कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav AI Impact Summit 2026

समावेशी एआई: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जयंत चौधरी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय पवेलियन का दौरा किया

प्रविष्टि तिथि: 17 FEB 2026 6:46PM by PIB Delhi

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के पवेलियन का आज दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने समावेशी विकास और मानव पूंजी निर्माण के सशक्त माध्यम के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को स्थापित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।

इस दौरान दोनों मंत्रियों ने पवेलियन में प्रदर्शित नवाचारों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इनमें व्यावहारिक, विस्तार योग्य तथा भारत में पहली बार प्रस्तुत किए गए एआई समाधान शामिल थे, जो नीतिगत दृष्टिकोण को ठोस और जमीनी प्रभाव में रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं। पवेलियन ने यह भी प्रदर्शित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल उच्च स्तरीय तकनीकी अनुप्रयोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों में अवसरों का विस्तार करने, उत्पादकता में वृद्धि करने तथा आजीविका को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

इस पवेलियन ने यह प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार विशिष्ट या उच्चस्तरीय अनुप्रयोगों की सीमाओं से आगे बढ़कर युवाओं, श्रमिकों, उद्यमियों एवं अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े नागरिकों के लिए वास्तविक, ठोस और मापने योग्य परिवर्तन ला सकती है। आकर्षक प्रदर्शनों और अंतःक्रियात्मक अनुभवों के माध्यम से नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक समाधानों में रूपांतरित करते हुए यह दिखाया गया कि एआई कैसे कौशल तक पहुंच का दायरा विस्तृत कर सकता है, कार्यस्थल की उत्पादकता में वृद्धि कर सकता है और रोजमर्रा की आजीविका को अधिक सशक्त एवं टिकाऊ बना सकता है।

पवेलियन के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कौशल विकास, एआई के साथ कौशल विकास और एआई के लिए कौशल विकास पर आधारित एक समग्र एवं दूरदर्शी ढांचा प्रस्तुत किया गया, जिसने स्पष्ट रूप से दर्शाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को किस प्रकार कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में रणनीतिक रूप से एकीकृत किया जा रहा है। एआई में कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य एसओएआर (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) जैसी गतिविधियों, एनएसक्यूएफ-अनुरूप उभरती हुई नौकरी भूमिकाओं एवं उद्योग के साथ घनिष्ठ साझेदारी में विकसित अल्पकालिक नैनो-क्रेडेंशियल्स के माध्यम से बुनियादी और उन्नत एआई दक्षताओं का निर्माण करना है। आगंतुकों ने सूक्ष्म-शिक्षण मॉड्यूल, लाइव डैशबोर्ड और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन का अनुभव किया, जिन्होंने प्रदर्शित किया कि एआई साक्षरता को विभिन्न आयु समूहों, शैक्षिक पृष्ठभूमि तथा भौगोलिक क्षेत्रों में कैसे सुलभ बनाया जा सकता है, जिससे शिक्षार्थी एआई-सक्षम और भविष्योन्मुखी करियर में आगे बढ़ सकें।

श्री जयंत चौधरी ने पवेलियन में युवा प्रतिभागियों, स्टार्टअप्स और समाधान प्रदाताओं के साथ संवाद करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की एआई रणनीति समावेशी, रोजगारोन्मुखी व भविष्य-केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य मानवीय क्षमताओं को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त और संवर्धित करना होना चाहिए। श्री जयंत चौधरी ने इस बात पर बल दिया कि यदि भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का पूर्ण उपयोग करना है, तो कौशल विकास की प्रणालियों को तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाते हुए निरंतर विकसित करना होगा, ताकि युवाओं को उभरती अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा सके।

आगंतुकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा एसआईडीएच के अंतर्गत संचालित एआई-सक्षम अनुशंसा इंजन था। यह उन्नत प्लेटफॉर्म शिक्षा, प्रमाणन व करियर पथों को एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम में समाहित करता है, जिससे विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, रुचियों एवं आकांक्षाओं के आधार पर व्यक्तिगत कौशल विकास तथा करियर संबंधी अनुशंसा प्राप्त होती हैं। यह समाधान सूचित कौशल चयन में मार्गदर्शन प्रदान करते हुए शिक्षार्थियों को उद्योग-अनुकूल अवसरों से जोड़ता है और इस प्रकार एआई शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के सरकार के उद्देश्य को सशक्त सहयोग देता है। इसके माध्यम से कौशल विकास की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुलभ और परिणामोन्मुख बनती है।

पवेलियन के “स्किलिंग फॉर एआई” गेमिफाइड एक्सपीरियंस जोन ने भारत के अनौपचारिक और श्रमिक वर्ग के वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से एआई के मानवीय प्रभाव को सजीव एवं स्पर्शनीय रूप में प्रस्तुत किया। संवादात्मक प्रदर्शनों के जरिए यह दर्शाया गया कि किस प्रकार एक छोटा किसान मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी और कीट प्रकोप की पूर्वानुमान प्रणाली के लिए एआई-सक्षम उपकरणों का उपयोग कर सकता है; एक इलेक्ट्रीशियन मोबाइल-आधारित एआई एप्लिकेशन की सहायता से तुरंत खराबी की पहचान कर सकता है; एक निर्माण श्रमिक कार्यस्थल पर बहुभाषी एआई लर्निंग सपोर्ट प्राप्त कर अपनी दक्षता बढ़ा सकता है और एक बुनकर एआई-आधारित डिजाइन टूल्स का उपयोग कर अनुकूलित उत्पाद तैयार कर नए बाजारों तक पहुंच बनाते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकता है। इन जीवंत उदाहरणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि एआई केवल कोडर्स या बड़े उद्यमों तक सीमित तकनीक नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की आजीविका में उत्पादकता, दक्षता और आय सृजन को बढ़ाने का एक सशक्त साधन बन सकता है।

इसके साथ ही “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कौशल विकास” सेगमेंट ने यह प्रदर्शित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार कौशल विकास की वितरण प्रणाली, निगरानी तंत्र और समग्र संचालन ढांचे में परिवर्तन ला रही है। एआई-संचालित स्किल इंडिया असिस्टेंट जैसे प्लेटफॉर्म शिक्षार्थियों को उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, योग्यताओं और रुचियों के अनुरूप उपयुक्त करियर पथों पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। वहीं स्किल इंडिया डिजिटल हब में अंतर्निहित अनुशंसा इंजन विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध पाठ्यक्रमों के लिए व्यक्तिगत और डेटा-आधारित सुझाव उपलब्ध कराते हैं।

इस पैवेलियन में एआई-आधारित निगरानी और मूल्यांकन नवाचारों को भी दर्शाया या, जिनमें कंप्यूटर विजन-आधारित उपकरण शामिल हैं, जो कार्य निष्पादन के वास्तविक समय अवलोकन के माध्यम से व्यावहारिक कौशल का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करते हैं। सैद्धांतिक परीक्षण से आगे बढ़कर, ये प्रौद्योगिकियां कौशल प्रमाणन में विशेष रूप से अनौपचारिक और कार्यस्थल परिवेश में पारदर्शिता, मानकीकरण व विश्वसनीयता को बढ़ाती हैं। एनसीवीईटी द्वारा अनुमोदित एनएसक्यूएफ मार्गों के साथ एकीकृत ये उपकरण कौशल सत्यापन, प्रशिक्षण की बेहतर गुणवत्ता और स्किल इंडिया इकोसिस्टम में शिक्षार्थियों के लिए स्पष्ट प्रगति मार्ग सुनिश्चित करते हैं।

एमएसडीई पवेलियन ने अपने आकर्षक और अनुभवात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से यह सशक्त संदेश दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल तकनीकी उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तियों को सशक्त बनाने, आजीविकाओं को सुदृढ़ करने तथा भारत के कार्यबल में आत्मविश्वास को बढ़ाने का एक प्रभावी साधन बन चुका है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से एक समावेशी, मानव-केंद्रित और रोजगारोन्मुखी एआई इकोसिस्टम के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह दृष्टिकोण एक ऐसे विकसित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप है, जो कुशल, लचीला और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूर्णतः तैयार कार्यबल पर आधारित हो।

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पीके/केसी/एनके

 


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