विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने 2047 तक भारत की नवाचार-आधारित यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे अनुसंधान एवं विकास संचालित आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी, डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थापना दिवस समारोह में यह बात कही
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एएनआरएफ के नेतृत्व में साझेदारी-आधारित नवाचार के साथ भारत अपनी अनुसंधान रणनीति को नए सिरे से लिख रहा है
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एएनआरएफ स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महामारी के बाद वैश्विक गति ने एएनआरएफ के एकीकृत विज्ञान-मानविकी दृष्टिकोण के साथ भारत के लिए नए अनुसंधान अवसर पैदा किए हैं
प्रविष्टि तिथि:
05 FEB 2026 7:31PM by PIB Delhi
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एएनआरएफ स्थापना दिवस समारोह में कहा कि अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के वैश्विक स्तर पर समन्वित, मिशन-उन्मुख और साझेदारी-आधारित अनुसंधान के लिए उत्प्रेरक के रूप में उभरने के साथ भारत का अनुसंधान तंत्र एक निर्णायक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
स्थापना दिवस समारोह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पृथ्वी भवन में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर; एएनआरएफ के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन; विज्ञान विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने एएनआरएफ की स्थापना से लेकर उसके परिचालन प्रारंभ तक की यात्रा का वर्णन किया और इसे निरंतर विचार-विमर्श और व्यापक परामर्श के माध्यम से आकारित एक दुर्लभ संस्थागत सुधार बताया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन की स्थापना वैश्विक अनुसंधान मॉडलों का अध्ययन करने और भारत के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ के अनुकूल ढांचा तैयार करने के बाद की गई थी।
मंत्री ने कहा कि एएनआरएफ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में सहयोग पर जोर देने के कारण पारंपरिक अनुसंधान वित्तपोषण एजेंसियों से भिन्न है। विज्ञान और उद्योग के साथ-साथ, फाउंडेशन सामाजिक विज्ञान, मानविकी और संस्कृति को भी अपने संचालन और कार्यक्रम योजना में शामिल करता है, जो समकालीन अनुसंधान और नवाचार की एकीकृत प्रकृति को दर्शाता है।
हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महामारी के बाद के दौर में जीवन विज्ञान और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय रुचि फिर से जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि भारत मौलिक अनुसंधान दृष्टिकोणों में योगदान देने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक ज्ञान आधुनिक विज्ञान का पूरक है।
मंत्री ने कहा कि एएनआरएफ धीरे-धीरे एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहां अनुसंधान सहायता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उद्योग और परोपकार सहित गैर-सरकारी स्रोतों से आने की उम्मीद है। फाउंडेशन के कार्यक्रमों के प्रति शुरुआती प्रतिक्रिया, विशेष रूप से निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी, भारत की अनुसंधान संस्कृति में परिणाम-उन्मुख सहयोग की ओर क्रमिक बदलाव का संकेत देती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एएनआरएफ के अंतर्गत चलाए जा रहे मिशन-मोड पहलों के बारे में भी बताया, जिनमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत सामग्री, बैटरी, विद्युत प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये पहलें मंत्रालय-आधारित दृष्टिकोण से हटकर टीम-आधारित राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयासों की ओर एक बदलाव को दर्शाती हैं।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि एएनआरएफ की परिकल्पना प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच एक सेतु के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य विज्ञान को प्रकाशनों से परे समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन अनुसंधान निधि और जिज्ञासा की संस्कृति के निर्माण पर समान रूप से जोर देता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब तकनीकी क्षमता राष्ट्रीय लचीलेपन, आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए केंद्रीय बन गई है। प्रोफेसर सूद ने कहा कि एएनआरएफ के मिशन-मोड कार्यक्रम और निजी क्षेत्र की भागीदारी में अनुसंधान को वास्तविक दुनिया में प्रभाव में बदलने के तरीके को नया रूप देने की क्षमता है।
अपने संबोधन के समापन में मंत्री जी ने कहा कि एएनआरएफ अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को समर्थन देने वाले एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाएगा, जिसका भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की ओर बढ़ने में विज्ञान और नवाचार प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।




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पीके/केसी/एनएम
(रिलीज़ आईडी: 2224288)
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