औषधि विभाग
मेडिकल उपकरणों की कीमत और गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए कदम
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 2:45PM by PIB Delhi
औषधि विभाग (डीओपी) के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमतें तय करती है और इन्हें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ, 2013) की अनुसूची-I में शामिल किया गया है। अनुसूची में शामिल दवाओं के सभी निर्माता, विपणनकर्ता और आयातकों को अपने उत्पाद ऐसी अधिकतम कीमत (साथ में लागू वस्तु और सेवा कर) के अंदर ही बेचने होते हैं।
चार चिकित्सा उपकरण, जैसे कि बेयर मेटल स्टेंट, ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (डीईएस) जिसमें मेटैलिक डीईएस और बायोरेसोर्बेबल वैस्कुलर स्कैफोल्ड (बीवीएस)/बायोडिग्रेडेबल स्टेंट शामिल हैं, इंट्रा यूटेराइन डिवाइस (आईयूडी) और कंडोम डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I में शामिल हैं और इन चारों उपकरणों के लिए अधिकतम कीमतें अधिसूचित की गई हैं। इन चार (04) अनुसूचित चिकित्सा उपकरणों के अलावा, एनपीपीए ने जनहित में, अगस्त 2017 में घुटने बदलने की प्रणाली के लिए ऑर्थोपेडिक नी इम्प्लांट्स की अधिकतम कीमतें तय कीं और अधिसूचित की और जून/जुलाई, 2021 में कोविड के लिए ज़रूरी चिकित्सा उपकरणों यानी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग मशीन, नेबुलाइज़र, डिजिटल थर्मामीटर और ग्लूकोमीटर के व्यापार लाभ को सीमित किया।
इसके अलावा, एमओएचएफडब्ल्यू ने एस.ओ.संख्या 648(ई) दिनांक 11.02.2020 के माध्यम से इंसानों या जानवरों में इस्तेमाल होने वाले सभी चिकित्सा उपकरणों को औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून 1940 के तहत 01.04.2020 से 'ड्रग्स' के रूप में नोटिफाई किया। तदनुसार, एनपीपीए ने एसओ. संख्या1232(ई) दिनांक 31.03.2020 के माध्यम से अधिसूचित किया है कि सभी चिकित्सा उपकरण 01.04.2020 से डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के तहत आएंगे। गैर-अधिसूचित चिकित्सा उपकरण की निगरानी भी डीपीसीओ, 2013 के पैरा 20 के तहत की जाती है और ऐसे चिकित्सा उपकरणों के निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के अधिकतम खुदरा मूल्य से 10 प्रतिशत से ज़्यादा कीमत नहीं बढ़ाने की ज़रूरत होती है।
सभी चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन एमओएचएफडब्ल्यू द्वारा लागू औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून, 1940 और चिकित्सा उपकरण नियमों, 2017 के प्रावधानों के तहत नियंत्रित किए जाते हैं। एमओएचएफडब्ल्यू द्वारा सूचित किए जाने के अनुसार, केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने चिकित्सा उपकरणों के नियंत्रण को सुव्यवस्थित करने के लिए विभिन्न नियंत्रण उपाय किए हैं। ऐसे मुख्य उपाय इस प्रकार हैं:
(i). चिकित्सा उपकरण नियंत्रण ढांचे को सरल बनाने और विश्व स्तर पर स्वीकृत नियमों के बराबर लाने के लिए, सरकार चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 लेकर आई है, जो इसके नियंत्रण तंत्र को विश्व स्तर पर सामंजस्यपूर्ण नियामक प्रणाली के बराबर लाता है। इसके अलावा, सभी चिकित्सा उपकरणों को उक्त नियमों के दायरे में लाया गया है।
(ii).उक्त नियमों के तहत विभिन्न लाइसेंस और परमिशन देने में आसानी के लिए एक एकल संयुक्त ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जिससे लाइसेंसिंग की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
(iii). नियमों में लाइसेंसिंग के लिए एक तय समय सीमा भी बताई गई है, जिससे लाइसेंसिंग प्राधिकार को मिले आवेदनों की समय पर प्रोसेसिंग सुनिश्चित होगी।
(iv). क्लास ए नॉन-स्टेराइल और नॉन-मेजरिंग चिकित्सा उपकरणों को निर्माण/आयात लाइसेंस की ज़रूरत से छूट दी गई है। ऐसे उपकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर सिर्फ़ साधरण पंजीकरण की ज़रूरत होती है।
(v). चिकित्सा उपकरण की गुणवत्ता, सुरक्षा और परफॉर्मेंस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इकोसिस्टम बनाने के लिए, केन्द्र/राज्य द्वारा सरकारी चिकित्सा उपकरण परीक्षण प्रयोगशाला को अधिसूचित/स्थापित करने का प्रावधान शामिल किया गया है और विभिन्न सरकारी चिकित्सा जांच प्रयोगशालाओं को अधिसूचित किया गया है और निर्माताओं की ओर से चिकित्सा उपकरणों की जांच के लिए चिकित्सा उपकरण जांच प्रयोगशालाओं को उक्त नियमों के तहत पंजीकृत किया गया है।
(vi). गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस) के अनुरूप क्लास ए और क्लास बी चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाइयों का ऑडिट करने के लिए अधिसूचित संगठनों को सीडीएससीओ के साथ पंजीकृत किया गया है।
(vii). आईसीएमआर और नीति आयोग के साथ मिलकर मैडटेक मित्र पोर्टल बनाया गया है ताकि स्टार्टअप/इनोवेटर/निर्माता को उनके उपकरण विकसित करने और उसके व्यवसायीकरण के लिए नियमन निर्देश, वित्तीय मदद, क्लिनिकल अध्ययन करने के संबंध में सहयोग दिया जा सके।
सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं, जिनमें मुख्य रूप से चिकित्सा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना; चिकित्सा उपकरण पार्क को बढ़ावा देने की योजना; और चिकित्सा उपकरण उद्योग को मजबूत करने की योजना शामिल है, जो चिकित्सा उपकरण उद्योग के अहम क्षेत्रों में सहायता प्रदान करती है, जिसमें मुख्य कलपुर्जों और सहायक सामग्री का निर्माण, कौशल विकास, क्लिनिकल अध्ययन के लिए सहायता, कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और उद्योग को बढ़ावा देना शामिल है।
यह जानकारी केन्द्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।
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पीके/केसी/केपी
(रिलीज़ आईडी: 2222667)
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