विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसदीय प्रश्न : आरडीआई योजना
प्रविष्टि तिथि:
11 MAR 2026 5:21PM by PIB Delhi
आरडीआई योजना के लिए नोडल मंत्रालय के रूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) और व्यय विभाग (डीओई) के परामर्श से अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष के कार्यान्वयन दिशानिर्देशों के साथ-साथ योजना को लेकर विशेष वित्तीय नियमों को तैयार और अंतिम रूप दिया है। इन दिशा-निर्देशों को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की कार्यकारी परिषद ने अनुमोदित किया है।
आरडीआई योजना विश्वविद्यालयों को प्रत्यक्ष रूप से वित्त पोषण प्रदान नहीं करती है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के भीतर स्थापित एक विशेष प्रयोजन कोष (एसपीएफ) के माध्यम से संचालित की जा रही यह योजना दो स्तरीय वित्तपोषण संरचना का उपयोग करती है। इस व्यवस्था के तहत, एसपीएफ कोष की देखरेख करता है और एसएफएलएफएम को धनराशि हस्तांतरित करता है। अनुमोदित ढांचे के अनुसार, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) को द्वितीय स्तर के निधि प्रबंधक (एसएलएफएम) के रूप में नामित किया गया है और उन्होंने क्रमशः चार फरवरी 2026 और 13 फरवरी 2026 को परियोजना प्रस्तावों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।
इसके अलावा, फंड ऑफ फंड्स सहित अतिरिक्त पात्र संस्थाओं से एसएलएफएम के रूप में कार्य करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसकी अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 थी। आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और चयन प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
एसएलएफएम रणनीतिक और उभरते हुए क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) चार और उससे ऊपर की प्रौद्योगिकियों का विकास करने वाली पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं को वित्त पोषण प्रदान करेंगे। इनमें स्टार्टअप, कंपनियां और उद्योग-नेतृत्व वाली अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शामिल हैं।
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के अंतर्गत अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (आरडीआईएफ) के संबंध में युवाओं, छात्रों और नवोदित शोधकर्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने एवं भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए मुंबई (25 नवंबर 2025), बेंगलुरु (चार दिसंबर 2025), पंचकुला, हरियाणा (छह दिसंबर 2025) और नई दिल्ली (13 दिसंबर 2025) में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में स्टार्टअप, उद्योग प्रतिनिधियों, कोष प्रबंधकों, युवा शोधकर्ताओं और अन्य पात्र संस्थाओं को शामिल किया गया ताकि एक लाख करोड़ रुपये के आरडीआई कोष के तहत अवसरों पर चर्चा की जा सके और आरडीआई योजना में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।
इस योजना का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा एवं परिवर्तन तथा जलवायु कार्रवाई सहित रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र; क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष सहित गहन प्रौद्योगिकी; कृषि, स्वास्थ्य एवं शिक्षा में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और इसके अनुप्रयोग; जैव प्रौद्योगिकी, जैव विनिर्माण, सिंथेटिक जीव विज्ञान, फार्मा, चिकित्सा उपकरण; और डिजिटल कृषि और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहित डिजिटल अर्थव्यवस्था है। अन्य प्रस्तावित क्षेत्रों में वे प्रौद्योगिकियां शामिल हैं जिनका स्वदेशीकरण रणनीतिक कारणों से या आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है; तथा कोई अन्य क्षेत्र या प्रौद्योगिकी जिसे जनहित में आवश्यक समझा जाता है।
नोडल एजेंसी के रूप में डीएसटी ने सभी मंत्रालयों/विभागों को आरडीआई योजना के तहत उपयुक्त क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से पत्र लिखा है। ऐसे चिह्नित क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों को अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा जाएगा।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एसएस/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2238481)
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