पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

संसद में प्रश्न: मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की सटीकता

प्रविष्टि तिथि: 12 FEB 2026 12:53PM by PIB Delhi

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मॉनसून के दौरान वर्षा के लिए सरलीकृत पूर्वानुमान रणनीति का पालन करता है। इस रणनीति के अनुसार यह अलग-अलग समय-सीमाओं और अलग-अलग स्थानिक-सीमाओं के लिए पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है। मौसम पूर्वानुमान से सभी जिलों और लगभग 1200 स्टेशनों पर सभी प्रकार की गंभीर मौसम स्थितियों के लिए छह घंटे तक का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। यह शहरों, ब्लॉकों, जिलों और मौसम विज्ञान उपखंडों में वर्षा के लिए अल्प से मध्यम अवधि (7 दिनों तक) का पूर्वानुमान जारी करता है। 36 मौसम विज्ञान उपखंडों के लिए विस्तारित अवधि (4 सप्ताह तक) का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। पूरे देश और एक समान क्षेत्रों के लिए वर्षा के मासिक और मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान भी जारी किए जाते हैं।

वर्ष 2025 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए इसके मौसमी दीर्घकालिक पूर्वानुमान की सटीकता के नवीनतम आकलन से पता चलता है कि यह अत्यधिक सटीक था। अप्रैल 2025 में जारी पूर्वानुमान देश भर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) की वर्षा के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 105% था, जबकि देश भर में वास्तविक मौसमी वर्षा एलपीए का 108% थी, जो पूर्वानुमान त्रुटि की सीमा के भीतर है। देश के अधिकांश हिस्सों में पूर्वानुमान काफी हद तक सटीक थे। इसी प्रकार मासिक वर्षा का पूर्वानुमान भी काफी हद तक वास्तविक वर्षा से मेल खाता था और पूर्वानुमानित सीमा के भीतर ही रहा।

भारी वर्षा के पूर्वानुमान के प्रदर्शन की नवीनतम समीक्षा से पता चलता है कि 2025 में भारी वर्षा के पूर्वानुमान ने उच्च दक्षता का प्रदर्शन किया, जिसमें 0.85 की पहचान संभावना समग्र रूप से अच्छी सटीकता का संकेत देती है।

आईएमडी ने 2021 से मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) दृष्टिकोण पर आधारित मासिक और मौसमी पूर्वानुमान के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में विभिन्न वैश्विक जलवायु पूर्वानुमान और अनुसंधान केंद्रों के संयुक्त वैश्विक जलवायु मॉडल (सीजीसीएम) का उपयोग किया जाता है, जिसमें आईएमडी की मॉनसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) भी शामिल है। एमएमई-आधारित पद्धति को अपनाने के बाद से आईएमडी की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। वर्ष 2021 से 2025 की अवधि के लिए अखिल भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के आईएमडी के मौसम पूर्वानुमान के सत्यापन विवरण नीचे दिए गए हैं:

 

वर्ष

अखिल भारतीय मॉनसून वर्षा (एलपीए)

वास्तविक (%)

पूर्वानुमान (%)

टिप्पणी

2021

99

101

सही

2022

106.5

103

सही

2023

95

96

सही

2024

108

106

सही

2025

108

106

सही

***मॉडल त्रुटि ± एलपीए का 4 प्रतिशत है

मौसमी और अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान के लिए आईएमडी अपने परिचालन पूर्वानुमान ढांचे के तहत कई उन्नत उपकरणों, मॉडलों और अवलोकन प्रणालियों का उपयोग करता है। मिशन मौसम के तहत भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS), एक उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया गया है, जो 6 किमी की बहुत उच्च स्थानिक रेजोल्यूशन पर पहले से ही संचालित है। इसमें 10 दिनों तक वर्षा घटनाओं की भविष्यवाणी करने की क्षमता है, जो अल्पकालिक और मध्यम-सीमा पूर्वानुमानों को कवर करती है। इसके अलावा नियमित रूप से चलने वाले ऐसे उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल का समर्थन करने के लिए, कंप्यूटिंग सुविधाओं में भी काफी वृद्धि की गई है ताकि विशाल डेटा को एकीकृत किया जा सके और मेसो-स्केल, क्षेत्रीय और वैश्विक मॉडलों को उच्च रिजॉल्यूशन पर चलाया जा सके। हाल ही में उच्च शक्ति कंप्यूटिंग सिस्टम 'अरुणिका' और 'अर्का के कार्यान्वयन के साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2025 में अपनी कुल कंप्यूटिंग क्षमता को 28 पेटा एफएलओपी तक बढ़ा दिया है, जो 2014 में पिछली क्षमता 6.8 पेटा एफएलओपी से काफी अधिक है।

आईएमडी मॉडल के प्रदर्शन को बेहतर बनाने, मॉडल आउटपुट की पोस्ट-प्रोसेसिंग, पैटर्न रिकग्निशन, बायस करेक्शन और प्रोबेबिलिस्टिक फोरकास्ट इंटरप्रिटेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित तरीकों को धीरे-धीरे एकीकृत कर रहा है। वर्तमान में मौसम अवलोकन प्रणाली में 48 डॉप्लर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) शामिल हैं जो देश के लगभग 92% हिस्से को कवर करने के साथ ही उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह-आधारित निगरानी और लगभग 6,300 वर्षामापी स्टेशन के साथ मिलकर काम करते हैं।

भारत में कुल 48 डीडब्ल्यूआर स्थापित और कार्यरत हैं। देश भर में जहां-जहां डीडब्ल्यूआर नेटवर्क स्थापित किया गया है, उन स्थानों की सूची परिशिष्ट-1 में दी गई है। इससे आईएमडी को बादल फटने, गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और चक्रवात जैसी गंभीर घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान में सुधार करने में मदद मिली है।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 12 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी थी।

परिशिष्ट-1

देश में वर्तमान डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) नेटवर्क के स्थान:

क्र.सं.

राज्य

स्थान

  1.  

आंध्र प्रदेश

मछलीपट्टनम

  1.  

आंध्र प्रदेश

विशाखापत्तनम

  1.  

आंध्र प्रदेश

श्रीहरिकोटा, इसरो

  1.  

असम

मोहनबाड़ी

  1.  

असम

जोरहाट

  1.  

बिहार

पटना

  1.  

छत्तीसगढ़

रायपुर

  1.  

गोवा

गोवा

  1.  

गुजरात

भुज

  1.  

हिमाचल प्रदेश

जोत

  1.  

हिमाचल प्रदेश

मुरारी देवी

  1.  

हिमाचल प्रदेश

कुफरी

  1.  

कर्नाटक

मंगलौर

  1.  

केरल

कोच्चि

  1.  

केरल

वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम (इसरो)

  1.  

मध्य प्रदेश

भोपाल

  1.  

मध्य प्रदेश

सिलखेड़ा (आईआईटीएम)

  1.  

महाराष्ट्र

मुंबई

  1.  

महाराष्ट्र

नागपुर

  1.  

महाराष्ट्र

आईआईटीएम सोलापुर

  1.  

महाराष्ट्र

वेरावली

  1.  

महाराष्ट्र

मुंबई, जुहू (आईआईटीएम)

  1.  

महाराष्ट्र

मुंबई, पनवेल (आईआईटीएम)

  1.  

महाराष्ट्र

मुंबई, कल्याण, डोंबिवली (आईआईटीएम)

  1.  

महाराष्ट्र

मुंबई, वसई, विरार (आईआईटीएम)

 

  1.  

महाराष्ट्र

महाबलेश्वर (आईआईटीएम)

  1.  

मेघालय

चेरापूंजी (इसरो)

  1.  

ओडिशा

गोपालपुर

  1.  

ओडिशा

पारादीप

  1.  

पंजाब

पटियाला

  1.  

राजस्थान

जयपुर

  1.  

तमिलनाडु

चेन्नई

  1.  

तमिलनाडु

कराईकल

  1.  

तमिलनाडु

एनआईओटी चेन्नई

  1.  

तेलंगाना

हैदराबाद

  1.  

त्रिपुरा

अगरतला

  1.  

उत्तराखंड

लैंसडाउन

  1.  

उत्तराखंड

मुक्तेश्वर

  1.  

उत्तराखंड

सुरकंडा देवी

  1.  

उत्तर प्रदेश

लखनऊ

  1.  

पश्चिम बंगाल

कोलकाता

  1.  

जम्मू एवं कश्मीर

बनिहाल टॉप

  1.  

जम्मू एवं कश्मीर

जम्मू

  1.  

जम्मू एवं कश्मीर

श्रीनगर

  1.  

दिल्ली

आयानगर

  1.  

दिल्ली

पालम

  1.  

दिल्ली

मुख्यालय मौसम भवन

  1.  

लद्दाख

लेह

 

पीके/केसी/आरकेजे


(रिलीज़ आईडी: 2228957) आगंतुक पटल : 8
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