कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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बीज अधिनियम एवं संबद्ध नियम देता है राज्यों को नकली बीजों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार

प्रविष्टि तिथि: 06 FEB 2026 6:33PM by PIB Delhi

 

बीज की गुणवत्ता को विनियमित करने और नकली बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए, बीज अधिनियम, 1966, बीज नियम, 1968 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 राज्य सरकारों को बीज निरीक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार देते हैं जो बीज केंद्रों का निरीक्षण कर सकते हैं, सैंपल ले सकते हैं और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, स्टॉक जब्त करने, बिक्री रोकने के आदेश देने और अभियोजन चलाने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में बीजों की 'एंड-टू-एंड' डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए बीज प्रमाणीकरण, ट्रेसिबिलिटी एवं समग्र सूची (साथी) पोर्टल भी लॉन्च किया जो नकली/घटिया बीजों के प्रसार को रोकने में मदद करता है। भारत सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मौजूदा कानूनी ढांचे के सख्त क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी करती है, ताकि नकली/घटिया बीजों की बिक्री को रोकने के लिए डीलरों/खुदरा विक्रेताओं के भंडारण और बिक्री केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई जा सके।

पारंपरिक किस्म के बीजों की सुरक्षा के लिए पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के तहत पारंपरिक और किसान किस्मों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के प्रावधान पहले से ही उपलब्ध हैं। किसानों के पास अपने खेत में उगाए गए बीजों को सुरक्षित रखने, उपयोग करने, बोने, पुन: बोने, विनिमय करने, साझा करने या बेचने का अधिकार है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित उत्तर में दी।

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RC/PU/828

 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) के तहत, पारंपरिक किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इसमें 50% लागत पर बीजों का वितरण, अनाज और मिलेट्स के लिए 1000 रुपये प्रति क्विंटल तथा दालों और तिलहन के लिए 2000 रुपये प्रति क्विंटल का बीज उत्पादन प्रोत्साहन, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और सामुदायिक बीज बैंक की स्थापना के लिए 50 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता शामिल है।

इसके अतिरिक्त, पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण (पीपीवी एंड एफआर) अधिनियम, 2001 के तहत, किसानों को स्वदेशी पारंपरिक किस्मों के संरक्षण और उनकी खेती के लिए निम्नलिखित तरीकों से प्रोत्साहित किया जाता है:

  • बौद्धिक संपदा संरक्षण के साथ किसानों की किस्मों का पंजीकरण।
  • पादप जीनोम संरक्षक समुदाय पुरस्कार, किसान पुरस्कार और किसान सम्मान के माध्यम से मान्यता देना।
  • पीपीवीएफआर (पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए राष्ट्रीय जीन कोष का उपयोग) नियम, 2025 के अनुसार किसानों द्वारा पारंपरिक किस्मों के संरक्षण के लिए ₹15 लाख तक की वित्तीय सहायता।

(बी): बीज व्यवसाय संचालित करने के लिए किसी भी व्यक्ति, बीज कंपनियों और फर्मों को संबंधित राज्य सरकार से बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 के खंड 3 के तहत बीज डीलर लाइसेंस प्राप्त करना होता है। इसके अतिरिक्त, बागवानी नर्सरी संबंधित राज्य के 'नर्सरी अधिनियम' के तहत पंजीकृत और विनियमित होती हैं।

(सी): भारत सरकार ने बी.टी. कपास हाइब्रिड बीजों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत 'कपास बीज मूल्य (नियंत्रण) आदेश, 2015' प्रख्यापित किया है और हर साल बी.टी. कपास के बीजों की अधिकतम बिक्री मूल्य निर्धारित की जाती है।

(डी): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थानों (आईसीएआर), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) और सार्वजनिक क्षेत्रों को बीज अनुसंधान गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें बीज बुनियादी ढांचा सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है ताकि विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल उच्च उपज देने वाली, स्ट्रेस-टॉलरेंट, जलवायु-अनुकूल और बायो-फोर्टिफाइड किस्मों के बीज विकसित किए जा सकें और किसानों (छोटे किसानों सहित) को सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जा सकें। वर्ष 2014 से 2025-26 तक, क्षेत्रीय फसलों की 3236 उच्च उपज वाली (जिनमें 2,996 जलवायु-अनुकूल शामिल हैं) किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं।

इसके अतिरिक्त, किसानों को सस्ती कीमतों पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यान्वयन एजेंसियों को बीज संबंधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता देना शामिल है। इन गतिविधियों में ब्रीडर बीजों की खरीद, गुणवत्तापूर्ण बीजों का वितरण, बीज बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण, रणनीतिक अनुकूलन अनुसंधान परियोजना के लिए समर्थन और 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन' (एनएफएसएनएम), 'खाद्य तेल-तिलहन पर राष्ट्रीय मिशन' और 'राष्ट्रीय कृषि विकास योजना' (आरकेवीवाई) जैसी योजनाओं के तहत दालों और पोषक अनाज की नई उच्च उपज वाली किस्मों (एचवाईवी) की मिनीकिट का मुफ्त वितरण शामिल है। ये हस्तक्षेप उत्पादकता बढ़ाते हैं और खेती की लागत को कम करने में मदद करते हैं। किसानों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में बीज उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

पीके/केसी/एसके


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