वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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डिज़ाइन भारत के विकास के निर्णायक दशक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल


भारत की सांस्कृतिक विविधता को आधुनिक डिज़ाइन से जोड़कर अनोखे वैश्विक उत्पाद बना सकते हैं: श्री पीयूष गोयल

श्री पीयूष गोयल ने डिज़ाइन नवाचार, AI लैब्स और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पांच-सूत्री रोडमैप सुझाया

प्रविष्टि तिथि: 09 MAR 2026 7:36PM by PIB Delhi

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत विकास का निर्णायक दशक में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि डिज़ाइन को केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए। यह तकनीक को लोगों से जोड़ती है और विचारों को प्रभावी सिस्टम, उत्पादों व अनुभवों में बदलती है।

आज नई दिल्ली में 2026 के बजट के बाद वेबिनार को संबोधित करते हुए, जिसमें नए राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान पर चर्चा हुई, मंत्री ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत—औसत उम्र लगभग 28.5 वर्ष—और हर साल करीब 23 लाख STEM स्नातकों से मिलने वाली तकनीकी शक्ति, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गुणक बन रही है। उन्होंने कहा कि ये ताकतें भारत की विकास कहानी को देश के सबसे दूरस्थ इलाकों तक ले जाएंगी और दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव को बढ़ाएंगी। उन्होंने जोड़ा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तब साकार होगा, जब डिज़ाइन को राष्ट्रीय क्षमता का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा।

श्री गोयल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। उन्होंने बताया कि देश में हर कुछ किलोमीटर पर संस्कृति, भोजन, वस्त्र, भाषाएँ और बोलियाँ बदल जाती हैं, और यही समृद्ध विरासत भारत की सबसे बड़ी डिज़ाइन पूंजी है। उन्होंने कहा कि यदि इस विविधता को आधुनिक डिज़ाइन के साथ जोड़ा जाए, तो भारत ऐसे उत्पाद और अनुभव बना सकता है जो अनोखे होंगे और दुनिया के लिए उनकी नकल करना कठिन होगा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में यह एक प्रमुख संस्थान से बढ़कर एक राष्ट्रीय नेटवर्क और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बन गया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अब केवल सौंदर्य आधारित डिज़ाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहा है और एक अग्रणी डिज़ाइन स्कूल के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को मजबूत कर रहा है।

इस वर्ष के बजट के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए श्री गोयल ने कहा कि सरकार ने भारत के पूर्वी भाग में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देश में डिज़ाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी प्रशिक्षित भारतीय डिज़ाइनरों की कमी है जो बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा कर सकें और वैश्विक डिज़ाइन विमर्श में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि नया संस्थान इस कमी को दूर करने और विश्वस्तरीय डिज़ाइन शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि भारत का पूर्वी क्षेत्र संस्कृति, हस्तशिल्प, वस्त्र और उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। लेकिन अतीत में मजबूत डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र के अभाव के कारण इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि नया एनआईडी पारंपरिक शिल्प समूहों, एमएसएमई और उभरते उद्योगों को आधुनिक डिज़ाइन शिक्षा से जोड़ेगा। यह कारीगरों को मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने में मदद करेगा और एमएसएमई को अपने उत्पादों में विविधता लाने में भी सहयोग देगा।

श्री गोयल ने जोर देते हुए कहा कि डिज़ाइन शिक्षा की परिकल्पना केवल एक परिसर की स्थापना तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत ज्ञान को डिज़ाइन शिक्षा के केंद्र में रखा जाना चाहिए, न कि इसे एक वैकल्पिक विषय की तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने और गुणवत्ता, नवाचार, नए उत्पादों और नई तकनीकों के लिए विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले मजबूत ब्रांड इंडिया के निर्माण में डिज़ाइन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इमर्सिव मीडिया और रोबोटिक्स से बदलते वैश्विक तकनीकी परिदृश्य का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि विचारपूर्ण डिज़ाइन के बिना तकनीक असमानता को बढ़ा सकती है और उपयोगिता को कम कर सकती है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें 1.4 अरब नागरिकों के हित में उपयोग करने के लिए भारतीय सोच को तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है, जिससे देश के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य बनाया जा सके।

युवा डिज़ाइनरों और छात्रों को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि वे केवल अपने करियर की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादों, सेवाओं और डिजिटल इंटरफेस के बारे में डिज़ाइनरों द्वारा किए गए निर्णय तय करेंगे कि भारत का अनुभव उसके अपने लोगों के लिए कैसा होगा।

मंत्री ने इस दृष्टि को कार्यरूप देने के लिए पाँच सूत्रीय एजेंडा भी प्रस्तावित किया।

पहला, उन्होंने सुझाव दिया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन को भारतीय डिज़ाइन के ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए और इन परिसरों के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बीच नवाचारी डिज़ाइन के महत्व को बढ़ावा दिया जाए।

दूसरा, उन्होंने उद्योग, विशेष रूप से एमएसएमई, और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने डिज़ाइन क्लीनिक स्थापित करने और क्लस्टर आधारित परियोजनाएँ विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन को सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए ताकि आम नागरिक, हस्तशिल्प और हथकरघा बुनकर तथा पारंपरिक कारीगर भी इससे जुड़ सकें और भारत की कहानी को परिभाषित करने में योगदान दे सकें।

तीसरा, उन्होंने शासन, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं में नागरिक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सेवा और ब्रांड इंडिया डिज़ाइन प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रस्ताव दिया।

चौथा, उन्होंने तकनीकी संस्थानों के सहयोग से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीकों से जुड़े संयुक्त डिज़ाइन प्रयोगशालाएँ स्थापित करने का आह्वान किया, ताकि छात्रों और उद्योग के बीच संबंधों को और मजबूत किया जा सके।

पाँचवाँ, उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में स्थापित होने वाला नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन एक आदर्श परिसर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो सार्वजनिक–निजी भागीदारी को बढ़ावा दे और कारीगरों तथा हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों में काम करने वाले गैर-लाभकारी संगठनों का भी समर्थन करे।

श्री गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि वेबिनार के दौरान होने वाली चर्चाएँ भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में डिज़ाइन को एक केंद्रीय स्तंभ बनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन भारत की समृद्ध परंपराओं में निहित नवाचार का एक वैश्विक प्रतीक बनकर उभरना चाहिए।

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पीके/केसी/वीएस/एसएस


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