश्य गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), ट्रस्ट, समितियाँ, सरकारी प्रायोजित निकाय, राज्य/केन्‍द्र शासित प्रदेश सरकारें, विश्वविद्यालय, केन्‍द्र/राज्य सरकार की एजेंसियाँ/संस्थाएँ, नगर निगम तथा प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संगठनों आदि को बड़े सांस्कृतिक परिसरों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इनमें ऑडिटोरियम, मंच प्रदर्शन (नृत्य, नाटक और संगीत) के लिए सुविधाएँ, प्रदर्शनी स्थल, सेमिनार हॉल, साहित्यिक गतिविधियों के लिए स्थान, ग्रीन रूम आदि का निर्माण शामिल है। इस योजना के अंतर्गत मौजूदा सांस्कृतिक सुविधाओं जैसे रवीन्‍द्र भवन, रंगशाला आदि के संरक्षण, मरम्मत, विस्तार, परिवर्तन, उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 15.00 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र (एनईआर) की परियोजनाओं के लिए कुल स्वीकृत परियोजना लागत का 90 प्रतिशत केन्‍द्रीय सहायता के रूप में दिया जाता है तथा शेष 10 प्रतिशत राज्य सरकार/एनजीओ या संबंधित संगठन द्वारा वहन किया जाता है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों के लिए केन्‍द्रीय सहायता और राज्य अंश (मैचिंग शेयर) का अनुपात 60:40 निर्धारित है।

4. कला एवं संस्कृति के संवर्धन हेतु छात्रवृत्ति और फेलोशिप योजना: इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित तीन घटक शामिल हैं:

i. संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को फेलोशिप प्रदान करने की योजना इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक बैच वर्ष में अधिकतम 400 फेलोशिप (200 जूनियर और 200 सीनियर) प्रदान की जाती हैं। यह फेलोशिप विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को दी जाती है। इसमें 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लिए जूनियर फेलोशिप तथा 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सीनियर फेलोशिप प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत जूनियर फेलोशिप के लिए 10,000 रुपये प्रति माह तथा सीनियर फेलोशिप के लिए 20,000 रुपये प्रति माह की राशि 2 वर्ष की अवधि के लिए सांस्कृतिक अनुसंधान हेतु दी जाती है। फेलोशिप की राशि छह-छह माह की चार समान किस्तों में जारी की जाती है।

ii. विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना

प्रत्येक बैच वर्ष में अधिकतम 400 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं। इस योजना के अंतर्गत 18–25 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को भारत के भीतर उन्नत प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। यह सहायता भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, माइम, दृश्य कला, लोक, पारंपरिक एवं स्वदेशी कलाएँ तथा लाइट क्लासिकल संगीत आदि क्षेत्रों में प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत 2 वर्षों के लिए प्रति माह 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह छात्रवृत्ति छह-छह माह की चार समान किस्तों में जारी की जाती है।

iii. सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए टैगोर राष्ट्रीय फेलोशिप

इस योजना घटक का उद्देश्य संस्कृति मंत्रालय (एमओसी) के अधीन विभिन्न संस्थानों तथा देश के अन्य चयनित सांस्कृतिक संस्थानों को सशक्त और पुनर्जीवित करना है। इसके लिए विद्वानों और शिक्षाविदों (स्कॉलर्स/अकादमिक विशेषज्ञों) को इन संस्थानों से संबद्ध होकर पारस्परिक रुचि वाले शोध परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 15 फेलोशिप (80,000 रुपये प्रति माह + आकस्मिक भत्ता) तथा 25 छात्रवृत्तियाँ (50,000 रुपये प्रति माह + आकस्मिक भत्ता) अधिकतम 2 वर्ष की अवधि के लिए प्रदान की जाती हैं। फेलोशिप की राशि छह-छह माह की चार समान किस्तों में जारी की जाती है।

5. वरिष्ठ कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना का उद्देश्य 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ कलाकारों और विद्वानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिन्होंने कला, साहित्य आदि के अपने विशिष्ट क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। इस योजना के अंतर्गत ऐसे पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 6,000 रुपये प्रति माह तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिनकी वार्षिक आय 72,000 रुपये से अधिक नहीं है। लाभार्थी की मृत्यु होने की स्थिति में यह वित्तीय सहायता उनके पति/पत्नी को हस्तांतरित कर दी जाती है।

यह जानकारी केन्‍द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी


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