विधि एवं न्याय मंत्रालय
टेली-लॉ इनिशिएटिव (डिशा) के अंतर्गत श्रीनगर, जम्मू एवं कश्मीर में क्षेत्रीय आयोजन-सह-कार्यशाला आयोजित
ये कार्यशाला विभाग की चल रही उन प्रयासों का हिस्सा है, जो प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने और प्रमुख हितधारकों के बीच सूचित विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई है।
जम्मू एवं कश्मीर में न्याय तक सबकी पहुंच को मजबूत करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रकाश डाला
माननीय मंत्री ने जोर दिया कि टेली-लॉ पहल के तहत प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के माध्यम से, मजबूत कानूनी जागरूकता, विस्तारित प्रो बोनो सेवाओं से न्याय हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए चाहे वे कहीं भी स्थित हों,
टेली-लॉ, कानूनी जागरूकता और प्रो बोनो सेवाओं को समावेशी न्याय वितरण को बढ़ावा देने के लिए मजबूत किया गया
प्रविष्टि तिथि:
17 FEB 2026 6:08PM by PIB Delhi
डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (डिशा) योजना के टेली-लॉ इनिशिएटिव के तहत एक क्षेत्रीय आयोजन-सह-कार्यशाला आज यानी 17-02-2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित की गई। विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित यह कार्यशाला विभाग के तरफ से चलाए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। इसका मकसद प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं के माध्यम से न्याय तक सभी की पहुंच को मजबूत करने और सभी प्रमुख हितधारकों, सीएससीएस, लॉ स्कूलों सहित न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासकों, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं, छात्रों और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों के बीच सूचना और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई थी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, जम्मू एवं कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र के माननीय मुख्यमंत्री माननीय श्री उमर अब्दुल्ला तथा जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री अरुण पल्ली की उपस्थिति से सुशोभित हुआ।मुख्य अतिथि, कानून एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने केंद्रीय संदेश को दोहराते हुए कहा, “ देश के संविधान के अनुसार सबको न्याय प्राप्त करने का हक है और इस कार्यशाला का भी यही उद्देश्य है,” उन्होंने यह जोर देकर कहा कि हर ऐसे कार्यक्रम का यह सिद्धांत मूल बनना चाहिए, ताकि हर नागरिक तक न्याय पहुंचे, चाहे वे गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों या तटीय इलाकों में कहीं भी रहते हों। मंत्री ने क्षेत्र में उनके कार्य का व्यापक प्रभाव महसूस होने की बात कहते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री अरुण पल्ली की समर्पित सेवा की प्रशंसा की। सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, मंत्री ने वीर परिवार सहायता योजना, 2025 का उल्लेख किया और एक सैनिक के परिवार की मार्मिक घटना साझा की, ताकि मजबूत कानूनी सहायता प्रणालियों के महत्व को रेखांकित किया जा सके। उन्होंने प्रो बोनो वकीलों के नेटवर्क का विस्तार करने के लिए छोटी-छोटी केंद्रित कार्यशालाओं के आयोजन को प्रोत्साहन दिया तथा वीएलई, अधिवक्ताओं और छात्रों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया।
काव्यात्मक नोट पर समापन करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से जम्मू एवं कश्मीर न्याय तक पहुंच के एक मॉडल क्षेत्र के रूप में परिवर्तित हो जाएगा तथा टेली-लॉ कार्यक्रम को और मजबूत करेगा।
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कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और स्थानीय कलाकारों द्वारा “वंदे मातरम” की सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई, जो भारत के राष्ट्रगान वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ का उत्सव मनाने वाली थी। कार्यशाला जारी रखते हुए, अपने स्वागत भाषण में न्याय विभाग के सचिव (न्याय) ने अनुच्छेद 39ए, अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के संवैधानिक निर्देश पर प्रकाश डाला तथा डिशा की भूमिका पर जोर दिया, जो नागरिकों विशेषकर दूरस्थ और असेवित क्षेत्रों के लिए सुलभ, किफायती और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
सचिव (न्याय) के स्वागत भाषण के बाद, डिशा योजना के आयाम: सुगम एवं सुलभ न्याय तक पहुंच खंड में, कार्यक्रम के दौरान टेली-लॉ सेवा के कार्यप्रणाली तथा न्याय तक आसान पहुंच और समयबद्ध प्री-लिटिगेशन कानूनी सलाह प्रदान करने में इसकी भूमिका के बारे में नागरिकों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक छोटा सूचनात्मक वीडियो प्रदर्शित किया गया। वीडियो ने टेली-लॉ को न्याय बंधु कार्यक्रम के साथ एकीकरण तथा न्याय सहायकों द्वारा प्रदान किए जाने वाले समर्थन को भी रेखांकित किया। यह दर्शाता है कि कैसे ये प्रयास लाभार्थियों को योग्य कानूनी पेशेवरों और प्रो बोनो अधिवक्ताओं से जोड़ती हैं, जिससे जमीनी स्तर पर कानूनी सेवाओं के वितरण को मजबूत किया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान, टेली-लॉ के अंतर्गत पैनल वकील, न्याय सहायक तथा ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई) सहित उपलब्धियों वाले व्यक्तियों को न्याय तक अंतिम छोर पर पहुंच मजबूत करने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समयबद्ध कानूनी सहायता प्रदान करने, कानूनी जागरूकता फैलाने तथा टेली-लॉ और संबद्ध पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन में उनके समर्पित प्रयासों की सराहना की गई। सम्मान समारोह ने इन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका को रेखांकित किया, जो विशेषकर दूरस्थ और असेवित क्षेत्रों में नागरिकों को सशक्त बनाने तथा न्याय वितरण प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करने में योगदान देते हैं।
कार्यक्रम में माननीय अतिथियों के उद्बोधनों का विशेष आकर्षण रहा, जिसमें मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला का मुख्य उद्बोधन प्रमुख था, जिसमें उन्होंने मूल संदेश को दोहराया कि “मुल्क के आयीन के अनुसार सबको न्याय प्राप्त करने का हक है और इस कार्यशाला का भी यही उद्देश्य है,” तथा जम्मू एवं कश्मीर में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के माध्यम से कानूनी जागरूकता और न्याय तक पहुंच को मजबूत करने में न्याय विभाग के प्रयासों की सराहना की। “न्याय में विलंब न्याय का इंकार है” पर जोर देते हुए, उन्होंने अदालतों में बढ़ते बोझ और लंबित मामलों पर प्रकाश डाला तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने के लिए मामलों के समयबद्ध निपटारे, टालने योग्य विवादों को रोकने तथा वैकल्पिक समाधान तंत्रों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नोट किया कि टेली-लॉ जैसी पहल, जो लगभग 4,000 पंचायतों में 7.5 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुंची हैं, विवादों के प्री-लिटिगेशन चरण में समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रगति को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा न्याय विभाग के साथ निरंतर सहयोग तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के अपनाने से और अधिक उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने कार्यशाला के टेली-लॉ को और मजबूत करने तथा अदालतों पर बोझ कम करने में योगदान देने पर विश्वास व्यक्त किया। समारोह को संबोधित करते हुए श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जोर दिया कि भारत का संविधान न्याय, समानता और गरिमा का आधार स्तंभ है। उन्होंने कहा कि टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा कानूनी साक्षरता कार्यक्रम जैसी पहलें डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग न्याय वितरण को बदल चुका है, जिससे कानूनी सेवाएं नागरिकों के ज्यादा करीब आ गई हैं।
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कार्यशाला ने हितधारकों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति संवाद के लिए एक मूल्यवान मंच प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए, संयुक्त सचिव ने क्षेत्रीय कार्यशाला की सफलता में उनके मूल्यवान योगदान के लिए सभी माननीय अतिथियों, वक्ताओं तथा प्रतिभागियों को हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री तथा माननीय मुख्य न्यायाधीश को उनके मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी उपस्थिति के लिए धन्यवाद दिया, तथा नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण को आगे बढ़ाने में न्याय विभाग के सचिव के नेतृत्व को स्वीकार किया। उन्होंने सीएससी टीम, नालसा, स्लसा, स्थानीय प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया तथा अन्य हितधारकों को उनके समर्पित समर्थन के लिए भी आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यशाला डिजिटल एवं समावेशी न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इसके परिणामों के जमीन पर सार्थक कार्रवाई में रूपांतरित होने का विश्वास व्यक्त किया।
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पीके /केसी / एमएम / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2229400)
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