प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 2:44PM by PIB Delhi
ऑन्कोलॉजी दवाओं सहित दवाओं की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ, 2013) के प्रावधानों के अनुसार नियंत्रित की जाती हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची(एनएलईएम) प्रकाशित करता है, जिसे फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I के रूप में शामिल किया गया है। अनुसूची-I के तहत दवाएं उनके चिकित्सा संबंधी श्रेणी के अनुसार बताई गई हैं। कैंसर-रोधी फ़ॉर्मूलेशन डीपीसीओ, 2013 अनुसूची-I में सेक्शन-7, "कैंसर-रोधी एजेंट जिसमें इम्यूनोसप्रेसिव और पैलिएटिव केयर में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं" के तहत सूचीबद्ध हैं।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने अनुसूची-I में सूचीबद्ध 131 कैंसर रोधी अनुसूचित एंटी-कैंसर शेड्यूल्ड फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमतें तय कर दी हैं। अनुसूचित दवाओं (ब्रांडेड या जेनेरिक) के सभी निर्माताओं को अपने उत्पाद एनपीपीए द्वारा तय की गई अधिकतम कीमत (के साथ लागू वस्तु और सेवा कर) के अंदर ही बेचने होंगे।
एनपीपीए डीपीसीओ, 2013 के पैरा 2(1)(यू) के अंतर्गत परिभाषित 'नई दवा' की रिटेल कीमत भी तय करता है। 27.01.2026 तक, एनपीपीए ने एंटी-कैंसर चिकित्सा संबंधी श्रेणी के तहत 54 दवाओं की रिटेल कीमत तय की है। इसके अलावा, गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशन के मामले में, उनकी कीमतों की निगरानी की जाती है और ऐसे फॉर्मूलेशन के मैन्युफैक्चरर्स को उस फॉर्मूलेशन की अधिकतम रिटेल कीमत को पिछले 12 महीनों की अधिकतम रिटेल कीमतों से 10 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं बढ़ाने की ज़रूरत होती है। तदनुसार, सभी ऑन्कोलॉजी दवाओं की कीमतें डीपीसीओ, 2013 के तहत आती हैं, या तो अधिकतम/रिटेल कीमत तय करके मूल्य नियंत्रण के माध्यम से या डीपीसीओ, 2013 के पैरा 20 के तहत कीमत में वृद्धि को विनियमित करके।
यह जानकारी केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।
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