रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
घरेलू उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देना
प्रविष्टि तिथि:
13 FEB 2026 5:23PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने आयातित सक्रिय औषधीय सामग्री या अवयव (एपीआई) पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- भारत में महत्वपूर्ण प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम)/औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय औषधीय सामग्री या अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्रियान्वित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन यानी (पीएलआई) योजना (सामान्य रूप से यह बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के रूप में जानी जाती है): इस योजना का उद्देश्य उन महत्वपूर्ण दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण एपीआई की आपूर्ति में व्यवधान से बचना है जिनके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं हैं और ऐसा किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम को कम करके किया जाएगा। इस योजना के लिए 6,940 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। दिसंबर 2025 तक ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में छह वर्षों की अवधि में 4,329.95 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता के मुकाबले 4,814 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा 26 केएसएम/डीआई/एपीआई के लिए उत्पादन क्षमताएं विकसित की गई हैं, जिन्हें पहले मुख्य रूप से आयात किया जाता था। इस योजना के परिणामस्वरूप दिसंबर 2025 तक 2,720 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज की गई है, जिसमें 527.96 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है, जिससे 2,192.04 करोड़ रुपये के आयात की बचत हुई। इस योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2029-30 तक है।
- II. औषधियों के लिए पीएलआई योजना: इस योजना का उद्देश्य फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के उत्पाद विविधीकरण में योगदान देना है। यह योजना बायोफार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाएं, पेटेंट वाली दवाएं या पेटेंट की समाप्ति के करीब वाली दवाएं, ऑटोइम्यून दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं आदि जैसी उच्च मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। साथ ही बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना के तहत अधिसूचित एपीआई/डीआई/केएसएम के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करती है। इसका बजटीय आवंटन 15,000 करोड़ रुपये है। दिसंबर 2025 तक योजना की छह साल की अवधि में लक्षित 17,275 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश को काफी हद तक पार कर लिया गया है, जिसमें ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड दोनों परियोजनाओं में संचयी निवेश 41,920 रुपये करोड़ किया गया है। इसके अलावा इस योजना के तहत 726 एपीआई/केएसएम/डीआई का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 191 का निर्माण इस योजना के तहत पहली बार किया जा रहा है। इस योजना के तहत दिसंबर 2025 तक उत्पादित एपीआई/केएसएम/डीआई की कुल घरेलू बिक्री 28,067 करोड़ रुपये है, जिससे आयात लागत में कमी आई है। योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक है।
- थोक औषधि पार्कों को बढ़ावा देने की योजना : इस योजना के लिए 3,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसके तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश राज्यों में तीन बल्क ड्रग पार्कों को मंजूरी दी गई है और वे संबंधित राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इन पार्कों की कुल परियोजना लागत 6,306.68 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें सामान्य अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक पार्क से 1,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। इन पार्कों में थोक दवा या एपीआई निर्माताओं को पार्क में स्थापित इकाइयों के लिए रियायती दर पर भूमि और बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और गोदाम आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है। संबंधित राज्यों की राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों ने भी निश्चित पूंजी निवेश पर पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, राज्य वस्तु एवं सेवा कर प्रतिपूर्ति, स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट आदि के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश की है। इसके अलावा इस योजना में पार्कों में भूमि आवंटन के लिए आवेदन करने वालों को बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना में प्राथमिकता प्राप्त उत्पादों के निर्माण के लिए इकाइयां स्थापित करने का प्रावधान है, ताकि उन्हें भूमि आवंटन में प्राथमिकता मिल सके।
उर्वरक विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार देश भर में दूरस्थ क्षेत्रों सहित उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा हर तरह के मौसम को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं :
- प्रत्येक फसल के मौसम की शुरुआत से पहले कृषि और किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्ल्यू) सभी राज्य सरकारों के परामर्श से राज्यवार और माहवार उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है।
- II. कृषि एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अनुमानित आवश्यकता के आधार पर उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना जारी करके राज्यों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक आवंटित करता है और उपलब्धता की निरंतर निगरानी करता है।
- देश भर में सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही की निगरानी एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली नामक एक ऑनलाइन वेब-आधारित निगरानी प्रणाली से की जाती है।
- IV. कृषि एवं परिवार कल्याण विभाग और उर्वरक विभाग द्वारा राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ नियमित साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती है और राज्य सरकारों द्वारा निर्देशित अनुसार उर्वरकों को भिजवाने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
- राज्य के भीतर उर्वरकों का वितरण संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
- VI. किसानों को वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर यूरिया उपलब्ध कराया जाता है। 45 किलोग्राम यूरिया के बैग का एमआरपी 242 रुपये प्रति बैग है (इसमें नीम कोटिंग शुल्क और कर शामिल नहीं हैं)। भारत सरकार द्वारा यूरिया के उत्पादक/आयातकर्ता को खेत में यूरिया की वितरण लागत और यूरिया इकाइयों द्वारा प्राप्त शुद्ध बाजार मूल्य के बीच का अंतर सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। इसके हिसाब से सभी किसानों को रियायती दरों पर यूरिया की आपूर्ति की जा रही है।
रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र को सहयोग देने के लिए विभिन्न तरह की पहल की जा रही हैं। विवरण इस प्रकार हैं :
- पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर): रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए विभाग ने पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) नीति को अधिसूचित किया था। पीसीपीआईआर को सामान्य बुनियादी ढांचे और सहायक सेवाओं के साथ विकास के क्लस्टर-आधारित मॉडल के रूप में परिकल्पित किया गया है। तीन पीसीपीआईआर दहेज (गुजरात), विशाखापत्तनम-काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) और पारादीप (ओडिशा) में स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में इन पीसीआईपीआर में 2,246 रासायनिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें कुल 3,49,192 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और इन क्षेत्रों ने 3.7 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए हैं।
- II. प्लास्टिक पार्क : यह विभाग पेट्रोकेमिकल्स की नई योजना के तहत प्लास्टिक पार्क स्थापित करने की योजना को लागू करता है। यह योजना आवश्यक अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और सहायक सार्वजनिक सुविधाओं से युक्त जरूरत-आधारित प्लास्टिक पार्कों की स्थापना को बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को मजबूत और समन्वित करना है ताकि इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन में मदद मिल सके। इस योजना के तहत भारत सरकार परियोजना लागत के 50% तक अनुदान राशि राज्य सरकार को प्रदान करती है, जिसकी प्रति परियोजना अधिकतम सीमा 40 करोड़ रुपये है। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, अब तक 9 प्लास्टिक पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं और ये सभी अलग-अलग स्तरों पर कार्यान्वयन के चरण में हैं।
यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2227938)
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