वित्‍त मंत्रालय
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सरकार ने लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता को बढ़ावा दिया है


इन उपायों में गारंटी-मुक्त कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना, किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाना, 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान करना और छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण तक पहुंच मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना शामिल हैं

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2026 3:34PM by PIB Delhi

सरकार ने कृषि क्षेत्र, विशेष रूप से कम सुविधा वाले कृषि क्षेत्रों में संस्थागत ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. सरकार कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए प्रतिवर्ष जमीनी स्तर के ऋण (जीएलसी) लक्ष्य निर्धारित करती है जिन्हें बैंकों को वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त करना होता है। ये लक्ष्य क्षेत्रवार, एजेंसीवार (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और ग्रामीण सहकारी बैंक) और ऋण श्रेणीवार (फसल और सावधि ऋण) निर्धारित किए जाते हैं। 2021-22 से डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को लक्षित ऋण सहायता प्रदान करने के लिए जीएलसी के अंतर्गत संबद्ध गतिविधियों के लिए समर्पित लक्ष्य निर्धारित किए गए।
  2. भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) संबंधी वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार, वेतनभोगी कर्मचारियों के बैंकों को छोड़कर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबी) सहित वाणिज्यिक बैंकों को अपने समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (एएनबीसी) या ऑफ-बैलेंस शीट एक्सपोजर (सीईओबीएसई) के समतुल्य ऋण का कम से कम 18 प्रतिशत कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित करना अनिवार्य है जिसमें से 10 प्रतिशत का उप-लक्ष्य लघु और सीमांत किसानों (एसएमएफ) के लिए निर्धारित है।
  3. इसके अतिरिक्त, पीएसएल दिशानिर्देश उन जिलों के लिए प्रोत्साहन ढांचा भी निर्धारित करते हैं जहां ऋण का प्रवाह अपेक्षाकृत कम है और उन जिलों में कम ऋण प्रदान करने के लिए हतोत्साहित करने वाला ढांचा भी निर्धारित करते हैं जहां प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण का प्रवाह अपेक्षाकृत अधिक है जिसमें कृषि और लघु तथा सीमांत किसानों को दिया जाने वाला ऋण भी शामिल है।
  4. किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसे कृषि में उपयोग आने वाली सामग्री के क्रय के साथ-साथ फसल उत्पादन और संबंधित गतिविधियों से जुड़ी नकदी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समय पर और सस्ती दरों पर ऋण प्रदान करता है। 2019 से केसीसी योजना का विस्तार पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को भी शामिल करने के लिए किया गया है।
  5. भारत सरकार की संशोधित ब्याज सबवेंशन योजना (एमआईएसएस) के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर अल्पकालिक कृषि ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। समय पर ऋण का भुगतान करने वाले किसानों को 3 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है जिससे उनकी ब्याज दर घटकर मात्र 4 प्रतिशत रह जाती है।
  6. भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 1 जनवरी 2025 से संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण सहित गारंटी-मुक्त अल्पकालिक कृषि ऋणों की सीमा को प्रति उधारकर्ता 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.00 लाख रुपये कर दिया है। इस कदम से विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों (क्षेत्र के 86 प्रतिशत से अधिक) के लिए ऋण की उपलब्धता में वृद्धि होगी जिन्हें उधार लेने के लिए खर्च में कमी और गारंटी की आवश्यकता हटाने से लाभ होगा।
  7. सरकार नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के अंतर्गत आवंटन प्रदान करती है ताकि ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण में सहायता मिल सके जिससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण के समुचित उपयोग की क्षमता का निर्माण होता है।
  8. सरकार ने 2025-2026 के केंद्रीय बजट में घोषित प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) शुरू की है। इस योजना का एक उद्देश्य उन जिलों में दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है जहां कृषि ऋण वितरण कम है।
  9. सरकार ने मुख्य रूप से देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में कार्यरत ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (ग्रामीण सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों) को सशक्त बनाने के लिए नई और आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल आदि जैसे विभिन्न कदम भी उठाए हैं।

उपरोक्त के अतिरिक्त, भारतीय रिजर्व बैंक की लीड बैंक योजना के अंतर्गत नाबार्ड प्रत्येक जिले के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत ऋण क्षमता के आकलन के लिए प्रतिवर्ष संभावित ऋण योजना (पीएलपी) तैयार करता है जिसे राज्य स्तर पर आपस में जोड़ दिया जाता है। राज्य स्तर पर संभावित ऋण योजना को जोड़ कर, पिछले रुझानों, सरकारी प्राथमिकताओं आदि के आधार पर सरकार नाबार्ड के परामर्श से कृषि क्षेत्र के लिए जमीनी स्तर पर ऋण लक्ष्य निर्धारित करती है। इसके अतिरिक्त, नाबार्ड वित्तीय संस्थानों जैसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, वाणिज्यिक बैंकों, गैर-राष्ट्रीय वित्त संस्थानों/माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है ताकि उनके संसाधनों में वृद्धि हो सके और उन्हें पर्याप्त नकदी उपलब्ध हो सके जिससे वे फसल और कटाई के मौसम के दौरान किसानों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/केके/एसएस


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