विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: जूनोटिक रोग

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 5:04PM by PIB Delhi

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने देश भर में बीमारी के प्रकोप की पूर्व चेतावनी और त्वरित प्रतिक्रिया को बढ़ाने के लिए एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) शुरू किया है। आईडीएसपी के तहत रिपोर्ट की गई कुछ सामान्य ज़ूनोटिक  बीमारियाँ स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, ह्यूमन रेबीज, क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी), क्रीमियन कांगो हेमोरेजिक फीवर (सीसीएचएफ), निपाह वायरस रोग और वेस्ट नाइल फीवर हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आईडीएसपी-आईएचआईपी (एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम - एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच) के तहत एल-फॉर्म पर रिपोर्ट किए गए केएफडी, लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के मामलों का वर्षवार विवरण अनुबंध-I के रूप में संलग्न है।

2022 से वेस्ट नाइल फीवर, निपाह वायरस रोग, सीसीएचएफ और ह्यूमन रेबीज के प्रकोप के दौरान रिपोर्ट किए गए मामलों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण अनुबंध-II के रूप में संलग्न है।

देश में पशुजन्य रोगों में वृद्धि (यदि कोई हो) के संभावित कारण बढ़ी हुई क्षमता निर्माण, बेहतर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सुदृढ़ नैदानिक ​​सुविधाएं और विस्तारित जागरूकता अभियान हो सकते हैं, जिनके कारण मामलों की बेहतर पहचान और रिपोर्टिंग हुई है। इसके अतिरिक्त, मानव-वन्यजीव संपर्क का विस्तार, तीव्र शहरीकरण और जलवायु परिवर्तनशीलता जैसे कारक इन बढ़ते रुझानों को प्रेरित कर रहे हैं।

इस संबंध में टीकों के विकास के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विवरण नीचे दिया गया है।

 

विभाग/मंत्रालय

पहल

जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

1.  ब्रिक-राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरजीसीबी), तिरुवनंतपुरम, रेबीज वायरस को रोकने के लिए जन्मजात प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया  की क्षमता का पता लगा रहा है और इसके साथ ही वैक्सीन एवं चिकित्सीय दोनों दृष्टिकोणों से रेबीज वायरस को लक्षित करने की रणनीतियों पर काम कर रहा है।

2. ब्रिक-आरजीसीबी डेंगू और जीका वायरस के लिए उन्नत मल्टी-एंटीजेनिक डीएनए और सर्कुलर आरएनए आधारित टीकों पर भी काम कर रहा है।

3.  ब्रिक-ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (ब्रिक-टीएचएसटीआई) और ब्रिक-आरजीसीबी संयुक्त रूप से निपाह वायरस के खिलाफ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी पर काम कर रहे हैं और उन्होंने भारत (आवेदन संख्या: 202411037094, 10 मई, 2024 को दायर) और बांग्लादेश (आवेदन संख्या: 167/2025, 12 मई, 2025) में प्रोविजनल पेटेंट दायर किया है।

4.  ब्रिक-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (ब्रिक-एनआईआई), जापानी इंसेफेलाइटिस और डेंगू के लिए दो अगली पीढ़ी के, पूरी तरह से स्वदेशी वैक्सीन उम्मीदवारों के विकास को आगे बढ़ा रहा है।

5.  ब्रिक-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (ब्रिक-एनआईआई) दो अगली पीढ़ी के इन्फ्लुएंजा टीके विकसित करने के लिए यूरोपीय संघ के अनुसंधान समूहों के साथ भी सहयोग कर रहा है: (i). कम्प्यूटेशनल रूप से अनुकूलित व्यापक रूप से प्रतिक्रियाशील एंटीजन (कोबरा) वैक्सीन, और (ii). एंटीजन-प्रस्तुतकर्ता कोशिका लक्ष्यीकरण डीएनए (एपीसी-मिक्स) वैक्सीन। ये सार्वभौमिक अगली पीढ़ी के टीके सूअरों या पक्षियों से उत्पन्न होने वाले स्ट्रेन सहित इन्फ्लुएंजा वायरस के किसी भी उभरते हुए स्ट्रेन से मनुष्यों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम होंगे।

6.  ब्रिक-राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ब्रिक-एनआईएबी) मुख्य रूप से जानवरों में उपयोग के लिए ब्रुसेलोसिस, लेप्टोस्पायरोसिस, तपेदिक, पैराट्यूबरकुलोसिस, टोक्सोप्लाज्मोसिस और रेबीज जैसी पशुजन्य बीमारियों के खिलाफ संभावित वैक्सीन उम्मीदवारों की पहचान के लिए अनुसंधान कर रहा है।

7. ब्रिक-राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र (ब्रिक-एनसीसीएस) आईआईएसईआर भोपाल के साथ मिलकर निपाह वैक्सीन उम्मीदवार पर काम कर रहा है और म्यूराइन मॉडल (चूहों) में इसकी प्रभावकारिता का परीक्षण कर रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नैदानिक ​​अनुप्रयोग के लिए निपाह प्रोटीन के खिलाफ काइमेरिक एंटीबॉडी भी तैयार की हैं।

विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीएसआईआर-सीसीएमबी) अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा पर काम कर रहा है। हालांकि ये वायरस पोल्ट्री में उच्च मृत्यु दर का कारण बनते हैं और मनुष्यों के लिए ज़ूनोटिक जोखिम पैदा करते हैं, लेकिन पिछले एक वर्ष में मनुष्यों में बीमारी के फैलने या मामलों में वृद्धि की कोई सूचना नहीं मिली है। सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए, संस्थान ने अपशिष्ट जल, झीलों, पोल्ट्री फार्म की सीमाओं और प्रवासी पक्षियों के आवासों में वायरस का पता लगाने के लिए मानकीकृत पर्यावरणीय निगरानी प्रोटोकॉल स्थापित किए हैं। ये सतत निगरानी ढांचे सरकारी अधिकारियों को प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा सकें।

 

क्रम सं.

स्टार्ट-अप /अनुदान पाने वाले का नाम

परियोजना शीर्षक

1

जेनिरॉन बायोलैब्स प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत

आवारा कुत्तों में रेबीज और प्रतिरक्षण गर्भनिरोधक के लिए बाइसिस्ट्रोनिक सेल्फ-रेप्लिकेटिंग डीएनए वैक्सीन

2

पेंटावेलेंट बायो साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु, कर्नाटक

पेंटाफ्लूवैक: एवियन, स्वाइन और मानव इन्फ्लुएंजा के लिए एक स्वदेशी रेप्लिकेशन-इनकम्पेटेंट वायरल वैक्सीन

3

अमतरसु लाइफसाइंसेज एलएलपी, मुंबई, महाराष्ट्र

मलेरिया के उपचार के लिए अभिनव सिंगल डोज इंजेक्शन थेरेपी - एसआईडीएमआई सिंगल डोज एंटी-मलेरिया इंजेक्शन

4

डॉ. श्वेता राघवन, बेंगलुरु, कर्नाटक

डेंगू के खिलाफ एमआरएनए-एलएनपी आधारित वैक्सीन का विकास

5

मफिन हेल्थ एंड लाइफस्टाइल प्राइवेट लिमिटेड, चंडीगढ़

कीमो एटेन्युएटेड ब्लड स्टेज मलेरिया वैक्सीन

6

श्री अरुण शंकरदोस, बेंगलुरु, कर्नाटक

डेंगू वायरस के लिए नोवेल एडजुवेंटेड नैनोप्लास्मिड आधारित डीएनए वैक्सीन विकास: उभरते संक्रामक रोगों और 'वन हेल्थ'  के लिए इस प्लेटफॉर्म के विस्तार के अवसर

इन प्रयासों के अलावा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) नवाचार को सुगम बनाता है।

बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बिराक), जो कि इसका एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है, के माध्यम से संचालित अनुसंधान। बिराक स्वास्थ्य सेवा आर एंड डी के लिए महत्वपूर्ण धन प्रदान करता है, जिसमें निम्नलिखित तंत्रों के माध्यम से पशुजन्य रोगों के टीकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है:

बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट (बिग): यह कार्यक्रम विभिन्न जैव प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है, जिनमें पशु मूल के पैथोजेन्स पर केंद्रित परियोजनाएं भी शामिल हैं।

पशुजन्य रोगों के लिए वैक्सीन विकास से संबंधित बिग-सहायता प्राप्त परियोजनाओं की सूची:

आईएनडी-गठबंधन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई), उभरते संक्रामक रोगों (ईआईडी) के लिए टीके विकसित करने का कार्य सौंपा गया, आईएनडी-सीईपीईआई वैश्विक सीईपीआई प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित होता है। सितंबर 2025 में औपचारिक रूप से तैयार की गई एक त्रिपक्षीय संलग्नता रणनीति के तहत डीबीटी, बिराक और सीईपीआई ने संभावित प्रकोपों के खिलाफ भारत की वैक्सीन विकास क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पांच साल का सहकारी ढांचा स्थापित किया है।

यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

अनुबंध-I

आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर एल-फॉर्म के आधार पर, 2022-2026* के दौरान भारत में रिपोर्ट किए गए चयनित ज़ूनोटिक रोगों के मामले

वर्ष

क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज

लेप्टोस्पायरोसिस

स्क्रब टाइफस

मामले

मामले

मामले

2022

54

10191

32364

2023

23

14217

55077

2024

373

18997

70366

2025

197

19073

86895

2026*

80

2306

10861

महा योग

727

64784

255563

आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल से  06/03/2026 के  3:25 पीएम तक निकाले गए आंकड़े

*वर्ष 2025 के लिए , 6 मार्च 2026 तक

अनुबंध-II

 

2022-2026* के दौरान आईडीएसपी में रिपोर्ट किए गए ज़ूनोटिक रोगों के प्रकोप के मामले

बीमारी का नाम

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

2022

2023

2024

2025

2026*

वेस्ट नाइल फीवर

केरल

2

9

5

6

-

निपाह वॉयरस रोग

केरल

-

6

2

4

-

पश्चिम बंगाल

-

-

-

-

2

सीसीएचएफ

गुजरात

4

6

-

3

2

राजस्थान

-

-

1

-

-

ह्यूमन रैबीज

अरुणाचल प्रदेश

-

2

4

3

-

असम

1

12

14

6

-

जम्मू एवं कश्मीर

-

1

3

6

-

झारखंड

-

-

2

-

-

कर्नाटक

10

21

5

-

-

मध्य प्रदेश

-

-

1

7

-

महाराष्ट्र

-

-

1

1

-

मणिपुर

-

-

4

3

-

मेघालय

-

9

13

10

-

नगालैंड

-

-

1

4

-

तमिल नाडु

-

-

2

1

-

उत्तर प्रदेश

-

-

-

3

-

पश्चिम बंगाल

-

-

-

1

-

नोटe * 2026 में  18/01/2026 को समाप्त होने वाले तीसरे सप्ताह तक

खाली पंक्तियां ये दर्शाती है कि उक्त वर्ष में कोई प्रकोप रिपोर्ट नहीं हुआ।

 

पीके/केसी/एसके


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