कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कौशल भारत कार्यक्रम को नया रूप दिया गया

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 3:47PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी, 2025 को ‘कौशल भारत कार्यक्रम’ (एसआईपी) की केंद्रीय क्षेत्र योजना को वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए जारी रखने की मंजूरी दी थी। इस कार्यक्रम में तीन घटक शामिल हैं, अर्थात् (i) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0), (ii) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (पीएम-एनएपीएस) और (iii) जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस)।

वर्ष 2024-25 के दौरान एसआईपी के अंतर्गत प्रशिक्षित/उन्मुखीकृत/नियुक्त उम्मीदवारों की संख्या का घटक-वार विवरण निम्नानुसार है:

 

योजना

प्रशिक्षित/उन्मुखीकृत/नियुक्त उम्मीदवार

पीएमकेवीवाई

20,38,319

जेएसएस

5,00,469

एनएपीएस

9,85,041

 

निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्रशिक्षित उम्मीदवारों की संख्या में कमी एसआईपी के चरणबद्ध कार्यान्वयन के कारण है।

 

एसआईपी के अंतर्गत योजनाएं मांग-आधारित हैं और देश भर में हाशिए पर रहने वाले समूहों सहित समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। इसमें निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने के आधार पर पिछड़े, जनजातीय और दूर-दराज के क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान (31 दिसंबर, 2025 तक) एसआईपी के तहत प्रशिक्षित/उन्मुखीकृत/नियुक्त किए गए महाराष्ट्र के हाशिए पर रहने वाले समूहों और आकांक्षी जिलों के उम्मीदवारों का घटक-वार विवरण नीचे दिया गया है।

हाशिए पर रहने वाले समूह/ आकांक्षी जिले

पीएमकेवीवाई

जेएसएस

एनएपीएस

अनुसूचित जाति

17,637

25,194

1,05,717

अनुसूचित जनजाति

5,402

24,272

52,036

अन्‍य पिछड़ा वर्ग

46,455

53,012

2,55,199

महिलाएं

59,317

1,22,182

2,01,719

आकांक्षी जिले

6,837

20,089

2,775

 

इसके अतिरिक्‍त, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा हाशिए पर रहने वाले समूहों और पिछड़े, जनजातीय और दूर-दराज के क्षेत्रों में एसआईपी की पहुंच बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

(i) एमएसडीई हाशिए पर रहने वाले वर्गों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत कौशल विकास घटक लागू कर रहा है, जैसे कि जनजातीय कार्य मंत्रालय का प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जेएएनएमएएन), गृह मंत्रालय का जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वीवीपी), मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्‍टम के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (एनएएनएमएएन) आदि।

(ii) इसके अलावा, जेएसएस एक समुदाय-संचालित कौशल विकास योजना है, जो महिलाओं और समुदाय के वंचित वर्गों को लक्षित करती है और यह लाभार्थियों को उनके घर के पास ही कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है। जेएसएस के माध्यम से प्रदान किया जाने वाला कौशल प्रशिक्षण लचीला, किफायती और महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यकों और समाज के किसी भी अन्य वंचित समूह के लिए अत्यधिक सुलभ है।

(iii) धरती आबा - जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) के अंतर्गत एमएसडीई ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए जेएसएस योजना के माध्यम से एक पहल शुरू की है। इस प्रयास के तहत 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 30 जनजातीय जिलों में 30 ‘जनजातीय कौशल विकास केंद्र’ (टीएससी) स्थापित किए गए हैं।

वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान (31 दिसंबर, 2025 तक) महाराष्ट्र में एसआईपी के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की संख्या का घटक-वार विवरण निम्नलिखित है:

वित्त वर्ष

पीएमकेवीवाई

जेएसएस

एनएपीएस

2022-23

14,913

52,934

1,86,010

2023-24

35,284

37,273

2,63,265

2024-25

75,368

36,861

2,78,605

2025-26 (31 दिसंबर 2025 तक)

4,579

20,491

2,29,709

 

पीएमकेवाई 4.0 एक मांग आधारित योजना है। इस योजना के तहत विभिन्न जिलों/राज्यों से प्राप्त मांग के आधार पर कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

पीएमकेवीवाई 4.0 में प्रशिक्षित उम्मीदवारों को उनके कैरियर चुनने के लिए सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है और उन्हें ऑन-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) में शामिल उद्योग से संबंधित कौशल पाठ्यक्रमों के माध्यम से इसके लिए उपयुक्त रूप से तैयार किया जाता है।

जेएसएस के तहत उद्यमिता और आजीविका संवर्धन के लिए उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने हेतु आजीविका प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है।

एनएपीएस का उद्देश्य देश में प्रशिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देना और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षुओं की भागीदारी बढ़ाना है।

प्रशिक्षित उम्मीदवारों की जानकारी एसआईडीएच पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे वे संभावित नियोक्ताओं से जुड़ सकते हैं। स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से उम्मीदवार रोजगार और अप्रेंटिसशिप के अवसरों तक पहुंच सकते हैं।

सरकार ने पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत व्यापक सुधारात्मक उपाय किए हैं, जिनमें आधार-आधारित ई-केवाईसी, चेहरे का प्रमाणीकरण और जिओ-टैग्‍ड उपस्थिति, क्यूआर-कोड वाले डिजिटल प्रमाणपत्र, स्किल इंडिया डिजिटल हब पर वास्तविक समय के डैशबोर्ड, एनसीवीईटी के माध्यम से मूल्यांकनकर्ता और प्रशिक्षण केंद्र की मान्यता को मजबूत करना, कौशल समीक्षा केंद्र के माध्यम से स्वतंत्र निगरानी, ​​स्पष्ट केपीआई के साथ संशोधित निगरानी दिशानिर्देश और एक मजबूत दंड और वसूली ढांचा शामिल हैं।

केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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