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भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में मजबूती आई; विश्व बैंक का बी-रेडी मूल्यांकन 2026 में निर्धारित है


डीपीआईआईटी ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए व्यापार सुधार कार्य योजना और प्रमुख पहलें शुरू कीं

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 3:37PM by PIB Delhi

बीते 5 वर्ष में, विश्व बैंक समूह की ओर से प्रकाशित डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (ईओडीबी) रैंकिंग में भारत ने 79 पायदानों का सुधार किया है। 2019 में प्रकाशित नवीनतम डीबीआर रैंकिंग के अनुसार, भारत 63वें स्थान पर था।

2020 में डीबीआर रिपोर्ट के बंद होने के बाद, विश्व बैंक ने 2024 में बी-रेडी मूल्यांकन शुरू किया है, जिसके अंतर्गत तीन वर्ष में 10 विषयों पर 180 से अधिक देशों का मूल्यांकन किया जाएगा, जो संपूर्ण बिजनेस लाइफसाइकिल: कारोबार की शुरुआत, व्यवसाय की जगह, उपयोगिता सेवाएं, श्रम, वित्तीय सेवाएं, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, कराधान, विवाद समाधान, बाजार प्रतिस्पर्धा और व्यावसायिक दिवालियापन, को कवर करते हैं। भारत को तीसरी बी-रेडी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा, जो 2026 में जारी होने वाली है।

भारत के कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने, निवेश आकर्षित करने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से, उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की समग्र पहल के अंतर्गत व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) सहित कई पहलें शुरू की हैं।

उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) की ओर से वर्ष 2014 में बीआरएपी पहल शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य नियमों को सुव्यवस्थित करना, अनुपालन संबंधी बोझ कम करना और भारत में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल समाधान लागू करना है। प्रमुख सुधारों में एकल खिड़की प्रणाली की स्थापना, भवन निर्माण अनुमतियों को सरल बनाना, निरीक्षण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना और विभिन्न व्यावसायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य भारत को घरेलू और विदेशी निवेश दोनों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनाना है।

अब तक बीआरएपी के सात संस्करण (2015, 2016, 2017-18, 2019, 2020, 2022 और 2024) पूरे हो चुके हैं, जिनमें राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन किया गया है। सातवां संस्करण, बीआरएपी 2024, वर्तमान में प्रगति पर है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9,700 से अधिक सुधार किए जा चुके हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के आधार पर राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग।

भारत सरकार की ओर से 2020 में शुरू की गई विनियामक अनुपालन बोझ (आरसीबी) पहल के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यवसायों और नागरिकों के लिए बोझिल अनुपालनों को कम करने के लिए एक स्व-पहचान अभ्यास किया। इसके चलते, बीते पांच वर्ष में 47,000 से अधिक अनुपालनों को कम किया गया है।

कुल कम किए गए अनुपालनों में से:

  • 16,109 अनुपालनों को सरल बनाया गया,
  • 22,287 अनुपालनों का डिजिटलीकरण किया गया,
  • 4,623 अनुपालनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया, और
  • अनावश्यक और दोहराव वाले अनुपालनों को हटाकर 4,270 अनुपालनों को समाप्त कर दिया गया

इसके साथ ही, आरसीबी+ पहल के अंतर्गत, राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से सामान्य रूप से लागू किए जाने वाले 23 अधिनियमों में पहचाने गए 6,262 अनुपालनों में से 4,846 अनुपालनों को कम किया गया है।

जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2023 संसद के दोनों सदनों (लोकसभा में 27 जुलाई 2023 और राज्यसभा में 2 अगस्त 2023) से पारित हुआ और 11 अगस्त 2023 को राष्ट्रपति  जी की मंजूरी मिली। यह अधिनियम 19 मंत्रालयों/ विभागों की ओर से प्रशासित 42 अधिनियमों के तहत 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है।

इस अधिनियम में अपराध को गैर-अपराध की श्रेणी में डालने के लिए कई तरीके अपनाए गए हैं, जिनमें कारावास और जुर्माने दोनों को हटाना, कारावास और/ या जुर्माने को दंड में बदलना और कुछ मामलों में अपराधों के समझौते को लागू करना शामिल है। संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों पर, डीपीआईआईटी ने एक अन्य सामान्य संशोधन विधेयक के लिए संकलित किए जाने वाले छोटे आपराधिक प्रावधानों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की।

जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12.08.2025 को मंजूरी दी और इसके बाद 18 अगस्त 2025 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद विधेयक को श्री तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता में गठित चयन समिति को भेजा गया। वर्तमान में, उक्त समिति की ओर से विधेयक की जांच की जा रही है।

यह प्रयास जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2023 की सफलता पर आधारित है और इसमें सुधार एजेंडा का विस्तार करते हुए 10 मंत्रालयों/ विभागों की ओर से प्रशासित 16 केंद्रीय अधिनियमों को शामिल किया गया है। कुल 355 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनमें से 288 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना शामिल है, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस हो और 67 प्रावधानों में संशोधन करना शामिल है, जिससे जीवनयापन में आसानी हो।

अतिरिक्त नियामक को व्यवस्थित और कम करने व अनावश्यक अनुपालनों को खत्म करने के लिए, सरकार ने आरसीबी पहल के अंतर्गत एक बहु-स्तरीय संस्थागत और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उठाए गए प्रमुख उपायों में शामिल हैं:

  • केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्व-पहचान अभ्यास आयोजित करके अतिव्यापी, अप्रचलित और दोहराव वाले अनुपालनों की पहचान की गई, जिसके चलते समीक्षा के लिए 47,000 से अधिक अनुपालनों की पहचान हुई।
  • 670 से अधिक विशिष्ट अधिनियमों में 42,000 से अधिक कम किए गए अनुपालनों का डीपीआईआईटी की ओर से विश्लेषणात्मक मानचित्रण करके राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य नियामक प्रावधानों और अतिव्यापी अनुपालन आवश्यकताओं की पहचान की गई।
  • 23 ऐसे अधिनियमों की पहचान की गई जिनके अंतर्गत 10 से अधिक राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों ने अनुपालन में कमी की थी, और इन अधिनियमों को केंद्रित सामंजस्य और तर्कसंगत बनाने के लिए आरसीबी+ पहल में शामिल किया गया।
  • इन अधिनियमों के अंतर्गत 6,262 अनुपालनों की समीक्षा की गई, जिसके परिणामस्वरूप 4,846 अनुपालनों में कमी आई, जिससे अंतर-राज्यीय और अंतर-नियामक दोहराव का समाधान हुआ।

इन तरीकों से अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त करने, अतिरिक्त नियामकों को कम करने और विभिन्न क्षेत्राधिकारों में नियामक ढांचों के सामंजस्य को सुनिश्चित करने में मदद मिली है।

भारत सरकार ने व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) के अंतर्गत व्यापक सुधारों की एक सीरीज शुरू की है, जो श्रम, पर्यावरण, भूमि प्रशासन और कराधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करती है। इन तरीकों से देश में व्यवसाय स्थापित करने और चलाने में लगने वाला समय और लागत दोनों में बड़ी कमी आई है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है - उद्यमों के लिए अनुकूल और सहायक वातावरण बनाना, जिससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

अपनी गतिशील प्रकृति के अनुरूप, बीआरएपी ने लगातार विकास किया है और इसमें अतिरिक्त सुधारों, लक्ष्य किए गए सेक्टर और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को शामिल किया है, जिससे व्यवसायों को गुणवत्तापूर्ण और कुशल सेवाएं प्रदान की जा सकें। इन सुधारों में एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी, सरलीकृत पर्यावरण मंजूरी, डिजिटल पंजीकरण और नवीनीकरण, और उपयोगिता कनेक्शनों के लिए सुव्यवस्थित प्रक्रियाएं जैसी पहल शामिल हैं। इसके अलावा, औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि बैंक और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के निर्माण तक डिजिटल एकीकरण का विस्तार किया गया है, जो भारत औद्योगिक भूमि बैंक (आईआईएलबी) के साथ एकीकृत है और निवेशकों से संबंधित व्यापक जानकारी प्रदान करता है।

बीआरएपी के साथ ही, सरकार ने अनुपालन बोझ कम करने (आरसीबी), व्यावसायिक कानूनों का अपराधीकरण न करने और राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस) जैसी महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इन पहलों का उद्देश्य भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और प्रोत्साहन देना है। सरकार निवेश के अनुकूल एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो घरेलू और विदेशी दोनों निवेशों को सहयोग करे, और क्षेत्रीय बाधाओं को दूर करने और देश भर में कई निवेश केंद्र स्थापित करने पर विशेष ध्यान दे।

उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने व्यवसायों के लिए मंजूरी एवं अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस) को कार्यान्वित कर दिया है। वर्तमान में, पंजीकृत व्यवसाय निवेशक डैशबोर्ड के माध्यम से अपने आवेदनों की स्थिति का पता लगा सकते हैं, जो मंजूरी की स्थिति की जानकारी प्रदान करता है और पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से प्रगति की निगरानी करने में योग्य बनाता है।

वर्तमान में, 32 केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों और 33 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को एनएसडब्ल्यूएस के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे जी2बी अनुमोदनों को आसान और सरल बनाया जा सके। इसके अंतर्गत केंद्रीय विभागों के 300 से अधिक जी2बी अनुमोदनों और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के 3000 से अधिक जी2बी अनुमोदनों तक पहुंच उपलब्ध है। व्यावसायिक उपयोगकर्ता एनएसडब्ल्यूएस से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए सहायता या शिकायत के लिए कॉल और ईमेल के माध्यम से एनएसडब्ल्यूएस हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। समस्याओं के समाधान के लिए सहायता चाहने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए दैनिक शिकायत निवारण प्रणाली भी उपलब्ध है।

इस पहल का उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को मजबूत करना है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों में योगदान मिले।

यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

अनुलग्नक

बीआरएपी की शुरुआत से लेकर अब तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग

बीआरएपी 2015

नेतृत्वकर्ता

कोई नहीं

आकांक्षी नेतृत्वकर्ता

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान

तेजी की आवश्यकता

हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, तमिलनाडु

शुरुआती गति की आवश्यकता

उत्तराखंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, मेघालय, नागालैंड, पुदुचेरी, सिक्किम, त्रिपुरा और गोवा, केरल

बीआरएपी 2016

नेतृत्वकर्ता

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तराखंड

आकांक्षी नेतृत्वकर्ता

बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल

तेजी की आवश्यकता

दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु

शुरुआती गति की आवश्यकता

अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, दादरा दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, गोवा, जम्मू और कश्मीर, केरल, लक्षद्वीप, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुदुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा

बीआरएपी 2017-18

शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान

उपलब्धि हासिल करने वाले

पश्चिम बंगाल. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु

तेजी से प्रगति करने वाले

हिमाचल प्रदेश, असम और बिहार

आकांक्षी

गोवा, पंजाब, केरल, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, दमन और दीव, त्रिपुरा, दादरा और नगर हवेली, पुदुचेरी, नागालैंड, चंडीगढ़, मिजोरम, अंडमान और निकोबार, मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लक्षद्वीप

बीआरएपी 2019

क्रम संख्या

प्रदेशों की रैंकिंग

1

आंध्र प्रदेश

2

उत्तर प्रदेश

3

तेलंगाना

4

मध्य प्रदेश

5

झारखंड

6

छत्तीसगढ

7

हिमाचल प्रदेश

8

राजस्थान

9

पश्चिम बंगाल

10

गुजरात

11

उत्तराखंड

12

दिल्ली

13

महाराष्ट्र

14

तमिलनाडु

15

लक्षद्वीप

16

हरियाणा

17

कर्नाटक

18

दमन और दीव

19

पंजाब

20

असम

21

जम्मू और कश्मीर

22

अंडमान और निकोबार

23

दादरा और एन हवेली

24

गोवा

25

मिजोरम

26

बिहार

27

पुदुचेरी

28

केरल

29

अरुणाचल प्रदेश

30

चंडीगढ़

31

मणिपुर

32

मेघालय

33

नगालैंड

34

ओडिशा

35

सिक्किम

36

त्रिपुरा

बीआरएपी 2020

शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले

आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना

उपलब्धि हासिल करने वाले

हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश

आकांक्षी

असम, छत्तीसगढ़, गोवा, झारखंड, केरल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल

उभरते व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र

अंडमान और निकोबार, बिहार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पुडुचेरी, त्रिपुरा

बीआरएपी 2022

वाई श्रेणी

बी2जी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

तेजी से आगे बढ़ने वाले

गुजरात

आकांक्षी

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, गोवा, झारखंड, राजस्थान, असम, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर

सी2जी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी

केरल, गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गोवा, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पंजाब

एक्स श्रेणी

बी2जी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी

दादर और नगर हवेली और दमन और दीव, त्रिपुरा, चंडीगढ़, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश

सी2जी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी

चंडीगढ़, दादर एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, मेघालय, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, पुडुचेरी, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर

  • श्रेणी एक्स में पूर्वोत्तर राज्य (असम को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली को छोड़कर) शामिल हैं, और
  • श्रेणी वाई में वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जहां स्थापित व्यापार और नागरिक-केंद्रित प्रणालियां मौजूद हैं।
  • टिप्पणी: राज्यों को कार्य योजना के अनुपालन के आधार पर "शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले" (90% से ऊपर), "उपलब्धि हासिल करने वाले" (80-90%), "तेजी से प्रगति करने वाले" (70-80%) और "आकांक्षी" (70% से नीचे) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • बी2जी का अर्थ है व्यापार-केंद्रित सुधार।
  • सी2जी का अर्थ है नागरिक-केंद्रित सुधार।

बीआरएपी 2024

  • ईओडीबी श्रेणियां (बीआरएपी जिसमें आरसीबी भी शामिल है)

 

वाई श्रेणी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

तेजी से आगे बढ़ने वाले

ओडिशा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल, असम, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक

आकांक्षी

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा, बिहार, दिल्ली

 

एक्स श्रेणी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी

त्रिपुरा, मेघालय, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम, लक्षद्वीप, मणिपुर

 

  • श्रेणी एक्स में पूर्वोत्तर राज्य (असम को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली को छोड़कर) शामिल हैं, और
  • श्रेणी वाई में वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जहां व्यवसाय-केंद्रित प्रणालियां स्थापित हैं।
  • राज्यों को कार्य योजना के अनुपालन के आधार पर "शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले" (95% से ऊपर), "उपलब्धि हासिल करने वाले" (90-95%), "तेजी से प्रगति करने वाले" (80-90%) और "आकांक्षी" (80% से नीचे) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो व्यवसाय-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • ईओडीबी श्रेणियां (बीआरएपी, आरसीबी को छोड़कर)

वाई श्रेणी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले

आंध्र प्रदेश, पंजाब

तेजी से आगे बढ़ने वाले

राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, असम, तमिलनाडु, उत्तराखंड, गुजरात

आकांक्षी

कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, गोवा, बिहार, दिल्ली

एक्स श्रेणी

श्रेणी

प्रदेश/ केंद्र शासित प्रदेश

आकांक्षी

त्रिपुरा, मेघालय, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम, लक्षद्वीप, मणिपुर

 

  • श्रेणी एक्स में पूर्वोत्तर राज्य (असम को छोड़कर) और केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली को छोड़कर) शामिल हैं, और
  • श्रेणी एक्स में वे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जहां व्यवसाय-केंद्रित प्रणालियां स्थापित हैं।
  • राज्यों को कार्य योजना के अनुपालन के आधार पर "शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले" (95% से ऊपर), "उपलब्धि हासिल करने वाले" (90-95%), "तेजी से प्रगति करने वाले" (80-90%) और "आकांक्षी" (80% से नीचे) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो व्यवसाय-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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पीके/केसी/एमएम


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