मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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पशु चिकित्सा अवसंरचना, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान करने का विस्तार


पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (एलएफपीओ) को वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान करना,

खेत से बाजार तक डेयरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाना

टीकाकरण और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए धन में वृद्धि करना

प्रविष्टि तिथि: 01 FEB 2026 6:48PM by PIB Delhi

केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जो ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन अर्थव्यवस्था के सतत विकास को सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट के प्रमुख प्रावधानों में पशुधन मूल्य श्रृंखला में उत्पादकता, पशु स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। किसानों की संपत्ति की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण पशुधन उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रमों, पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और रोग निवारण पहलों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई है।

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बजट में बेहतर दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अवसंरचना के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। दुग्ध उत्पादन और उससे संबंधित गतिविधियों में लगे सहकारी समितियों और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (एलएफपीओ) को समर्थन देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। "आत्मनिर्भर भारत" की परिकल्पना के अनुरूप, बजट पशुपालन में नवाचार, प्रौद्योगिकी के उपयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है। चारा विकास, पशु आहार सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पशुधन प्रथाओं से संबंधित पहल इस क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होंगी।

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बजट 2026 में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर दिए गए अतिरिक्त जोर से रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा में सुधार और ग्रामीण आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद है। विभाग राज्यों और हितधारकों के सहयोग से इन पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रमुख बजट घोषणाएँ:

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाकर 20,000 से अधिक करने के उद्देश्य से, निजी क्षेत्र के पशु चिकित्सा एवं अर्ध-पशु चिकित्सा महाविद्यालयों, पशु अस्पतालों, निदान प्रयोगशालाओं और पशु प्रजनन केंद्रों की स्थापना हेतु ऋण-आधारित पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। भारतीय एवं विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग को भी सुगम बनाया जाएगा।

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  1. पशुपालन उद्यम के लिए ऋण-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम:

केंद्रीय बजट 2026-27 में पशुपालन में उद्यमिता और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऋण-आधारित सब्सिडी योजना का प्रस्ताव है, जिससे पशुधन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन उद्यमों को लाभ होगा। इस उपाय का उद्देश्य किसानों को आधुनिक उपकरण अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला विकसित करने में सहायता करना है।

  1. ग्रामीण और संबद्ध कृषि पर व्यापक ध्यान केंद्रित करना :

पशुधन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गीपालन की मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार, जिससे उत्पादकता और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि हो। "भारत विस्तार" प्लेटफॉर्म जैसे एआई-आधारित कृषि उपकरण, जिनका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन और पशुधन उत्पादकों सहित किसानों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। ग्रामीण आय विविधीकरण प्रयासों के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन और पशुधन किसानों के लिए ऋण और उद्यमिता सहायता पर जोर दिया गया है।

  1. प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए छूट का दायरा बढ़ाया गया :

प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा पशुओं के चारे और कपास के बीज की आपूर्ति अब कर कटौती के लिए पात्र होगी - जिससे दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों को बेहतर सहायता और कम लागत सुनिश्चित होगी।

  1. अंतर-सहकारी लाभांश पर राहत :

नई कर व्यवस्था के तहत एक सहकारी समिति द्वारा दूसरी सहकारी समिति से अर्जित लाभांश आय को कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी, जिससे दुग्ध एवं पशुधन सहकारी समितियों के भीतर वित्तीय प्रवाह मजबूत होगा। अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा 31.1.2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश पर प्राप्त लाभांश आय को 3 वर्ष की अवधि के लिए छूट दी गई है, जिसका उपयोग सदस्य सहकारी समितियों को लाभांश वितरित करने के लिए किया जाएगा।

इन उपायों से सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, दुग्ध उत्पादक किसानों को सहायता मिलेगी और पशुधन आधारित ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।

  1. पशुधन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहलें:

बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर देय केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करते समय, बायोगैस के संपूर्ण मूल्य को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इससे डेयरी क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश में नए बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।

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पीके/केसी/जीके


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