सहकारिता मंत्रालय
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बहु-राज्य सहकारी ऋण समितियाँ

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 4:58PM by PIB Delhi

बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के उपबंधों के अधीन पंजीकृत सहकारी समितियां स्वायत्त सहकारी संगठनों के रूप में कार्य करती हैं और अपने सदस्यों के प्रति जवाबदेह होती हैं । बहुराज्‍य सहकारी समितियां, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 और उसके अधीन निर्मित नियमों के उपबंधों के साथ पठित समिति की अनुमोदित उपविधियों के अनुसार कार्य करते हैं, जिसमें सदस्य, बोर्ड, समिति के साधारण निकाय और सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) की भूमिका और शक्तियां शामिल हैं । बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 49 के उपबंधों के अनुसार सदस्यों को प्रवेश देने, जमाकर्ताओं से जमाराशि स्‍वीकरण और उन्‍हें रिफंड, आदि जैसे व्यावसायिक मामले समिति के बोर्ड की शक्तियों और कार्यों के अधीन आते हैं और समिति का दैनंदिन प्रबंधन बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 52 के उपबंधों के अनुसार समिति के मुख्य कार्यपालक की शक्तियों और कार्यों के अधीन आता है ।

जीजाऊ मां साहेब मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड, ज्ञानराधा मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड, शुभ कल्याण मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड, श्री साईराम अर्बन मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड और राजस्थानी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के विरुद्ध प्राप्त विभिन्न शिकायतों के आधार पर सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक ने सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया कि वे बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 108 के अधीन निरीक्षण करे । निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर, बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के उपबंधों के अधीन परिसमापन प्रक्रिया शुरू करने के लिए आपत्तियां मांगने हेतु इन समितियों को नोटिस भेजे गए हैं । चूंकि, इन समितियों से कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुए इसलिए, बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 86 के अधीन परिसमापन के आदेश पारित किए गए और इन समितियों में बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 89 के अधीन परिसमापक नियुक्त किए गए ।

परिसमापक को समिति की परिसंपत्तियों को परिसमाप्त करने और बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 90 के उपबंधों के अधीन निहित परिसमापक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए, समयबद्ध रीति से बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी नियम, 2002 के नियम 28 और 29 के अनुसार प्रक्रियाओं को अपनाकर निवेशकों/सदस्यों को भुगतान सुनिश्चित करना होगा ।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
 

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AK/AP


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