अणु ऊर्जा विभाग
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संसदीय प्रश्न: थोरियम आधारित ऊर्जा परियोजनाएं

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 4:48PM by PIB Delhi

देश में भारतीय तीन चरण के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का एक प्रमुख आधार, थोरियम आधारित बिजली उत्पादन को बड़े पैमाने पर इस तरह से स्थापित करना, जिससे दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर स्वदेशी बिजली उत्पादन सुनिश्चित हो सके, है। दीर्घकालिक ऊर्जा परिदृश्य में इसके लाभ की सभी को जानकारी है। थोरियम आधारित रिएक्टरों से यूरेनियम आधारित रिएक्टरों की तुलना में कम मात्रा में दीर्घकालिक परमाणु अपशिष्ट पैदा न होने की भी उम्मीद है। मोल्टन सॉल्ट रिएक्टर (एमएसआर) को थोरियम के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त तकनीकों में से एक माना जाता है। तीसरे चरण में स्थापित किए जाने वाले थोरियम आधारित ईंधन का उपयोग करने वाले मोल्टन सॉल्ट ब्रीडर रिएक्टर (एमएसबीआर) लगभग वायुमंडलीय दबाव पर कार्य करते हैं। इससे इसकी सुरक्षा बढ़ती है। हालांकि, यह तकनीक अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है और सीमित पैमाने पर प्रदर्शन के बाद ही इसके आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा सकता है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एमएम


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