पर्यटन मंत्रालय
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इको-पर्यटन का प्रचार

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 4:03PM by PIB Delhi

पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास एवं प्रचार, जिसमें इको-पर्यटन शामिल है, संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासन द्वारा किया जाता है।पर्यटन मंत्रालय विभिन्न पहलों के माध्यम से भारत का समग्र प्रचार करता है। चल रही गतिविधियों के हिस्से के रूप में इको-पर्यटन का प्रचार भी किया जाता है। पर्यटन मंत्रालय अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्रचार के माध्यम से राजस्थान सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों का नियमित प्रचार करता है।भारत को इको-पर्यटन के लिए पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए, पर्यटन मंत्रालय ने इको-पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीति तैयार की है।इको-पर्यटन के विकास के लिए निम्नलिखित रणनीतिक स्तंभों की पहचान की गई है:

 

राज्य आकलन और रैंकिंग

(ii) इको-पर्यटन के लिए राज्य रणनीति

(iii) सूचना‑शिक्षा‑संचार (IEC), क्षमता निर्माण और प्रमाणन

(iv) विपणन और प्रचार

(v) गंतव्य और उत्पाद विकास

(vi) सार्वजनिक‑निजी और समुदाय साझेदारी

(vii) साझेदारी, शासन और संस्थागत ढांचा

 

पर्यटन मंत्रालय ने अपनी स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत इको‑सर्किट को थीमेटिक सर्किटों में से एक के रूप में चिन्हित किया है।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नवीनीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य पर्यटक और गंतव्य केंद्रित दृष्टिकोण के अनुसार टिकाऊ एवं जिम्मेदार पर्यटन गंतव्यों का विकास करना है।राजस्थान राज्य में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण संलग्नक में दिया गया है।

यह जानकारी आज लोकसभा में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित उत्तर में दी।

 

क्रमांक (Sr. No.)

परियोजना का नाम (Name of Project)

स्वीकृत राशि (₹ करोड़ में)

 

 

A. स्वदेश दर्शन 1.0

 

i. जयपुर जिले में सांभर झील टाउन तथा अन्य स्थलों का विकास (सितंबर 2015) — 50.01 करोड़

 

ii. गोविंद देव जी मंदिर (जयपुर), खाटू श्याम जी (सीकर) तथा नाथद्वारा (राजसमंद) का एकीकृत विकास (सितंबर 2016) — 75.80 करोड़

 

iii. आध्यात्मिक सर्किट का विकास – चूरू (सालासर बालाजी) – जयपुर (श्री समोड़के बालाजी, घाटके बालाजी, बंधेके बालाजी) – विराटनगर (बिजाक, जैननासिया, अंबिका मंदिर) – भरतपुर (कामान क्षेत्र) – धौलपुर (मूचकुंड) – मेहंदीपुर बालाजी – चित्तौड़गढ़ (सांवलियाजी) का विकास (मार्च 2017) — 87.05 करोड़

iv. धरोहर सर्किट का विकास – राजसमंद (कुंभलगढ़ किला) – जयपुर (जयपुर में फैसेड इल्यूमिनेशन तथा नाहरगढ़ किला) – झालावाड़ (गागरोन किला) – चित्तौड़गढ़ (चित्तौड़गढ़ किला) – जैसलमेर (जैसलमेर किला) – हनुमानगढ़ (गोगामेड़ी) – उदयपुर (प्रताप गौरव केंद्र) – धौलपुर (बाग‑ए‑नीलोफर तथा पुरानी चौनी) – नागौर (मीरा बाई स्मारक, मेरता) – टोंक (सुनेहरी कोठी) का विकास (जून 2017) — 70.61 करोड़

 

कुल स्वीकृत लागत (Total Sanction Cost) — 283.47 करोड़

 

B. स्वदेश दर्शन 2.0

 

i. आध्यात्मिक अनुभव, केशवरायपुरान (फरवरी 2024, जून 2025 में संशोधित) — 21.65 करोड़

ii. श्री खाटू श्याम जी मंदिर (सीकर) पर विकास कार्य (मार्च 2025) — 87.87 करोड़

iii. श्री करणी माता मंदिर, बीकानेर पर विकास कार्य (जुलाई 2025) — 22.58 करोड़

 

iv. मालासेरी डूंगरी, भीलवाड़ा जिला का विकास (जुलाई 2025) — 48.73 करोड़कुल स्वीकृत लागत (Total Sanction Cost) — 180.83 करोड़

 

C. प्रासाद (PRASHAD)

 

i. पुष्कर/अजमेर का एकीकृत विकास (सितंबर 2019 में संशोधित) — 32.64 करोड़कुल स्वीकृत लागत (Total Sanction Cost) — 32.64 करोड़

 

D. राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता (SASCI)

 

i. आम्बर‑नाहरगढ़ तथा आसपास के क्षेत्र का विकास (नवंबर 2024) — 49.31 करोड़ii. जल महल (जयपुर) का विकास (नवंबर 2024) — 96.61 करोड़कुल स्वीकृत लागत (Total Sanction Cost) — 145.92 करोड़E. केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (ACA)i. जैसलमेर सेक्टर में श्री तानोत परिसर में सीमा पर्यटन का विकास — 17.68 करोड़

 

ii. बूंदी में नवल सागर झील पर संगीतमय फव्वारा तथा जल‑परदा आधारित मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन शो की स्थापना — 9.26 करोड़

 

iii. अजमेर रेलवे स्टेशन — 5.52 करोड़

 

iv. जयपुर रेलवे स्टेशन — 4.88 करोड़v. चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन — 4.99 करोड़कुल लागत (Total Cost) — 42.33 करोड़

 

केंद्रीय सहायता का कुल योग (Total Central Assistance) — 685.19 करोड़

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पीके केसी एमएम 


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