जल शक्ति मंत्रालय
पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने छठे जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद का आयोजन किया
जल उत्सव: जल के प्रति गर्व, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को जागृत करने हेतु संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक भावना का संगम
विभिन्न जिलों ने सामुदायिक सहभागिता, जल स्रोतों के पुनरुद्धार, स्मार्ट जल उपयोगिता, डिजिटलीकृत जल उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण, जल की गुणवत्ता, स्कूली विद्यार्थियों एवं आईईसी द्वारा जल लेखापरीक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर किए गए नवाचारों को साझा किया
प्रविष्टि तिथि:
17 FEB 2026 6:15PM by PIB Delhi
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद के छठे संस्करण का आयोजन किया। इस संवाद में वरिष्ठ अधिकारियों, जिला प्रशासनों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर ‘जल जीवन मिशन (जेजेएम)’ के तहत ‘हर घर जल’ के कार्यान्वयन को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया गया।

इस वर्चुअल कार्यक्रम की अध्यक्षता डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा ने की और इसमें देश भर के जिला कलेक्टरों/उप मजिस्ट्रेटों/जिला के अधिकारियों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में, डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद से इस मिशन की यात्रा पर प्रकाश डाला और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद पिछले छह वर्षों में राज्यों द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शुरुआती वर्षों में जहां तेजी से संसाधनों के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित किया गया था, वहीं अब यह मिशन सामुदायिक स्वामित्व और सामुदायिक प्रबंधन वाली ग्रामीण जल सेवा वितरण की दिशा में बदलाव के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। यह एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो दीर्घकालिक कार्यक्षमता और सेवा की गुणवत्ता को मजबूत करने की दृष्टि से केन्द्रीय महत्व रखता है।
इस बदलाव को दिशा देने में जिला कलेक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ग्राम पंचायतों को योजनाओं का व्यवस्थित हस्तांतरण करने और समुदाय द्वारा संचालन एवं रखरखाव का पूर्ण स्वामित्व ग्रहण सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। विभिन्न राज्यों के उत्साहवर्धक उदाहरणों का हवाला देते हुए, जिनमें ग्राम पंचायतों द्वारा सफलतापूर्वक संचालित चौबीसों घटे काम करने वाली प्रणालियां और महिला सरपंचों द्वारा प्रदर्शित सशक्त नेतृत्व शामिल हैं, उन्होंने कहा कि ये मॉडल जल क्षेत्र में स्थानीय शासन की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन के आगामी विस्तार के बारे में जानकारी दी, जिसमें एकल ग्राम योजनाओं के व्यापक कार्यान्वयन, सौर ऊर्जा आधारित अवसंरचना के विस्तार, पीएम गति शक्ति के जरिए व्यापक परिसंपत्ति मानचित्रण, एक एकीकृत योजना डेटाबेस के निर्माण और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु वित्तीय सुलह को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने सभी जिलों से योजनाओं के हस्तांतरण में तेजी लाने, राज्य जल उत्सव तथा लोक जल उत्सव के तहत समुदाय के नेतृत्व वाली प्रक्रियाओं को मजबूत करने और सतत सेवा वितरण सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए सुरक्षित व पर्याप्त पेयजल के लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।
एनजेजेएम की उप सचिव श्रीमती अंकिता चक्रवर्ती ने छठे जिला कलेक्टर पेयजल संवाद में डीडीडब्ल्यूएस के सचिव, अतिरिक्त सचिव और एनजेजेएम के मिशन निदेशक, राज्यों के मिशन निदेशकों और भाग लेने वाले सभी जिला कलेक्टरों/जिला मजिस्ट्रेटों का स्वागत किया। उन्होंने उन जिलों को बधाई दी जिनकी पहल प्रस्तुति के लिए चुनी गई थी और कहा कि उनके प्रयास ग्रामीण जल सेवा के वितरण की प्रक्रिया में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के बढ़ते राष्ट्रीय भंडार में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि यह संवाद एक-दूसरे से सीखने तथा आपस में नवीन विचारों के आदान-प्रदान के एक मंच के रूप में कार्य करता है और इस बात पर जोर दिया कि जिले वह केन्द्र बिंदु हैं जहां नीतियां परिणामों में परिवर्तित होती हैं और समुदाय-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण स्थायी प्रणालियों को आकार देते हैं। जल उत्सव-जल महोत्सव पर केन्द्रित इस दिन का उल्लेख करते हुए, उन्होंने समुदाय के स्वामित्व और प्रबंधन वाली ग्रामीण जल सेवाओं की दिशा में बदलाव और सेवा की गुणवत्ता, समन्वय एवं नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने में जिला नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
जल उत्सव-जल महोत्सव पर डीडीडब्ल्यूएस की प्रस्तुति
जल उत्सव-जल महोत्सव पर एक विस्तृत प्रस्तुति एनजेजेएम के निदेशक श्री वाई.के. सिंह द्वारा दी गई। इस सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि जल उत्सव एक जन-नेतृत्व वाले आंदोलन के रूप में जल स्थिरता को मजबूत करने के लिए एक बहुस्तरीय जन सहभागिता ढांचे के रूप में कार्य करेगा।
उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जल को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक अनुभवों से पुनः जोड़ना है, जिससे संरक्षण और सतत उपयोग को जमीनी स्तर पर आधारित एक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति में परिवर्तित किया जा सके।
उन्होंने बताया कि जल उत्सव तीन अलग-अलग माध्यमों से मनाया जाएगा।
- राष्ट्रीय स्तर पर जल महोत्सव,
- ii. राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश स्तर पर राज्य जल उत्सव, और
- ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव।
राष्ट्रीय जल महोत्सव 8 से 22 मार्च तक मनाया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के साथ मेल खाता है और विश्व जल दिवस पर समाप्त होगा। इसमें सभी स्तरों पर भागीदारी होगी। राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों को अपने स्थानीय संदर्भ और समय-सीमा के अनुरूप राज्य जल उत्सव आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। ग्राम स्तर पर, लोक जल उत्सव स्थानीय रीति-रिवाजों और जल से जुड़ी परंपराओं एवं सांस्कृतिक प्रथाओं के अनुरूप यह सुनिश्चित करते हुए आयोजित किया जाएगा कि यह आयोजन समुदाय की पहचान को दर्शाए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम पंचायतों को लोक जल उत्सव कैलेंडर तैयार करना होगा, जिससे स्थानीय आयोजनों को समग्र जल उत्सव ढांचे में शामिल किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जल महोत्सव जहां एक निश्चित समयावधि में आयोजित होता है, वहीं राज्यों और ग्राम पंचायतों को स्थानीय परंपराओं एवं मौसमी पैटर्न के अनुसार अपने-अपने जल उत्सव मनाने की पूरी छूट दी गई है। उन्होंने दोहराया कि जल उत्सव केन्द्र द्वारा थोपा गया कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक विकेन्द्रीकृत, सांस्कृतिक रूप से जुड़ा और समुदाय-प्रेरित उत्सव है, जिसका उद्देश्य जल जीवन मिशन के तहत जनभागीदारी को मजबूत करना है।
विभिन्न जिलों की प्रस्तुतियां
निम्नलिखित जिलों ने अपनी प्रगति और जमीनी स्तर पर अपनाई जाने वाली पद्धतियों को प्रस्तुत किया। प्रत्येक प्रस्तुति संबंधित जिला कलेक्टर/उपायुक्त/जिला अधिकारियों द्वारा दी गई।

- गंगटोक, सिक्किम: जिला मजिस्ट्रेट श्री तुषार जी निखारे ने जल के स्रोतों के पुनरुद्धार हेतु किए जा रहे गहन प्रयासों पर प्रकाश डाला। विशेष रूप से धारा विकास के माध्यम से, जहां रिचार्ज गड्ढे, खाइयां और तालाब संकटग्रस्त झरनों को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। जिले ने 15वें वित्त आयोग के समन्वय का लाभ उठाते हुए जल स्रोत विकास को सुदृढ़ किया है और रिसाव एवं क्षति की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए एक निगरानी प्रणाली शुरू की है। उन्होंने बताया कि गंगटोक में प्रशिक्षित तकनीशियनों, वीडब्ल्यूएससी की भागीदारी और महिलाओं की सहभागिता के जरिए सामुदायिक नेतृत्व वाले संचालन एवं रखरखाव को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे जागरूकता अभियानों का समर्थन प्राप्त है। ऊपरी सिंगबेल की सफलता की कहानी ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता ने पहले विफल रही योजना को पुनर्जीवित किया, जिससे विश्वसनीय नल कनेक्शन सुनिश्चित हुए और महिलाओं एवं बच्चों पर बोझ कम हुआ। आगे बढ़ते हुए, जिले का लक्ष्य धारा विकास का विस्तार करना, संचालन एवं रखरखाव प्रणालियों को सुदृढ़ करना और सतत ग्रामीण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत करना है।
- उत्तरी गोवा, गोवा: जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट श्री अंकित यादव ने समावेशी पेयजल सेवा वितरण के लिए जिले के प्रौद्योगिकी-आधारित मॉडल को प्रस्तुत किया। गोवा में शत-प्रतिशत घरों तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच है और अक्टूबर 2020 में इसे ‘हर घर जल’ घोषित किया गया था। यह जिला प्रत्येक घर को मीटरयुक्त कार्यरत नल कनेक्शन प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान कवरेज सुनिश्चित होता है। उत्तरी गोवा ने क्यूआर कोड-आधारित भुगतान द्वारा समर्थित पूरी तरह से डिजिटल एवं वास्तविक समय में तैयार बिलिंग प्रणाली अपनाई है। उत्तरी गोवा अब स्मार्ट वाटर यूटिलिटी की दिशा में अग्रसर है, जिसके तहत आईओटी आधारित वास्तविक समय में निगरानी, जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) और एसटीपी के लिए एससीएडीए एकीकरण और बिलिंग, रिसाव रिपोर्टिंग, नए कनेक्शन और शिकायत निवारण जैसी नागरिक-केन्द्रित सेवाएं प्रदान करने वाला एक एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया जा रहा है। ये पहलें आधुनिक, कुशल और सुलभ जल प्रबंधन पर जिले के फोकस को रेखांकित करती हैं।

- बहराइच, उत्तर प्रदेश: जिला कलेक्टर श्री अक्षय त्रिपाठी ने समय पर कार्य पूरा होने और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु डीडब्ल्यूएसएम के नेतृत्व में मजबूत संस्थागत तंत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें तृतीय-पक्ष द्वारा निरीक्षण, प्रयोगशाला एवं क्षेत्र जल परीक्षण, डिजिटल डैशबोर्ड और समय पर कार्य पूरा होने एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नियमित समीक्षा बैठकें शामिल हैं। आईईसी द्वारा संचालित सामुदायिक सहभागिता, जिसमें विद्यालय स्तर पर वाश गतिविधियाँ, ग्राम स्तर पर जागरूकता सत्र और महिलाओं द्वारा संचालित एफटीके परीक्षण शामिल हैं, व्यवहार परिवर्तन और जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने में सहायक हैं। जिले ने ग्राम स्तर पर संपत्ति हस्तांतरण के लिए संरचित प्रोटोकॉल को भी संस्थागत रूप दिया है, जिसमें संयुक्त सत्यापन, संपत्ति प्रलेखन और संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों और वीडब्ल्यूएसएससी की क्षमता निर्माण शामिल है।
जल आपूर्ति की निगरानी हेतु जिला स्तरीय कॉल सेंटर एक एकल शिकायत निवारण मंच के रूप में कार्य करता है और आपूर्ति के समय, जल की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों एवं रिसावों की वास्तविक समय में निगरानी को संभव बनाता है। जिला निरंतर निगरानी हेतु एससीएडीए से जुड़े डैशबोर्ड के जरिए आईओटी आधारित सेंसर, स्मार्ट फ्लो मीटर, क्लोरीन अवशेष सेंसर और प्रेशर लॉगर को भी एकीकृत कर रहा है।

- नवादा, बिहार: जिला मजिस्ट्रेट श्री रवि प्रकाश ने जल आपूर्ति की वास्तविक समय में निगरानी, रिसाव संबंधी सूचनाओं और गुणवत्ता परीक्षण संबंधी अपडेट हेतु पेयजल ऐप के उपयोग पर जोर दिया, जिससे गांवों में योजना के संचालन की बेहतर निगरानी संभव हो सकी। उन्होंने यह भी बताया कि नल कनेक्शन, जल गुणवत्ता और उपयोग संबंधी कार्यप्रणालियों पर चर्चा के लिए एक सामुदायिक मंच के रूप में मासिक जल चौपाल का आयोजन किया जाता है, जिससे भागीदारी और जागरूकता बेहतर होती है। राजौली बहु-ग्राम सतही जल आपूर्ति योजना के जरिए, फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों के घरों को अब शोधित, सुरक्षित और फ्लोराइड मुक्त जल प्राप्त हो रहा है, जिससे दूषित भूजल पर निर्भरता काफी कम हो गई है और स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। सभी पंचायतों में जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने, एफटीके परीक्षण और सक्रिय मरम्मत तंत्रों ने सेवा की विश्वसनीयता और जन विश्वास को और बढ़ाया है।

- जैसलमेर, राजस्थान: जिला कलेक्टर श्री प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में शुष्क परिस्थितियों से निपटने हेतु वर्षा जल संचयन, कृत्रिम जल पुनर्भरण संरचनाओं और नहर एवं भूजल के संयुक्त उपयोग जैसे उपायों के जरिए जल स्रोतों की स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है। जल संकट के समय अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वामित्व वाली जल संचयन प्रणालियों को मजबूत करते हुए वित्त आयोग के अनुदान और वीबी-जी राम जी के समन्वय के माध्यम से पारंपरिक टंकाओं का पुनरुद्धार और विस्तार किया जा रहा है। वीडब्ल्यूएससी के नेतृत्व में निगरानी, रिसाव नियंत्रण और भूजल जागरूकता गतिविधियां जिले में दीर्घकालिक जल सुरक्षा को और बढ़ावा देती हैं।

- लोंगडिंग, अरुणाचल प्रदेश: उपायुक्त श्री कुणाल यादव ने जिले में जल स्रोतों के संरक्षण पर दिए जा रहे मजबूत प्रयासों के बारे में बताया। ये प्रयास 14वें और 15वें वित्त आयोग के अनुदानों के समन्वय से ग्रामीण जल संग्रहण क्षेत्रों में व्यापक वर्षा जल पुनर्भरण गड्ढों के निर्माण के जरिए किए जा रहे हैं। ग्रामीण स्वेच्छा से राज्य के पेयजल संग्रहण क्षेत्र अधिनियम के तहत जल संग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण कर रहे हैं। जल संग्रहण संरक्षण और जल पुनर्भरण पर लाइव प्रदर्शनियों और आईईसी अभियानों ने सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कैमोई जैसे गांवों में, विभिन्न बस्तियों के बीच प्रतियोगिताओं ने जल आपूर्ति संबंधी परिसंपत्तियों के संचालन एवं रखरखाव, शुल्क संग्रह और देखरेख में सामुदायिक स्वामित्व को काफी मजबूत किया है। इन स्थानीय स्तर पर संचालित पहलों ने न केवल रखरखाव संबंधी अनुशासन में सुधार किया है, बल्कि निवासियों में गर्व और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित की है, जिससे जल प्रणालियों की स्थिरता में योगदान मिला है।

- दक्षिण अंडमान, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह: उपायुक्त श्रीमती पूर्वा गर्ग ने जल सुरक्षा पर जिले के मजबूत फोकस के बारे में बताया, जिसे जलाशयों की गाद निकालने, कुओं की सफाई और 158.68 मिलीलीटर की संयुक्त क्षमता वाले 29 तालाबों के निर्माण के साथ-साथ दीर्घकालिक एफएचटीसी के लिए रिचार्ज कुओं और बोरवेल जैसे व्यापक जल स्रोत की स्थिरता संबंधी उपायों द्वारा समर्थित किया गया है। प्रशासन विशेष रूप से पीआरआई परामर्श और डीडब्ल्यूएसएसएम बैठकों के जरिए समुदायों से सक्रिय रूप से सुझाव प्राप्त करता है, जिससे स्थानीय जल स्रोतों के पुनरुद्धार, चेक वियर को मजबूत करने और समुदाय संचालित जल संग्रहण संरक्षण जैसे समाधान निकले हैं।
दक्षिण अंडमान जिले में स्कूली विद्यार्थियों द्वारा जल लेखापरीक्षा शुरू की गई है, जिसमें मानक मूल्यांकन प्रारूप का उपयोग करके जल अपव्यय की पहचान की जाती है और जल के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है। जिले में व्यापक आईईसी गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जैसे जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक, प्रिंट मीडिया अभियान और मरीना पार्क में एक अनूठा ‘जल संगीत कार्यक्रम’, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता को बढ़ाना है। समुदाय द्वारा संचालित और युवाओं के नेतृत्व वाली इन पहलों ने व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव लाने और पूरे जिले में दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

‘हर घर जल’ के तहत प्रगति को गति देने के लिए अपनाए गए दृष्टिकोणों की विविधता को रेखांकित करते हुए, इन प्रस्तुतियों में उपलब्धियों और मौजूदा चुनौतियों दोनों को प्रदर्शित किया गया।
अपने समापन भाषण में, एनजेजेएम के एएस एंड एमडी श्री के.के. सोन ने कहा कि आज के प्रस्तुतीकरण में कवरेज, कार्यप्रणाली, स्रोत की स्थिरता, जल की गुणवत्ता, ग्रेवाटर के प्रबंधन, विलवणीकरण एवं सामुदायिक स्वामित्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है और इस बात पर जोर दिया कि इन सभी प्रयासों की प्रभावशीलता अंततः जिला कलेक्टरों के नेतृत्व पर निर्भर करती है। उन्होंने दोहराया कि जमीनी स्तर पर, जहां राष्ट्रीय नीतियां सेवाओं में परिणत होती हैं, वहां जिला कलेक्टर ही कार्यप्रणाली, जवाबदेही और चुनौतियों के समय पर समाधान सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने जिलों से जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) डैशबोर्ड का नियमित और सक्रिय उपयोग करने का आग्रह किया, जो अब पूरी तरह से कार्यरत है। उन्होंने अनुरोध किया कि डीडब्ल्यूएसएम की बैठकें हर महीने नियमित रूप से आयोजित की जाएं, जिनमें डैशबोर्ड के डेटा की समीक्षा पहले से की जाए और कार्रवाई के बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्ज करके उन पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने ऐसे कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिन पर जिलों को ध्यान देने की आवश्यकता है। इनमें सामुदायिक भागीदारी के जरिए जल सेवा आकलन, जल अर्पण, जल उत्सव सहित पंचायत स्तर के डैशबोर्ड का उपयोग, पंचायत सचिवों की क्षमता निर्माण, इंजीनियरिंग टीमों को सुदृढ़ करना और कार्यात्मक जिला जल इकाइयों (डीटीयू) को सुनिश्चित करना शामिल है।
उन्होंने आगे बताया कि नीति आयोग से केन्द्रीय प्रभारी अधिकारियों (सीपीओ) के क्षेत्र भ्रमण के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है, विशेष रूप से आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (एबीपी) के अंतर्गत आने वाले जिलों के लिए। सीपीओ क्षेत्र भ्रमण और आभासी बातचीत के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति का आकलन करेंगे। इसलिए उन्होंने जिलों से आग्रह किया कि वे अद्यतन आंकड़े, स्पष्ट कार्य योजनाएं और जमीनी स्तर पर हुई प्रगति के प्रमाण बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि भले ही पर्याप्त प्रगति हासिल की गई है, लेकिन मिशन के अगले चरण में कार्यक्षमता, स्थिरता और सामुदायिक स्वामित्व पर अधिक ध्यान केन्द्रित करते हुए गहन सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिला कलेक्टरों और जिला अधिकारियों के निरंतर समर्थन एवं नेतृत्व से मिशन नई शक्ति और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगा।

जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद के छठे संस्करण में, राज्य/केन्द्र - शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टर/उपायुक्त/जिला अधिकारी, मिशन निदेशक और राज्य मिशन दल सहित देश भर से प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2229430)
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