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स्वामिह: भारत के आवास क्षेत्र के लिए नीतिगत जीवनरेखा
प्रविष्टि तिथि:
13 MAR 2026 4:07PM by PIB Delhi
- 2019 में शुरु किया गया स्वामिह कोष अवरुद्ध किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अंतिम चरण में वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- स्वामिह के तहत अब तक 58,596 से अधिक मकानों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है तथा 1 लाख से अधिक मकानों का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है, जिससे 2.38 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
- परियोजनाओं के पुन: आरंभ होने से रोजगार के 30,000 से अधिक अवसर सृजित हुए हैं और निर्माण सामग्री की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- 15,000 करोड़ रुपये की राशि के साथ स्वामिह कोष-2 की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य 1 लाख अतिरिक्त अवरुद्ध आवासीय इकाइयों को पूरा करना है।
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भारत में हो रहे परिवर्तन में आवास की महत्वपूर्ण भूमिका
भारत के लाखों परिवारों के लिए अपना घर स्थिरता, सुरक्षा और जीवनभर के महत्वपूर्ण निवेश का प्रतीक है। जैसे-जैसे भारत के शहर विकसित हो रहे हैं और शहरी आकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, आवास सामाजिक कल्याण और आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। साथ ही यह निर्माण, बुनियादी ढाँचे और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।
घर के स्वामित्व को व्यक्तिगत उपलब्धि और समावेशी बुनियादी ढाँचे के विकास की एक मजबूत आधारशिला भी माना जाता है। बीते वर्षों में नीतिगत रूप से ध्यान दिए जाने के कारण किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास क्षेत्र में आपूर्ति को मजबूती मिली है, जिसके परिणामस्वरूप देश भर के शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएँ शुरू हुई हैं। हालाँकि, वित्तीय और अन्य बाधाओं के कारण इनमें से कई परियोजनाएँ बीच में ही अटक जाती हैं।
पुरानी और अवरुद्ध रियल एस्टेट परियोजनाओं के पुनर्वास से संबंधित विशेषज्ञ समिति (एमओएचयूए, 2023) ने पाया कि आवासीय परियोजनाओं के अवरुद्ध होने का मुख्य कारण प्रायः वित्तीय व्यवहार्यता में कमी होता है, जिसके परिणामस्वरूप लागत बढ़ जाती है और परियोजनाओं में देरी होती है। समिति ने प्राथमिकता के आधार पर वित्तपोषण के महत्व पर जोर दिया और परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए स्वामिह कोष की सक्रिय भूमिका की सिफारिश की। इसका मूल विचार स्पष्ट था : जब तक अवरुद्ध परियोजनाओं को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक आवास आपूर्ति में अपेक्षित विस्तार पूरी तरह प्राप्त नहीं किया जा सकता।
भारत सरकार की ओर से स्वामिह के रूप में एक लक्षित हस्तक्षेप शुरू किया गया। 2019 में शुरू की गई किफायती और मध्यम आय वर्ग आवास में निवेश कोष के लिए विशेष व्यवस्था द्वारा वित्तीय बाधाओं के कारण प्रभावित आवासीय परियोजनाओं को अंतिम चरण में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। नई परियोजनाएँ शुरू करने के बजाय, स्वामिह आंशिक रूप से बने ढाँचों को वास्तविक घरों में बदलने, मौजूदा घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और आवास क्षेत्र में विश्वास को मजबूती प्रदान करने के लिए अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह पहल बुनियादी ढाँचे के समर्थन में एक व्यापक बदलाव को भी दर्शाती है, जहाँ सफलता केवल किए गए निवेश से नहीं बल्कि समय पर परियोजनाओं की डिलीवरी और लोगों के जीवन पर पड़े वास्तविक प्रभाव से मापी जाती है।
स्वामिह का पोर्टफोलियो 12 राज्यों और 20 शहरों में 146 से अधिक आवासीय परियोजनाओं तक फैला हुआ है, जो स्वामिह को देश के आवासीय क्षेत्र पर केंद्रित अवरुद्ध योजनाओं को पूरा करने का सबसे बड़ा समाधान प्लेटफ़ॉर्म बनाता है। इन हस्तक्षेपों के माध्यम से इस कोष के द्वारा 1 लाख से अधिक मकानों की डिलीवरी संभव होने की उम्मीद है, जिससे 2.38 लाख से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। मूल स्वामिह कोष की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने देश भर में अवरुद्ध आवासीय परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए बजट 2025–26 में स्वामिह कोष-2 स्थापित किए जाने की घोषणा की।
भारत की आवास नीति से संबंधित इकोसिस्टम
आवास से संबंधित भारत की रणनीति समय के साथ एक संपूर्ण नीतिगत इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुई है, जो विभिन्न आय वर्गों, भौगोलिक क्षेत्रों और विकास के चरणों में आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करती है। इस दृष्टिकोण में नए आवासों का निर्माण, किफायती आवास के लिए सहायता, किराये से संबंधित समाधान और अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के तंत्र शामिल हैं। ये नीतियाँ मिलकर आवास क्षेत्र में स्थिरता, विश्वास और निरंतरता को मजबूत करती हैं।
- आवास निर्माण और पहुँच: प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (पीएमएवाई-यू)
पीएमएवाई-यू पात्र परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), निम्न आय वर्ग (एलआईजी), और मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास प्रदान करने के उद्देश्य से 2015 में शुरू की गई।
- कवरेज और समावेशिता का विस्तार: पीएमएवाई-यू 2.0
पूर्व अनुभवों के आधार पर पीएमएवाई-यू 2.0 ने अगले चरण में एक करोड़ अतिरिक्त परिवारों को आवासीय सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है और इसे 1 सितंबर 2024 से अगले पांच वर्षों में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत अत्यंत कमजोर और विशेष समूहों सहित व्यापक श्रेणियों को शामिल करते हुए लाभार्थियों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है।
- पूरक समाधान के रूप में किराये के आवास : किफायती किराया आवास परिसर (एआरएचसी)
लचीले आवास विकल्पों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रवासी और शहरी कामगारों के लिए सम्मानजनक किराये के आवास उपलब्ध कराने हेतु एआरएचसी की शुरुआत की गई। इस पहल में मौजूदा सरकारी आवास स्टॉक और साझेदारी के माध्यम से नई विकास परियोजनाओं का उपयोग किया जाता है।
- निर्माणाधीन को पूरा करना: स्वामिह की भूमिका
प्रमुख मिशन जहाँ नए आवासों के निर्माण और पहुँच पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं स्वामिह का विशेष उद्देश्य निर्माणाधीन मकानों का निर्माण पूर्ण करना और उन मकानों को खरीदारों को सौंपे जाना सुनिश्चित करते हुए आवासीय जीवनचक्र के अंतिम चरण को पूरा करना है। भारत सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एलआईसी द्वारा समर्थित 15,531 करोड़ रुपये की कुल राशि के साथ यह कोष देशभर में अवरुद्ध और वित्तीय दबाव से घिरी आवासीय परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
अवरुद्ध परियोजनाओं से लेकर मकान उपलब्ध कराने तक: स्वामिह की आवश्यकता
एसबीआई वेंचर्स द्वारा कराए गए अध्ययन के अनुसार, स्वामिह को लॉन्च किए जाने से पहले, लगभग 90% अवरुद्ध आवासीय परियोजनाएँ —जिनमें लगभग 4.58 लाख आवासीय इकाइयों वाली करीब 1,509 परियोजनाएँ शामिल थीं—किफायती और मध्यम आय वर्ग के क्षेत्रों में केंद्रित थीं। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लगभग 55,000 करोड़ रुपये के वित्त पोषण की आवश्यकता थी। इस चुनौती के पैमाने को समझते हुए, स्वामिह निवेश कोष की स्थापना की गई ताकि वित्तीय दबाव से घिरी परियोजनाओं को नकदी उपलब्ध कराई जा सके और वित्तीय दबाव कम किया जा सके। यह पहल रिहायशी रियल एस्टेट इकोसिस्टम तथा निर्माण, निर्माण सामग्री और वित्तीय सेवाओं जैसे संबंधित क्षेत्रों को सहायता देती है।
इस दृष्टिकोण की प्रभावशीलता 2021 में स्पष्ट हुई, जब मुंबई के उपनगर रिवाली पार्क में खरीदारों को आवासों का कब्जा सौंपा गया। रिवाली पार्क स्वामिह निवेश कोष के माध्यम से पूरी की गई देश की पहली आवासीय परियोजना बन गई । यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसने दर्शाया कि किस प्रकार स्वामिह की सहायता अधूरी परियोजनाओं को रहने योग्य घरों में बदल सकती है। मार्च 2023 तक, स्वामिह ने 22,500 से अधिक मकानों की डिलीवरी प्रदान की, जो कोष के कार्यान्वयन की दिशा में एक शुरुआती उपलब्धि थी। प्रगति का यह सिलसिला निरंतर जारी रहा, और दिसंबर 2025 तक 58,000 से अधिक मकानों की डिलीवरी प्रदान की गई, जो जमीनी स्तर पर कोष के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
स्वामिह की संरचना को समझना
स्वामिह एक सरकार समर्थित निवेश कोष के रूप में काम करता है, जिसे विशेष रूप से अवरुद्ध आवासीय परियोजनाओं की सहायता करने के लिए बनाया गया है। यह कोष विविध निवेशकों से पूँजी एकत्रित करता है और उसको ऐसी परियोजनाओं में प्राथमिकता ऋण के रूप में वितरित करता है, जो आर्थिक रूप से तो व्यवहार्य हैं, लेकिन धन की कमी के कारण देरी का सामना कर रही हैं। भारत सरकार कोष के प्रायोजक के रूप में कार्य करती है, जबकि वित्त मंत्रालय का आर्थिक कार्य विभाग कोष की निगरानी और रणनीतिक दिशा के लिए जिम्मेदार है। कोष का व्यावसायिक प्रबंधन भारतीय स्टेट बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसबीआईकैप वेंचर्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जिससे कोष के वितरण और निगरानी में संगठनात्मक कड़ाई और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होता है।
स्वामिह श्रेणी -II वैकल्पिक निवेश कोष है। वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) का आशय भारत में स्थापित या पंजीकृत किसी भी ऐसे कोष से है, जो निजी रूप से एकत्रित निवेश माध्यम के रूप में कार्य करता है। यह कोष पर्याप्त अनुभव और वित्तीय क्षमता वाले घरेलू या विदेशी निवेशकों से पूँजी जुटाता है और निवेशकों के लिए रिटर्न जुटाने के उद्देश्य के साथ इस पूँजी को स्पष्ट निवेश नीति के अनुसार निवेश करता है। श्रेणी-II एआईएफ में आमतौर पर रियल एस्टेट कोष, निजी इक्विटी कोष, और संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए कोष शामिल होते हैं। स्वामिह को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के तहत, विशेष रूप से अवरुद्ध आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्राथमिकता ऋण वित्तपोषण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। भारत में यह अपनी किस्म का पहला सामाजिक प्रभाव निवेश माध्यम है।
पात्रता: स्वामिह के तहत वित्तीय सहायता पाने के मापदंड
स्वामिह के तहत वित्त पोषण हेतु विचार किए जाने के लिए परियोजनाओं को निम्नलिखित पात्रता मापदंडों को पूरा करना होगा:
1.पर्याप्त धन के अभाव के कारण अवरुद्ध परियोजनाएँ
केवल वही परियोजनाएँ स्वामिह के तहत वित्त पोषण प्राप्त करने की पात्र हैं, जो मुख्य रूप से पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण रुकी हुई हैं या देरी का सामना कर रही हैं।
2. रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) में पंजीकृत परियोजनाएँ
स्वामिह के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए सभी परियोजनाएँ अनिवार्य रूप से रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकृत होनी चाहिए।
3. किफायती और मध्यम आय वर्ग आवास श्रेणी
स्वामिह के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र परियोजनाएँ केवल किफायती या मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाएँ होनी चाहिए, जिन्हें ऐसी कोई भी आवासीय इकाई माना जाता है जिनका रेरा कारपेट एरिया 200 वर्ग मीटर से ज़्यादा न हो और जिनकी कीमत निम्नलिखित तरह हो (जैसा लागू हो):
- मुंबई महानगर क्षेत्र में 2 करोड़ रुपये से कम
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, चेन्नई, कोलकाता, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद में 1.5 करोड़ रुपये से कम
- शेष भारत में 1 करोड़ रुपये से कम
4. नेट-वर्थ पॉजिटिव परियोजनाएँ
परियोजनाएँ नेट-वर्थ पॉजिटिव होनी चाहिए, यानी ऐसी परियोजनाएँ जिनमें प्राप्तियाँ और बिना बिकी इकाइयों का मूल्य परियोजना स्तर पर उस परियोजना को पूरा करने की लागत और बकाया देनदारियों से अधिक हो।
5. लगभग पूरी हो चुकी परियोजनाओं को प्राथमिकता
उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है जो निर्माण के उन्नत चरण में हैं और जल्द ही पूरी होने वाली हैं।
निवेश की सीमा बढ़ाने के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत परियोजनाएँ और ऐसी परियोजनाएँ जो राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के तहत कार्यवाही के अधीन हैं, भी विचारणीय हैं। कोष की निवेश समिति द्वारा मौजूदा ऋणदाताओं तथा कानूनी सलाहकारों के साथ परामर्श के बाद वित्तीय सहायता से संबंधित सभी आवेदनों की विस्तृत जांच और समीक्षा की जाती हैं। जो परियोजनाएँ एनसीएलटी के तहत कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया में हैं, वे तब तक वित्त पोषण की पात्र हैं, जब तक ऋणदाताओं की समिति द्वारा समाधान योजना को स्वीकृत या अस्वीकृत नहीं किया जाता।

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उपलब्धियाँ और कार्यान्वयन: स्वामिह ने क्या हासिल किया है
पिछले कुछ वर्षों में, यह कोष सामाजिक परिणामों और वित्तीय अनुशासन के बीच मजबूत संतुलन बनाए रखते हुए अधूरी आवासीय परियोजनाओं को पुन: आरंभ करने की दिशा में लगातार प्रगति दर्शा रहा है। मजबूत शासन, सक्रिय संपत्ति प्रबंधन और करीबी निगरानी के माध्यम से, इसने देशभर में आवास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव डाला है।
- 15 दिसंबर 2025 तक, 146 परियोजनाओं में 58,000 से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनमें पुनर्वास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत 7,000 से अधिक इकाइयाँ शामिल हैं।
- मजबूत शासन और सक्रिय संपत्ति प्रबंधन ने स्वामिह को अपने निवेशों की वसूली सुनिश्चित करने में समर्थ बनाया है, जिससे 55 पूर्ण निकासी और 44 आंशिक निकासी संभव हुई, जो प्रभावी परियोजना समाधान को दर्शाता है।
- इस कोष ने देशभर में 146 परियोजनाओं में 49,500 करोड़ रुपये से अधिक पूँजी उपलब्ध कराई, जो 90 मिलियन वर्ग फुट से अधिक विकास क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें 44% हिस्सा निम्न आय वर्ग और मध्यम आय वर्ग आवास के लिए समर्पित है।
- इन हस्तक्षेपों से 30,000 से अधिक कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
- कोष की गतिविधियों से जीएसटी, सरकारी बकाया और स्टांप ड्यूटी संग्रह के माध्यम से केंद्र और राज्यों को अनुमानित 6,900 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
- रुकी परियोजनाओं के पुन: आरंभ होने से निर्माण सामग्री की मांग भी बढ़ी, जिसमें 20 लाख टन से अधिक सीमेंट और 5.5 लाख मीट्रिक टन स्टील शामिल हैं।
- स्थिरता के प्रयासों के परिणामस्वरूप 1.06 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए, जिससे परियोजना स्थलों के हरित आवरण में वृद्धि हुई है।
- निवेश की गई लगभग 50% पूँजी पहले ही निवेशकों को लौटा दी गई है, जो वित्तीय विवेक के साथ ही साथ सामाजिक प्रभाव बनाए रखने की इस कोष की योग्यता को भी दर्शाता है।
- भारत सरकार द्वारा स्वामिह परियोजनाओं में अब तक किए गए लगभग 7,000 करोड़ रुपये के निवेश में से लगभग 3,500 करोड़ रुपये पहले ही वसूला और सरकार को लौटाया जा चुका है, जो कोष की वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।

स्वामिह की कार्रवाई: घर उपलब्ध कराना और विश्वास बहाल करना
स्वामिह का सबसे स्पष्ट प्रभाव उन परियोजनाओं में देखा गया है जो लंबे समय अवरुद्ध थीं और स्वामिह की मदद से समय पर पूरी हुईं, जिससे हजारों परिवारों को उनके आशियाने मिले और साथ ही वित्तीय अनुशासन और बाजार में विश्वास भी बनाए रखा गया। सफलता की कुछ ऐसी ही कहानियों का विवरण नीचे दिया गया है।
एसएस लीफ गुरुग्राम

एसएस लीफ गुरुग्राम में स्थित एक आवासीय परियोजना है, जिसमें 670 इकाइयाँ शामिल हैं। यह परियोजना 2012 में शुरू हुई थी, लेकिन नकदी प्रवाह के असंतुलन और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संकट के कारण लगभग पाँच साल तक विलंबित रही।
स्वामिह ने तेजी से निर्माण पूरा करने के लिए सितंबर 2020 में इस परियोजना में निवेश किया। इसके परिणामस्वरूप, परियोजना को जून 2022 तक पूर्ण अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त हो गया।
प्रभाव और परिणाम
- निवेश के लगभग 2 वर्षों के भीतर परियोजना पूरी हो गई
- 62 नई इकाइयाँ बेची गईं, और लगभग 164 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई
- विक्रेता बकाया और मजदूरों के वेतन नियमित किए गए
- कुल 670 खरीदारों को उनके आवासों का कब्जा मिल गया।
मंत्री सेरेनिटी, बेंगलुरु
बेंगलुरु में स्थित मंत्री सेरेनिटी मध्यम आय वर्ग की विशाल आवासीय परियोजना है, जिसमें लगभग 1,800 आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं। यह परियोजना 2011 में शुरू हुई थी, लेकिन धन की कमी, धीमी बिक्री और नकदी के कमजोर प्रवाह के कारण लगभग तीन से चार साल तक विलंबित रही।
इस परियोजना को पूरा करने के लिए स्वामिह ने सितंबर 2020 में इसमें निवेश किया। महामारी के कारण उत्पन्न व्यवधानों के बावजूद, परियोजना कड़ी निगरानी और सक्रिय प्रबंधन की बदौलत लगातार प्रगति करती रही।

प्रभाव और परिणाम
- निवेश के लगभग 4 वर्षों के भीतर परियोजना पूरी हो गई
- लगभग 350 नई इकाइयाँ बेची गईं, जिससे लगभग 450 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई
- ठेकेदारों और विक्रेताओं के बकाया भुगतान किए गए; कर्मचारियों का वेतन नियमित किया गया
- संपत्ति प्रबंधन के दौरान कानूनी और नियामक चुनौतियों को हल किया गया
- अप्रैल 2024 तक 230 करोड़ रुपये का पूर्ण पुनर्भुगतान प्राप्त किया गया
- कुल 1,800 घर खरीदारों को उनके मकानों का कब्जा उपलब्ध कराया गया।
एलीट एकर्स, चेन्नई
एलीट एकर्स चेन्नई में स्थित एक आवासीय परियोजना है, जिसमें 249 इकाइयाँ हैं। यह परियोजना 2017 में शुरू हुई थी, लेकिन अनुमति में देरी, एनबीएफसी संकट और इसके ऋण का एनपीए में बदलना जैसी समस्याओं के कारण दो साल से अधिक विलंबित रही।
इस परियोजना को पूरा और व्यवस्थित करने के लिए स्वामिह ने जुलाई 2020 में इसमें निवेश किया।

प्रभाव और परिणाम
- निवेश के लगभग 2 वर्षों के भीतर परियोजना पूरी हुई
- स्वामिह द्वारा किया गया पूरा निवेश चुका दिया गया
- 193 नई इकाइयाँ बेची गई, लगभग 59 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई
- ठेकेदारों और विक्रेताओं के बकाया भुगतान पूरे किए गए
- परियोजना का पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया
- कुल 250 से अधिक खरीदारों को उनके मकान उपलब्ध कराए गए
अगला अध्याय : स्वामिह कोष 2
हजारों मकानों की डिलीवरी और विभिन्न शहरों में निर्माण गतिविधियों के पुन: आरंभ होने के साथ, समय पर आवास उपलब्ध कराने की मांग लगातार बनी हुई है। बजट 2025-26 में घोषित स्वामिह कोष –2 इस पहल का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य देशभर में परियोजनाओं की तेजी से पूर्णता सुनिश्चित करना है। नया कोष सरकार, बैंक और निजी निवेशकों के योगदान के साथ एक मिश्रित वित्तीय सुविधा के रूप में कार्य करेगा। प्रस्तावित 15,000 करोड़ रुपये की राशि के साथ, स्वामिह कोष –2 का लक्ष्य 1 लाख अतिरिक्त इकाइयों को शीघ्र पूरा होना है, जो घर खरीदारों के प्रति प्रतिबद्धता, आवास क्षेत्र के पुनरुद्धार और समावेशी शहरी विकास को मजबूत करता है।
निष्कर्ष : भारत के आवासीय भविष्य में स्वामिह की भूमिका
स्वामिह केवल एक वित्तीय साधन नहीं है, बल्कि एक लक्षित नीतिगत उपकरण है, जो वित्तीय बाजारों, नियामक ढाँचों और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु का काम करता है। व्यवस्थित ऋण वित्तपोषण, कड़े पात्रता मानदंड और पेशेवर वित्तीय प्रबंधन के जरिए इस पहल ने - परियोजनाओं को पूरा करने, निर्माण गतिविधियों को पुनः शुरू करने और घर खरीदारों में विश्वास बहाल करने जैसे स्पष्ट परिणाम दिए हैं । जिस प्रकार स्वामिह कोष –2 शुरू किया जा रहा है, भारत सरकार किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रही है, और परिष्कृत नीतिगत उपकरणों का उपयोग करके देश के सबसे आवश्यक क्षेत्रों में संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करने का प्रयास कर रही है।
वित्त मंत्रालय
https://dea.gov.in/our-organizations/investment-digital-economy-divison
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https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=151332
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1911270
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
https://pmaymis.gov.in/
https://pmaymis.gov.in/pmaymis2_2024/PMAY-urban-2.html
https://arhc.mohua.gov.in/
अन्य
https://sbiventures.co.in/funds-managed/swamih-investment-fund/
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