विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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सुधार के लिए किया गया एक साधारण बदलाव विद्युत प्रकाशिकी के क्षेत्र में लाया एक बड़ी सफलता

प्रविष्टि तिथि: 24 FEB 2026 2:49PM by PIB Delhi

एक नवीन नैनो सॉफ्ट गोल्ड-लिक्विड क्रिस्टल संकर पदार्थ, जो उच्च तापमान के उतार-चढ़ाव के प्रति स्थिर है और जिसमें बेहतर ऑप्टिकल विशेषताएं हैं, अगली पीढ़ी की ऑप्टिकल प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सेंसरों को सुगम बना सकता है।

नैनो-सॉफ्ट संकर पदार्थ, पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में एक रोमांचक नया आयाम प्रस्तुत करता है—जहां नैनो प्रौद्योगिकी की सटीकता, सॉफ्ट पदार्थ की बहु-उपयोगिता से मिलती है। अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पदार्थों में इन पदार्थों की काफी मांग है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान - सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु- के शोधकर्ताओं के एक समूह ने आणविक अभियांत्रिकी और न्यूतम प्रसंस्करण का उपयोग करके नाटकीय संरचात्मक और कार्यात्मक परिवर्तन किए हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीएलवी प्रसाद और पीएचडी स्कॉलर मुस्कान दुग्गल के नेतृत्व में, डॉ. एस. कृष्णा प्रसाद, डॉ. डीएस शंकर राव, डॉ. सीवी येलामग्गड और डॉ. संतोष खटावी के महत्वपूर्ण योगदान के साथ, एक ऐसा गोल्ड लिक्विड क्रिस्टल कंपोजित तैयार किया गया है जो उच्च तापयीय स्थिरता और उन्नत ऑप्टिकल विशेषताओं से लैस है।

इस से एक ऐसा गोल्ड लिक्विड क्रिस्टल कंपोजित विकसित हुआ, जिसमें उच्च तापयीय स्थिरता और उन्नत प्रकाशीय गुण प्राप्त हुए।

इस कार्य में एमीन-फंक्शनलाइज्ड लिक्विड क्रिस्टल (एलसी) नामक एक अणु का संश्लेषण शामिल था, जिसने एक रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में कार्य किया, जिससे सोने के नैनोकणों का निर्माण शुरू हुआ और उन्हें उसी स्थान पर स्थिर भी किया गया, जिससे अतिरिक्त अभिकर्मकों की आवश्यकता समाप्त हो गई।

आणविक संरचना के इस उत्कृष्ट चयन ने संश्लेषण को सरल बनाया और संकर संरचना पर उल्लेनीय नियंत्रण प्रदान किया, जिससे यह प्रदर्शित हुआ कि सरल लिगैंड इंजीनियरिंग किस प्रकार पदार्थ- डिजाइन में बहुमुखी परिणाम दे सकती है। इस नमोन्मेषी डिजाइन ने तापीय स्थिरता की सीमा को शुद्ध एलसी के 27 से बढ़ाकर संकर पदार्थ (एयू-एलसी कंपोजिट) ​​में 145 तक पहुंचा दिया। साथ ही, एक दुर्लभ एवं प्रकाशीय प्रभाव- फैनो-सद्रिश अनुनाद- का उद्भव हुआ, जो उन्नत प्रकाश-आधारित प्रौद्योगिकियों में अपार संभावनाशील है।

इसका उपयोग प्लास्मोनिक लेज़रों (स्पेसर्स) में किया जाता है, जो अत्यंत छोटे लेकिन शक्तिशाली प्रकाश स्रोत होते हैं, साथ ही इसका उपयोग अति संवेदनशील सेंसरों में भी किया जाता है जो रसायनों, प्रदूषकों या जैविक मार्करों की सूक्ष्म मात्रा का पता लगा सकते हैं और विशेष रूप से निर्मित सामग्रियों में भी किया जाता है जो प्रकाश को सटीक दिशा में निर्देशित करती हैं। इससे उच्च-प्रदर्शन वाले फ़िल्टर और यहां तक ​​कि अदृश्यता आवरण बनाने में भी मदद मिलती है। ये महत्वपूर्ण सफलताएं प्रकाशिकी, नैनो-फोटोनिक्स और जैव-चिकित्सा इमेजिंग के भविष्य को आकार दे रही हैं।

चित्र: एयू-एलसी कंपोजिट का दृश्यात्मक निरूपण

सीईएनएस के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार इस सरल नैनो-सॉफ्ट संकर पदार्थ से उत्पन्न विशिष्ट प्रकाशीय व्यवहार यह संकेता देता है कि अब हमारे पास उन प्रभावों को प्राप्त करने का अधिक सुलभ और कुशल मार्ग हो सकता है, जिनके लिए पहले जटिल और महंगी प्रणालियों की आवश्यकता होती थी।


एसीएस एप्लाइड नैनो मैटेरियल्स में प्रकाशित टीम के निष्कर्ष इन संकर पदार्थों की वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए व्यावहारिक प्लेटफार्मों के रूप में काम करने की क्षमता को उजागर करते हैं- जिससे स्मार्ट सेंसर, प्रतिक्रियाशील कोटिंग्स और अगली पीढ़ी के फोटोनिक उपकरणों का विकास अधिक आसानी और व्यापक स्तर पर संभव हो सकेगा।

प्रकाशन लिंक: 10.1021/acsanm.5c00923

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