रक्षा मंत्रालय
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रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) - 2026 के मसौदे पर टिप्पणियां आमंत्रित की गईं

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 8:50PM by PIB Delhi

रक्षा विभाग ने संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और एकीकरण, सैन्य आधुनिकीकरण और उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खरीद की गति को बढ़ावा देने के लिए ‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)-2026’ का मसौदा तैयार किया है, जिससे देश में रक्षा इकोसिस्टम की वृद्धि और विकास हो सके। इस प्रस्तावित मसौदे का उद्देश्य भारत की रक्षा खरीद को तेजी से बदलते भू-रणनीतिक माहौल, भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास, मावन पूंजी के कौशल विकास, देश में निजी रक्षा उद्योग की वृद्धि और आधुनिक युद्ध की तकनीक जरूरतों के साथ संरेखित करना है।

एक बार मंजूरी मिलने के बाद, यह अभी चलन में मौजूद रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया -2020 की जगह ले लेगा। डीएपी, रक्षा में 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की नींव है। यह खरीद के लिए 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' (स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी के लिए संस्थागत प्राथमिकता पर फोकस करता है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात में असरदार कमी आएगी।

प्रस्तावित मसौदा प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और विनिर्माण की तैयारी, छोटे तकनीक चक्र वाले इक्विपमेंट के तेजी से अधिग्रहण के लिए खास प्रक्रिया, बड़े प्लेटफॉर्म की स्पाइरल डिजाइनिंग और खरीद, बल्क खरीद से पहले आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल, प्रैक्टिकल स्वदेशी कंटेंट (आईसी) और स्वदेशी डिजाइन (आईडी) कंटेंट का मूल्यांकन और स्वदेशी सैन्य सामग्री के इस्तेमाल वगैरह के आधार पर श्रेणी और खरीद की रणनीति सुनिश्चित करेगा।

नए डीएपी में सबको साथ लेकर चलने के लिए वित्तीय और अनुभव मानदंड को आसान बनाने, जल्दी खरीद के लिए फैसले लेने का अधिकार देने, ट्रायल और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाएं में बदलाव, खरीद प्रक्रियाओं और प्रणालियों में डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन को तेजी से शामिल करने, स्वदेशी डिजाइनिंग और आईपीआर को बनाए रखने पर फोकस के साथ आत्मनिर्भरता, साथ ही नवाचार के लिए प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। डीएपी से रक्षा विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिलगा, साथ ही सिर्फ देश में अनुपलब्ध और जरूरी इक्विपमेंट के आयात पर रोक लगेगी।

दिशानिर्देश और अनुलग्नक पर हैंडबुक सहित डीएपी-2026 का मसौदा दस्तावेज एमओडी की वेबसाइट (https://mod.gov.in). पर अपलोड कर दिया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने हितधारकों से डीएपी-2026 के मसौदे पर secy-dap2025[at]gov[dot]in या tmls-mod[at]nic[dot]in पर ईमेल के जरिए, पीडीएफ या एमएस वर्ड फॉर्मेट में तीन हफ्ते के अंदर, यानी 03.03.2026 तक, वेबसाइट पर दिए गए तय फॉर्मेट के अनुसार टिप्पणियां/सुझाव मांगे हैं।

जहां रक्षा खरीद मैनुअल (डीपीएम) 2025, खर्च के राजस्व मद (रेवेन्यू हेड ऑफ एक्सपेंडिचर) के तहत रक्षा उपकरण/प्लेटफॉर्म/प्रणाली वगैरह के रखरखाव और स्थायित्व से जुड़ा है, वहीं रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) खर्च के पूंजी मद (कैपिटल हेड ऑफ एक्सपेंडिचर) के तहत उपकरण/प्लेटफॉर्म/प्रणालियों वगैरह की पूंजी खरीद (कैपिटल प्रोक्योरमेंट) से जुड़ा है।

डीएपी-2026 का उद्देश्य देश की सुरक्षा और तकनीक विकास को एक धागे में पिरोना और विकसित भारत-2047 के लिए मंच तैयार करना है।

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पीके/केसी/एमपी


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