विधि एवं न्याय मंत्रालय
न्यायिक प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को सुदृढ़ करने हेतु ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना कार्यान्वित की जा रही है
न्यायालयों के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण
प्रविष्टि तिथि:
12 MAR 2026 12:49PM by PIB Delhi
न्यायिक प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना को देश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल कोर्ट, ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट, अदालती अभिलेखों का डिजिटलीकरण, मामलों के प्रबंधन की उन्नत प्रणाली और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के जरिए मामलों की निगरानी जैसे विभिन्न उपाय शुरू किए गए हैं। इन उपायों से न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली अधिक सुलभ, कुशल और पारदर्शी बन गई है। इससे जनता को मामलों से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो पा रही है, डिजिटल कार्यप्रवाह के जरिए मामलों का प्रबंधन सुव्यवस्थित हो रहा है और ई-फाइलिंग एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रक्रियात्मक विलंब कम हो रहे हैं। दिनांक 31.01.2026 तक ई-कोर्ट परियोजना के तहत की गईं कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:
i. न्यायालयों के पुराने अभिलेख सहित 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों के अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया है ताकि त्वरित पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित भंडारण और निर्बाध डिजिटल कार्यप्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
ii. यातायात संबंधी चालानों के ऑनलाइन निपटारे को संभव बनाने हेतु 30 वर्चुअल कोर्ट स्थापित किए गए हैं। वर्चुअल कोर्ट को 10.13 करोड़ चालान प्राप्त हुए हैं और 1002.73 करोड़ रुपये के चालान का भुगतान किया गया है।
iii. 3,240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) सुविधाओं का विस्तार किया गया है। न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाई की हैं, जिससे दूरदराज के विचाराधीन कैदियों, गवाहों और वकीलों की सुनवाई की सुविधा हासिल हुई।
iv. 11 उच्च न्यायालयों में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था उपलब्ध है।
v. मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग और अदालती शुल्क व जुर्माने के डिजिटल भुगतान की सुविधा हेतु ई-फाइलिंग और ई-भुगतान प्रणाली लागू की गई है। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और ई-भुगतान प्रणाली ने 1,404 करोड़ रुपये के अदालती शुल्क और 75 करोड़ रुपये के जुर्माने के लेनदेन को संभव किया है।
vi. एनजेडीजी जनता को देश भर के न्यायालयों के मामले से संबंधित डेटा व आंकड़ों तक पहुंच प्रदान करता है और इसे एक बेहतर डैशबोर्ड के साथ अद्यतन किया गया है, जो लंबित मामलों की पहचान, उनके प्रबंधन और उनकी संख्या में कमी लाने हेतु एक निगरानी उपकरण के रूप में कार्य करता है।
vii. सभी न्यायालयों में सीआईएस 4.0 लागू किया गया है, जिसमें बेहतर उपयोगिता, गोपनीयता संबंधी सुरक्षात्मक उपाय और एनजेडीजी, ई-फाइलिंग, वर्चुअल कोर्ट एवं ईसीजेएस जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण शामिल है।
viii. एस3डब्ल्यूएएएस प्लेटफॉर्म 730 जिला न्यायालयों की वेबसाइटों को होस्ट करता है, जिससे सुरक्षित और सुलभ वेब बुनियादी ढांचा सुनिश्चित होता है।
ix. वास्तविक समय वाली डिजिटल सेवाओं का काफी विस्तार हुआ है, जिसमें वकीलों और वादियों को एसएमएस पुश और पुल (प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस भेजे जाते हैं), ईमेल (प्रतिदिन 6 लाख से अधिक भेजे जाते हैं) और बहुभाषी ई-कोर्ट सेवा पोर्टल (प्रतिदिन 35 लाख हिट्स) के जरिए मामलों की जानकारी भेजी जाती है।
x. ई-कोर्ट सेवा मोबाइल ऐप (3.59 करोड़ डाउनलोड) वकीलों और वादियों को मामले की स्थिति, वाद सूची आदि के बारे में प्रासंगिक जानकारी प्रदान करता है।
xi. जस्टिस ऐप (22,133 डाउनलोड) न्यायाधीशों के लिए एक प्रबंधन उपकरण है जो उन्हें अपने न्यायिक कार्यों को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित और निगरानी करने में सहायता करता है।
xii. सभी उच्च न्यायालयों में 48 ई-सेवा केन्द्र और जिला न्यायालयों में 2,396 ई-सेवा केन्द्र कार्यरत हैं।
xiii. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया सेवा एवं निगरानी (एनएसटीईपी) प्रणाली के अंतर्गत न्यायालयों ने 7.29 करोड़ ई-प्रक्रियाओं को पूरा किया है।
xiv. डिजिटल कोर्ट 2.1 कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके अनुवाद और प्रतिलेखन की सुविधा से युक्त कागज रहित न्यायालयों के लिए एक अनुकूलित एप्लिकेशन है। यह न्यायाधीशों को सभी मामले से संबंधित दस्तावेजों, दलीलों और साक्ष्यों को डिजिटल रूप से देखने में सक्षम बनाता है।
भारत सरकार 1993-94 से बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं के विकास हेतु एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएस) लागू कर रही है। इस योजना के जरिए, भारत सरकार राज्य सरकारों के संसाधनों में सहायता प्रदान करती है, जिनकी न्यायिक बुनियादी ढांचे के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस योजना के अंतर्गत न्यायालय भवन, आवासीय इकाइयां, वकीलों के भवन, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालय परिसर जैसे पांच घटक शामिल हैं।
ई-कोर्ट परियोजना के तहत किए गए उपायों ने मामलों के प्रबंधन, ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई, लंबित मामलों एवं उनके निपटान की वास्तविक समय में निगरानी, प्रक्रियाओं की त्वरित सेवा आदि में सुधार करके न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली की दक्षता को बढ़ाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स और इंटरऑपरेबल सिस्टम को अपनाने से न्यायिक संसाधनों का बेहतर उपयोग, विवादों का त्वरित समाधान और वादियों की न्याय तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
ई-कोर्ट परियोजना के तहत निर्मित सुविधाओं का 2014 और 2025 के बीच न्यायिक प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप देश के न्यायालयों द्वारा प्रतिवर्ष दर्ज किए जाने वाले मामलों की संख्या में 169 प्रतिशत की वृद्धि (0.98 करोड़ से बढ़कर 2.64 करोड़) और प्रतिवर्ष निपटाए जाने वाले मामलों की संख्या में 207 प्रतिशत की वृद्धि (0.81 करोड़ से बढ़कर 2.49 करोड़) हुई है।
यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2239008)
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