रक्षा मंत्रालय
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आईएनएसवी कौंडिन्या को मुंबई बंदरगाह में ध्वजारोहण के साथ उतारा जाएगा

प्रविष्टि तिथि: 01 MAR 2026 8:09PM by PIB Delhi

भारतीय नौसेना के नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्या को 2 मार्च, 2026 को मुंबई बंदरगाह पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ द्वारा औपचारिक रूप से ध्वजारोहण किया जाएगा।

यह ध्वजारोहण समारोह ओमान सल्तनत के लिए पोत की पहली विदेशी यात्रा के सफल समापन तथा अरब सागर को पार कर की गई उसकी ऐतिहासिक वापसी यात्रा का प्रतीक है, जो भारत की चिरस्थायी समुद्री विरासत और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-ओमान संबंधों की सुदृढ़ता की पुष्टि करता है।

आईएनएसवी कौंडिन्या एक पारंपरिक विधि से निर्मित सिलाईदार पोत है, जिसे प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीकों का पूर्णतः अनुसरण करते हुए बनाया गया है। इसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सी से हाथों द्वारा सिला गया है तथा प्राकृतिक रेज़िन से सील किया गया है। यह पोत भारत की सदियों पुरानी समुद्री शिल्प परंपरा के पुनरुद्धार का प्रतीक है और भारतीय ज्ञान प्रणालियों की पुनः खोज एवं संरक्षण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अजंता गुफाओं में पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के एक चित्रण से प्रेरित होकर तथा भारतीय नौसेना की देखरेख में पारंपरिक कारीगरों के सहयोग से निर्मित यह पोत, पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक नौसेना अभियांत्रिकी के सामंजस्य का सशक्त उदाहरण है।

आईएनएसवी कौंडिन्या 29 दिसंबर 2025 को पोरबंदर से मस्कट के लिए रवाना हुई और भारतीय नाविकों द्वारा प्राचीन काल से प्रयुक्त समुद्री मार्गों का अनुसरण किया। यह 14 जनवरी 2026 को पोर्ट सुल्तान काबूस पहुँची, जहाँ ओमान के गणमान्य व्यक्तियों तथा भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति में इसका औपचारिक स्वागत किया गया। अपने प्रवास के दौरान यह पोत आम आगंतुकों के लिए खुला रहा और समुद्री विरासत तथा सांस्कृतिक कूटनीति के एक तैरते प्रतीक के रूप में कार्य करता रहा। इस यात्रा ने भारत-ओमान संबंधों को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया, जिनकी जड़ें मसालों, वस्त्रों और लोबान के व्यापार में हजारों वर्षों से निहित हैं, तथा अरब सागर क्षेत्र में साझा समुद्री परंपराओं को और मजबूत किया।

इस अभियान ने भारतीय नौसेना की भूमिका को केवल समुद्री सुरक्षा प्रदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत समुद्री विरासत के संरक्षक के रूप में भी रेखांकित किया। प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम पर नामित यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्राचीन समुद्री नौवहन परंपरा और समुद्री पहुंच का प्रतीक है। इसकी सफल यात्रा पारंपरिक जहाज निर्माण पद्धतियों की दृढ़ता तथा चालक दल के उच्च स्तर के पेशेवर कौशल का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करती है।

मुंबई में आयोजित ध्वजारोहण समारोह एक ऐतिहासिक समुद्री विरासत पुनरुद्धार परियोजना की परिणति का प्रतीक होगा तथा समुद्री पहुंच, सांस्कृतिक कूटनीति और पारंपरिक समुद्री शिल्पकला के संरक्षण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा।

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पीके/केसी/एनके


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