ग्रामीण विकास मंत्रालय
रोजगार और आजीविका मिशन के लिए विकसित भारत गारंटी
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 6:03PM by PIB Delhi
विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची I के पैरा 3 के अनुसार मूल उद्देश्य और प्रमुख प्रावधान नीचे दिए गए हैं:
- इस अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण विकास ढांचे को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विज़न के साथ जोड़ना है जिसके लिए उन ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक सौ पच्चीस दिनों की बढ़ी हुई वैधानिक मज़दूरी रोज़गार गारंटी प्रदान की जाएगी जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, जिससे उन्हें विस्तारित आजीविका सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावी ढंग से समावेशित किया जा सके।
- सार्वजनिक कार्यों के माध्यम से सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण और संतृप्ति पर ध्यान केंद्रित करना जो 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' बनाने के लिए आवश्यक हैं, जिसमें जल-संबंधी कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचे और चरम मौसम घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए विशेष कार्यों पर विषयगत ध्यान दिया जाएगा।
- ग्रामीण कार्यबल के लिए मज़दूरी-रोज़गार गारंटी के मद्देनज़र, कृषि श्रम गहन समय के दौरान पर्याप्त कृषि-श्रमिक की उपलब्धता को सुगम बनाना।
- विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से अभिसरण, संतृप्ति-संचालित नियोजन और 'संपूर्ण सरकार वितरण' को संस्थागत बनाना, जो ग्राम पंचायतों की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत हो, और भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जिला और राज्य नियोजन तंत्रों द्वारा संचालित हो, जिसमें ऐसी योजनाओं को ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर समेकन किया जाएगा।
- एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से शासन, जवाबदेही और नागरिक जुड़ाव को आधुनिक बनाना, जिसमें विभिन्न स्तरों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम या मोबाइल आधारित कार्यस्थल की निगरानी, रीयल-टाइम प्रबंधन सूचना प्रणाली डैशबोर्ड, सक्रिय सार्वजनिक प्रकटीकरण और नियोजन, लेखा परीक्षा एवं धोखाधड़ी जोखिम शमन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग शामिल है।
अधिनियम सहभागी विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करने का प्रावधान करता है, जिन्हें ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समेकित किया जाता है। कार्यों के प्रकार चार विषयगत क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं: (i) जल सुरक्षा के लिए जल-संबंधित कार्य; (ii) मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा; (iii) आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा; और (iv) चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने और आपदा तैयारी के लिए विशेष कार्य।
यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष में कम से कम एक सौ पच्चीस दिनों के मज़दूरी रोज़गार की गारंटी देता है।
अधिनियम की धारा 22 की उप-धारा (4) के अनुसार, 'केंद्र सरकार प्रत्येक राज्य के लिए राज्य-वार मानक आवंटन उन वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर निर्धारित करेगी जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।'
अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, अधिनियम के तहत कार्यान्वित योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी और केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के बीच निधि साझाकरण का पैटर्न उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्र (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर) के लिए 90:10 और विधायिका वाले अन्य सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 60:40 होगा।
अधिनियम की अनुसूची I के पैरा 3 के अनुसार, चरम मौसम घटनाओं को कम करने और आपदा तैयारी के लिए विशेष कार्य उन मुख्य विषयगत क्षेत्रों में से एक है जिसमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु अनुकूलन और बाढ़, चक्रवात, तूफान, सूखा, भूस्खलन, जंगल की आग और अन्य चरम मौसम की घटनाओं से संबंधित कार्यों के माध्यम से पालघर जैसे आदिवासी बहुल जिलों सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण समुदायों और संपत्तियों की सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे।
यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2222816)
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