कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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फसल विविधीकरण कार्यक्रम

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 6:32PM by PIB Delhi

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्लू) फसल विविधीकरण कार्यक्रम (सीडीपी) को लागू कर रहा है, जो मूल हरित क्रांति वाले राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 2013-14 से 'प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई)' के तहत एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य पानी की अधिक खपत वाली धान की फसल के क्षेत्र को दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, पोषक अनाज (मिलेट्स) आदि जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ना है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य धान की खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन और प्रचार करना है, साथ ही उन फलीदार फसलों की खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता को बहाल करना है जो भारी मात्रा में बायोमास उत्पन्न करती हैं और कम पोषक तत्वों की खपत करती हैं। CDP के तहत वैकल्पिक फसल प्रदर्शन, कृषि यंत्रीकरण और मूल्य संवर्धन  की वस्तुओं, स्थल-विशिष्ट गतिविधियों और जागरूकता एवं प्रशिक्षण आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2015-16 से CDP का विस्तार आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख तंबाकू उत्पादक राज्यों में तंबाकू की फसल को बदलने के लिए किया गया था। 2018-19 से 2024-25 तक, CDP के तहत धान और तंबाकू को बदलने के लिए कुल 1,86,546 हेक्टेयर क्षेत्र में वैकल्पिक फसल प्रदर्शन आयोजित किए गए। सीडीपी के माध्यम से वैकल्पिक फसल प्रदर्शनों द्वारा धान और तंबाकू से बदला गया क्षेत्र अनुलग्नक-I  में संलग्न है। सीडीपी के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और इसके लागत मानदंड अनुलग्नक-II में संलग्न हैं।

इसके अतिरिक्त डीए एंड एफडब्लू ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) - भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईएफएसआर), मोदीपुरम के माध्यम से एनएफएसएनएम के तहत 1326.60 लाख रुपये के कुल परिव्यय के साथ पाँच वर्षों (2023-24 से 2027-28) के लिए "फसल विविधीकरण" पर एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।

भारत सरकार राज्य सरकारों के माध्यम से किसानों के बीच फसल विविधीकरण को और प्रोत्साहित कर रही है, ताकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) के तहत मोटे अनाज, पोषक अनाज (श्री अन्न), दलहन पर आत्मनिर्भरता मिशन के तहत दालें, खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ)-तिलहन के तहत तिलहन और बागवानी के एकीकृत विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत बागवानी फसलों को उगाया जा सके। भारत सरकार प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत राज्यों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं/प्राथमिकताओं के लिए लचीलापन भी प्रदान करती है। राज्य, राज्य स्तरीय मंजूरी समिति (एसएलएससी) के अनुमोदन से पीएम-आरकेवीवाई के तहत फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) के तहत देश भर के 100 चयनित आकांक्षी जिलों को कवर किया जाता है, जिसमें 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय भागीदारी का समन्वय शामिल है। पीएमडीडीकेवाई के तहत, फसल विविधीकरण मुख्य उद्देश्यों में से एक है जिसे उनके हस्तक्षेपों और अभिसरण नीतियों के माध्यम से संबोधित किया जाता है। वर्ष 2018-19 से 2024-25 की अवधि के दौरान, देश में खाद्यान्न की खेती के तहत क्षेत्र में 127.72 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसमें मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती का क्षेत्र भी शामिल है, जिसमें 5.13 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार, उक्त अवधि के दौरान देश में तिलहन के तहत क्षेत्र में भी 56.46 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।

देश में टिकाऊ कृषि पद्धतियों  को बढ़ावा देने के लिए, किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जैसे कि परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई), राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ), प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी) आदि। पीडीएमसी योजना सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों, यानी ड्रिप और स्प्रिंकलर के माध्यम से खेत के स्तर पर जल उपयोग दक्षता को बढ़ाती है। पीकेवीवाई और एनएमएनएफ को क्रमशः किसानों के बीच जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया है।

अनुलग्नक -I

वर्ष 2013-14 से 2024-25 के दौरान फसल विविधीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत वैकल्पिक फसल प्रदर्शनों के माध्यम से विचलित (परिवर्तित) किया गया क्षेत्र

वर्ष

वैकल्पिक फसल प्रदर्शन (हे.)

2013-14

109723

2014-15

196821

2015-16

98537

2016-17

39406

2017-18

65014

2018-19

35345

2019-20

13604

2020-21

73758

2021-22

40593

2022-23

5747

2023-24

14019

2024-25

3480

Total

696047

 

अनुलग्नक -II

फसल विविधीकरण कार्यक्रम (सीडीपी) के तहत सहायता का पैटर्न

  • मूल हरित क्रांति वाले राज्यों में सीडीपी

क्रम सं.

घटक/हस्तक्षेप

सहायता की दर

1.

वैकल्पिक फसल प्रदर्शन

i.

दलहन

दलहन मिशन लागत नियम (रू.10000/हे.)

ii.

तिलहन

एनएमईओ-तिलहन नियम

(मूंगफली @ रू.14,000/हे. सोयाबीन @ रू.10,000/हे., सूरजमुखी @ रू.9,000/हे., तिल/अरंडी/रामतिल @ रू.8000/हे.)

iii.

मोटे/पोषक अनाज

एनएफएसएनएम नियम

(i) वैराइटी के लिए रू.7500/हे

(ii) मक्का के संकर के लिए रू.11500/हे.

iv.

कपास

एनएफएसएनएम नियम

एकीकृत फसल प्रबंधन (आईसीएम)/अंतःफसल/ प्राकृतिक रंगीन कपास पर प्रदर्शन @ ₹8000/हेक्टेयर, देशी और ईएलएस (ELS) कपास पर @ ₹9000/हेक्टेयर, एचड्यूपीएस  पर @ ₹10000/हेक्टेयर)

v.

कृषि वानिकी पद्धति एकल फसल के तौर पर

रू. 10,000/हे.

vi.

खेत की मेंड़ों पर वृक्षारोपण

पौधों की लागत की सीमा रू.2000/हे. तक

vii.

कृषि वानिकी पद्धति के साथ फसल लगाना

रू. 5000/हे.

2.

कृषि यंत्रीकरण एवं मूल्य संवर्धन

कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन/ किसी भी केंद्र प्रायोजित योजना / राज्य योजना के तहत अनुमोदित मानदंडों के अनुसार

3.

स्थल-विशिष्ट गतिविधियां (जैसे भूमिगत पाइपलाइन, मक्का सुखाने की मशीन (ड्रायर), हरी खाद के लिए बीज, आदि)

किसी भी केंद्र प्रायोजित योजना / राज्य योजना के तहत अनुमोदित मानदंडों के अनुसार

4.

जागरुकता के लिए प्रशिक्षण आदि

किसी भी केंद्र प्रायोजित योजना / राज्य योजना के तहत अनुमोदित मानदंडों के अनुसार

 

बी. तंबाकू की खेती को वैकल्पिक फसलों/फसल प्रणाली से बदलने के लिए सीडीपी

तंबाकू उगाने वाले राज्य, किसी भी केंद्र प्रायोजित योजना/राज्य योजना के तहत अनुमोदित लागत मानदंडों के अनुसार, तंबाकू के स्थान पर वैकल्पिक फसलों/फसल प्रणाली को अपनाने के लिए उपयुक्त गतिविधियों या हस्तक्षेपों को लागू कर सकते हैं।

यह जानकारी आज लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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पीके/केसी/एसके


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