वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत की बौद्धिक संपदा अनुमोदन प्रणाली को गति, पारदर्शिता और दक्षता के मामले में वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच में शामिल करने का आह्वान किया


श्री पीयूष गोयल ने नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया; स्कूलों में 50,000 नई नवाचार प्रयोगशालाओं पर प्रकाश डाला

भारत में एक दशक में पेटेंट दाखिल करने में 215% की वृद्धि हासिल की है; जीआईआई रैंकिंग में सुधार हुआ है, पहले यह 81 थी जो अब 38 हो गई : श्री पीयूष गोयल

श्री गोयल ने पारदर्शिता और ईमानदारी पर जोर देते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा संबंधी मंजूरी में तेजी लाने के लिए सरकार कर्मचारियों की भर्ती कर रही है

प्रविष्टि तिथि: 09 MAR 2026 9:13PM by PIB Delhi

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज भारत की बौद्धिक संपदा (आईपी) अनुमोदन प्रणाली को गति, पारदर्शिता और दक्षता के मामले में दुनिया की शीर्ष पांच व्यवस्थाओं में शामिल करने का आह्वान किया। साथ ही देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, महिलाओं और युवाओं की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय आईपी पुरस्कार और आईपी सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट, डिजाइन और भौगोलिक संकेत (जीआई) से संबंधित आवेदनों का तेजी से और अधिक कुशल निपटान नवाचार की एक मजबूत संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद करेगा और नवप्रवर्तकों को अपने विचारों को अधिक तेजी से बाजार में लाने में सक्षम बनाएगा।

पुरस्कार विजेताओं को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए मंत्री ने कहा कि ये पुरस्कार उन वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, प्रौद्योगिकी के जानकारों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कृषि संस्थानों और आईआईटी के बहुमूल्य योगदान को मान्यता देते हैं जो भारत के नवाचार-संचालित विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार पाने वाले लोग नए भारत की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं - एक ऐसा भारत जो प्रौद्योगिकी को अपनाता है और वैश्विक नवाचार में अग्रणी बने रहने का प्रयास करता है।

श्री गोयल ने कहा कि इस तरह की उपलब्धियों को मान्यता देना व्यापक आईपी इकोसिस्टम को एक सशक्त संदेश भेजता है कि वे इसी तरह की चुनौतियों का सामना करें और अभूतपूर्व विचारों को विकसित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार विजेताओं को भविष्य में और भी अधिक सफलता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, साथ ही दूसरों को भी इसी तरह की पहचान हासिल करने के लिए प्रेरित करेंगे।

मंत्री ने कम उम्र से ही बच्चों में जिज्ञासा, उत्सुकता और खोज की भावना को पोषित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नवाचार की संस्कृति के निर्माण के लिए युवाओं को नए विचारों का पता लगाने और पारंपरिक सीमाओं से परे सोचने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

केंद्रीय बजट में घोषित स्कूलों में 50,000 नई नवाचार प्रयोगशालाएं स्थापित करने की सरकार की पहल का जिक्र करते हुए श्री गोयल ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य छात्रों के बीच रचनात्मकता, प्रयोग और समस्या-समाधान को बढ़ावा देना है।

उन्होंने पेशेवरों, नवोन्मेषकों और उद्योग जगत के हितधारकों से आग्रह किया कि वे एल्युमिनाई के रूप में अपने स्कूलों और कॉलेजों से जुड़ें और वेबिनार या वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से छात्रों के साथ संवाद कर उन्हें नवाचार, उद्यमिता और समस्या-समाधान के महत्व को समझने के लिए प्रोत्साहित करके इस प्रयास में योगदान दें।

हाल ही में मनाए गए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जिक्र करते हुए मंत्री ने नवाचार और बौद्धिक संपदा (आईपी) पारिस्थितिकी तंत्र में महिलाओं को और प्रभावी ढंग से एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि आज अधिक से अधिक महिलाएं विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ अनुसंधान क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति सुनिश्चित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिभाओं का भंडार मजबूत कौशल आधार और हर साल बड़ी संख्या में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग या गणित (एसटीईएम) स्नातक देश के नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

श्री गोयल ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के नियंत्रक जनरल (सीजीपीडीटीएम) के उन प्रयासों की सराहना की, जो भारत के आईपी पारिस्थितिकी तंत्र में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को अपनाने और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखित करने के लिए जोरदार तरीके से काम कर रहे हैं, जिसमें विकसित अर्थव्यवस्थाओं और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) से सीखे गए सबक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इसने अपनी यात्रा कई चुनौतियों के साथ शुरू की, जिनमें कर्मचारियों की कमी, पुरानी तकनीक और आवेदनों का एक बड़ा बैकलॉग शामिल था, लेकिन बैकलॉग को काफी हद तक खत्म करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि यद्यपि कुछ क्षेत्रों में अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, सरकार लंबित मामलों से निपटने और कार्य क्षमता में सुधार करने के लिए नई प्रतिभाओं की भर्ती कर रही है, क्षमता को मजबूत कर रही है और कौशल को बढ़ा रही है।

पुरस्कार विजेता संस्थानों में से कुछ का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने आईआईटी मद्रास के मार्गदर्शन और उसके स्टार्टअप इनक्यूबेशन हब की प्रशंसा की, जिसे उन्होंने वास्तव में असाधारण बताया। इस सुविधा केंद्र के अपने दौरे को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां बनाया गया इनक्यूबेशन इकोसिस्टम देश भर के अन्य इनक्यूबेशन केंद्रों खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और सिक्किम और भारत के उत्तरी भागों जैसे दूरदराज के क्षेत्रों को उन्नत बनाने के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकता है।

मंत्री ने नए डिजाइनों के लाइसेंसिंग में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिया और नवोन्मेषकों को भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री के तहत नए डिजाइनों और पारंपरिक उत्पादों को पंजीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल विविधता और समृद्ध विरासत को देखते हुए पूरे देश में जीआई पंजीकरण बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हवाले से श्री गोयल ने कहा कि भारत में पेटेंट आवेदनों में वृद्धि देश के युवाओं के बढ़ते नवाचार उत्साह को दर्शाती है, जो भविष्य के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि नवप्रवर्तकों के बीच बढ़ता यह उत्साह वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संदेश दे रहा है कि भारत नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।

भारत के नवाचार सूचकांकों में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, श्री गोयल ने कहा कि देश ने वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति में सुधार किया है, जो 2015 में 81वें स्थान से सुधरकर वर्तमान में 38वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में भारत में पेटेंट दाखिल करने में लगभग 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप भारत की वैश्विक रैंकिंग 14वें से सुधरकर 6वें स्थान पर आ गई है।

श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि रोजमर्रा की जिंदगी में नवाचार के अवसर मौजूद हैं और ऐसी चुनौतियों की पहचान करने और उन्हें हल करने के लिए खुले दिमाग और रचनात्मक सोच की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'जय जवान, जय किसान' को याद किया, जिसमें बाद में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 'जय विज्ञान' के रूप में विस्तारित किया, मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसमें 'जय अनुसंधान' जोड़ा है, जो भारत की विकास यात्रा में नवाचार और अनुसंधान की केंद्रीय भूमिका को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि भारत को कई जनसांख्यिकीय लाभ प्राप्त हैं, जिनमें 30 वर्ष से कम औसत आयु वाली युवा आबादी, संतुलित लिंग अनुपात और सभी क्षेत्रों में औपचारिक कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी शामिल है।

महिलाओं के नेतृत्व में हो रहे नवाचार में उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में महिलाओं द्वारा पेटेंट दाखिल करने की संख्या में 345 गुना वृद्धि हुई है, जो नवाचार परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी बदलाव को दर्शाता है।

मंत्री जी ने कहा कि भारत बौद्धिक संपदा (आईपी) क्रांति का गवाह बन रहा है, जिसमें नवप्रवर्तकों के लिए अपार अवसर मौजूद हैं। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आगे बढ़ने का मार्ग 'नवाचार करो, पेटेंट कराओ, उत्पादन करो और समृद्ध बनो' में निहित है।

स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को सहयोग देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री गोयल ने कहा कि सरकार ने आईपी से संबंधित शुल्क में पहले ही लगभग 50 से 80 प्रतिशत की कमी कर दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि महिला उद्यमियों, स्टार्टअप नवप्रवर्तकों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए फाइलिंग शुल्क में 80 प्रतिशत की कमी को बढ़ाया जाए ताकि सिस्टम को अधिक किफायती और सुलभ बनाया जा सके।

उन्होंने इन आवेदकों का समर्थन करने और आईपी इकोसिस्टम में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए त्वरित प्रक्रिया व्यवस्था तलाशने का भी प्रस्ताव रखा।

भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी के बारे में बात करते हुए श्री गोयल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना का अर्थ दुनिया के लिए दरवाजे बंद करना नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में 38 समृद्ध और काफी हद तक विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत को वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक पहुंच प्राप्त हुई है।

उन्होंने नवोन्मेषकों और उद्यमियों से नए उत्पादों, सेवाओं और निर्यात बाजारों को विकसित करके इन अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

श्री गोयल ने हितधारकों को आश्वासन दिया कि सरकार आईपी मंजूरी में तेजी लाने के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों की भर्ती कर रही है और मंजूरी की गति के मामले में भारत की आईपी प्रणाली को विश्व स्तर पर शीर्ष पांच में शामिल करने के अपने लक्ष्य को दोहराया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यवस्था पारदर्शी, निष्पक्ष और कुशल बनी रहनी चाहिए। साथ ही हितधारकों को प्रोत्साहित किया कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो वे सीधे मुख्य नियंत्रक या संबंधित विभाग के समक्ष अपनी शिकायतें रखें। उन्होंने लोगों से सरकारी प्रक्रियाओं में किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट करने का भी आग्रह किया और आश्वासन दिया कि सरकार उच्च स्तर की ईमानदारी बनाए रखने और नवप्रवर्तकों और सरकारी संस्थानों के बीच निर्बाध संवाद सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री गोयल ने अपने संबोधन का समापन इस विश्वास के साथ किया कि नवप्रवर्तकों, संस्थानों और सरकार के सामूहिक प्रयासों से विचारों को प्रभावशाली रचनाओं में परिवर्तित करने में मदद मिलेगी और भारत को एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनने की दिशा में गति मिलेगी।

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पीके/केसी/आरकेजे


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