अंतरिक्ष विभाग
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संसद का प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार

प्रविष्टि तिथि: 12 FEB 2026 4:09PM by PIB Delhi

केंद्रीय बजट 2026-27 में विनिर्माण, अग्रणी लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के निर्माण और अवसंरचना पर केंद्रित व्यापक सुधारों के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और प्रौद्योगिकी विकास को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलेगा। भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 के अनुसार, आईएन-स्पेस ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं/पहल की घोषणा की है। प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:

  1. 1000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना।
  2. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और व्यावसायीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अपनाने कोष की स्थापना।
  3. आईएन-स्पेस सीड फंड योजना का उद्देश्य इस विचार को उत्पाद में समाहित करना है।
  4. अंतरिक्ष क्षेत्र में उद्यमियों की पहचान और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए आईएन-स्पेस प्री-इनक्यूबेशन उद्यमिता कार्यक्रम।
  5. निजी क्षेत्र को सहयोग प्रदान करने के लिए आईएसआरओ की सुविधाओं और मार्गदर्शन के रूप में सहायता प्रदान करना।
  6. कौशल विकास पहल का उद्देश्य कौशल आवश्यकताओं में मौजूद कमियों को दूर करना है।
  7. किफायती लागत पर अंतरिक्ष प्रणालियों के परीक्षण और अनुकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए एक तकनीकी केंद्र की स्थापना।
  8. इसरो से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाना।
  9. निजी उद्योग के माध्यम से सैटेलाइट बस का विकास करना और होस्टेड पेलोड सेवाएं प्रदान करना।
  10. निजी संस्थाओं के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन प्रणाली की स्थापना।
  11. सेवा के रूप में ग्राउंड स्टेशन की स्थापना
  12. वाणिज्यिक उपग्रह संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए भूतुल्यकालिक कक्षीय स्लॉट का उपयोग करना।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों के परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्तमान आकार का आकलन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय  के समन्वय से किया जा रहा है। उद्योग जगत के हितधारकों से आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 के दौरान लगभग 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया गया है और इसके अतिरिक्त, शीर्ष 10 अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के पास लगभग 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर के  ऑर्डर बुक हैं।

यह जानकारी कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी ।

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