अणु ऊर्जा विभाग
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संसदीय प्रश्न: डीएई विस्तार परियोजनाएं

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 5:39PM by PIB Delhi

वर्तमान में, सत्रह परमाणु ऊर्जा रिएक्टर निर्माणा प्रक्रिया में हैं, जिनकी कुल क्षमता 13100 मेगावॉट है। इनमें सात निर्माणाधीन रिएक्टर और दस पूर्व-परियोजना गतिविधियों के अंतर्गत आने वाले रिएक्टर शामिल हैं। विवरण इस प्रकार है:

 

जगह

परियोजना

क्षमता (मेगावॉट में)

भौतिक प्रगति

मंजूर की गई राशि (करोड़ रुपये में)

अपेक्षित समापन

 

निर्माणाधीन/ चालू की जा रही परियोजनाएं

 

राजस्थान

आरएपीपी-7$ और 8

2 X 700

98.6

22,924

2026

 

कुडनकुलम, तमिलनाडु

केकेएनपीपी-3 और 4

2 X 1000

80.51

68,893

2027

 

केकेएनपीपी-5 और 6

2 X 1000

41.56

68,893

2030

 

गोरखपुर, हरियाणा

जीएचएवीपी-1 और 2

2 X 700

सिविल कार्य प्रगति पर

20,594

2032

 

पूर्व-परियोजना गतिविधियों के अंतर्गत परियोजनाएं

 

कैगा, कर्नाटक

कैगा-5 और 6

2 X 700

परियोजना से पहले की गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न चरणों में

1,05,000

संभवतः 2031-32 तक

 

गोरखपुर

जीएचएवीपी– 3 और 4

2 X 700

 

चुटका

चुटका-1 और 2

2 X 700

 

माही बांसवाड़ा, राजस्थान

माही बांसवाड़ा

2 X 700

 
 

माही बांसवाड़ा- 3 और 4*

2 X 700

 

 

$ आरएपीपी-7 और 8 की यूनिट-7 (700 मेगावॉट) ने 15.04.2025 को व्यावसायिक परिचालन शुरू किया।

 

* माही बांसवाड़ा-1 और 2 तथा माही बांसवाड़ा-3 और 4 का कार्यान्वयन एनपीसीआईएल और एनटीपीसी के संयुक्त उद्यम अश्विनी के माध्यम से किया जा रहा है।

 

भाविनी कंपनी वर्तमान में तमिलनाडु के कल्पक्कम में 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) परियोजना को शुरू करने का कार्य कर रही है। सरकार ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में एफबीआर 1 और 2 की दो इकाइयों के लिए परियोजना-पूर्व गतिविधियों को पूरा करने की मंजूरी दे दी है। पीएफबीआर के प्रथम चरण में पहुंचने पर, एफबीआर 1 और 2 परियोजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी के लिए सरकार से संपर्क किया जाएगा।

 

न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) में परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कई स्तरों पर की जाती है और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की ओर से भी समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है। परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, विभिन्न स्तरों पर परियोजना गतिविधियों की प्रगति की लगातार निगरानी, ​​बाधाओं की समय पर पहचान और आवश्यक मध्यवर्ती सुधार, विक्रेताओं/ ठेकेदारों के साथ नियमित बैठक और निर्माण गतिविधियों का, जितना संभव हो सके, पुनर्क्रमण जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

 

भाविनी के पास परियोजना की प्रगति की निगरानी के लिए निम्नलिखित संस्थागत तंत्र है: निर्माण कार्य में हुई प्रगति की समीक्षा करने और संसाधनों के बेहतर आवंटन के लिए डिजाइनरों के साथ इकाई स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। भाविनी बोर्ड की ओर से त्रैमासिक आधार पर भी परियोजना की समीक्षा की जाती है। ये समीक्षाएं संसाधनों के दोबारा आवंटन, त्वरित निर्णय लेने और परियोजना को गति देने में सहायक होती हैं।

 

विस्तार कार्यक्रम की आवश्यकताओं और कर्मियों की भर्ती, प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग में लगने वाली समयसीमा को ध्यान में रखते हुए, एनपीसीआईएल ने कई स्तरों पर लक्षित भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। ईसीआईएल में 80 ग्रेजुएट इंजीनियर प्रशिक्षुओं की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।

 

परमाणु ऊर्जा विभाग ने "डीएई-राजा रामन्ना चेयर" (डीएई-आरआरसी) नामक एक राष्ट्रीय स्तर की योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य सक्रिय सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों की सेवाओं का इस्तेमाल करना है, जो डीएई की इकाइयों या किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला या विश्वविद्यालय या संस्थान में अपने विशिष्ट विषयों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान में शामिल रहे हैं और जो सेवानिवृत्ति के बाद डीएई की ओर से निर्धारित विषयों पर अनुसंधान एवं विकास और अध्ययन करने के इच्छुक हैं।

 

विभाग ने "डीएई-होमी सेथना चेयर" (डीएई-एचएससी) की भी स्थापना की है, जिसका उद्देश्य सक्रिय सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों की सेवाओं का इस्तेमाल करना है, जो डीएई की इकाइयों में अपने विशेष विषयों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान में शामिल रहे हैं और जो सेवानिवृत्ति के बाद डीएई की ओर से खोजे गए विषयों पर अनुसंधान एवं विकास, नीति एवं योजना संबंधी अध्ययन करने के इच्छुक हैं।

 

इन योजनाओं का उद्देश्य सक्रिय सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों की सेवाओं का लाभप्रद इस्तेमाल करना है, जिन्होंने महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में काम किया है और जो विभाग की ओर से निर्धारित विषयों के अनुसार परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की अनुसंधान परियोजनाओं, नीति और योजना गतिविधियों में नियमित रूप से रचनात्मक योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही, डीएई-आरआरसी फेलोशिप वाले लोग परमाणु ऊर्जा से संबंधित विषयों पर मोनोग्राफ या किताब लिख सकते हैं और डीएई-एचएससी पुरस्कार विजेता महत्वपूर्ण विषयों या परियोजनाओं पर काम करेंगे और नीतिगत मुद्दों पर अध्ययन करेंगे, जिसका उद्देश्य विभाग को निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत विश्लेषण प्रदान करना है।

 

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एमएम


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