वित्त मंत्रालय
भारत का सकल घरेलू उत्पाद 8 प्रतिशत वृद्धि के साथ वित्त वर्ष-2025-26 में 7.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान
बजट में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान में सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
सेवा क्षेत्र विकास का प्रमुख चालक रहा, 9.1 प्रतिशत का विस्तार
बजट में वित्त आयोग के माध्यम से राज्यों में कुल संसाधनों के बटवारे का अनुमान 16.56 लाख करोड़ रुपये का कर विकेन्द्रीयकरण; जिसमें 15.26 लाख करोड़ रुपये का कर और 1.4 लाख करोड़ रुपये की वित्त आयोग का अनुदान
वित्त वर्ष 2026-27 में केन्द्र सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत
केन्द्र सरकार का राज्यों को पूंजीगत परिसंपत्ति जुटाने के लिए केन्द्र सरकार का पूंजीगत व्यय में (12.22 लाख करोड़ रुपये) और राज्यों को अनुदान (4.93 लाख करोड़ रुपये) शामिल
सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 के 56.1 प्रतिशत मुकाबले सकल घरेलू उत्पाद में 55.6 प्रतिशत के ऋण का अनुमान
सकल घरेलू उत्पाद के 61.5 प्रतिशत के हिस्सेदारी के साथ निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) में 7 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का अनुमान-पिछले 12 वित्त वर्षों में अब तक सर्वाधिक
(ग्रौस फिक्ड कैपिटल फॉर मिशन जीएफसीएस) वित्त वर्ष 2026 में 7.8 प्रतिशत का उछाल
वित्त वर्ष 2026-27 में वित्तीय घाटे का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में वित्तीय घाटा 4.4 प्रतिशत
वित्त वर्ष 2026-27 में राजस्व घाटे का अनुमान 1.5 प्रतिशत; वित्त वर्ष 2026-27 में प्रभावी राजस्व घाटा 0.3 प्रतिशत रहने का अनुमान
वित्त वर्ष 2026-27 में कुल कर राजस्व के सकल घरेलू उत्पाद के 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान
वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही के 1.3 प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में चालू खाता घाटा 0.8 प्रतिशत कम हुआ
वैश्विक शुल्क परिदृश्य के बावजूद भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025 में 825.3 अमरीकी डॉलर तक पहुंचा
वित्त वर्ष 2025 में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 81.0 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा
प्रविष्टि तिथि:
01 FEB 2026 12:44PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि भारत का आर्थिक परिदृश्य सशक्त घरेलू मांग, ढांचागत सुधार और स्थित आर्थिक पर्यावरण के कारण सकारात्मक रहा। देश में इस साल के दौरान 3 प्रमुख रेटिंग हासिल की। वित्तीय और कॉर्पोरेट केन्द्रीय मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए बताया कि वृहद आर्थिक ढांचागत रिपोर्ट और मध्यम अवधीय वित्तीय नीति तथा वित्तीय नीति रणनीति रिपोर्ट के अनुसार मुद्रा स्फीति तटस्थ रही है। बजट में बताया गया है कि निजी निवेश, गैर नियामक, श्रम बाजार सुधार, लोगों द्वारा पूंजी निवेश कर सुधारों डिजिटल परिवर्तन और अर्थव्यवस्था को नया रूप देना अर्थव्यवस्था के उच्च स्तर पर पहुंचने के कारक हैं। निजी क्षेत्रों द्वारा निवेश बढ़ने से वित्तीय और कॉर्पोरेट क्षेत्र का वित्तीय रूप से सशक्त होना भी विकास के मुख्य कारक हैं।
वृहद आर्थिक ढांचागत स्टेटमेंट
आर्थिक विकास
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा दिए गए पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 8 प्रतिशत के मामूली सकल घरेलू उत्पाद के विकास के साथ वित्त वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। सेवा क्षेत्र 9.1 प्रतिशत के विस्तार के साथ विकास के मुख्य चालक हैं। विनिर्माण और निर्माण में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कृषि में 3.1 प्रतिशत की बढोत्तरी का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों से ऊपर सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत का विकास अनुमानित है।
उपभोग और निवेश
घरेलू मांग विकास का मुख्य कारक रही है। सकल घरेलू उत्पाद के 61.5 प्रतिशत के हिस्सेदारी के साथ प्राइवेट फाइनल कजंप्पशन एक्सपैनडिचर (पीएफसीई) में 7 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का अनुमान है जो पिछले 12 वित्त वर्षों में अब तक सर्वाधिक है। सरकार का कुल उपभोग व्यय साल दर साल मजबूत होता हुआ वित्त वर्ष 2025 के 2.3 प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 2026 में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि का भी अनुमान है। यूपीआई लेनदेन, हवाई और रेल यातायात ई-वे भुगतान इत्यादि, शहरी और ग्रामीण उपभोग दोनों के सतत गति को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2026 में कुल स्थाई पूंजीगत संरचना (जीएफसीएफ) 7.8 प्रतिशत बढ़ने के साथ निवेश गतिविधि मजबूत हुई है जो पिछले वर्ष से ज्यादा है। बजट में आगे बताया गया है कि जीएफसीएफ के हिस्से ने पिछले 10 वर्षों में 30 प्रतिशत स्थिरता बनाई रखी है।
बाहरी क्षेत्र
भारत का कुल निर्यात (वस्त्र एवं सेवा) वित्त वर्ष 2025 में 825.3 विलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया जिसने वित्त वर्ष 2026 में लगातार गति बनाई रखी। अमरीका द्वारा कई तरह के शुल्क लगाने के बावजूद अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कपड़ा निर्यात 2.4 प्रतिशत बढ़ा जबकि सेवा निर्यात में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कपड़ों के आयात में अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच 5.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वित्त वर्ष 2025 में 81.0 मिलियन अमरीकी डॉलर दर्ज किया गया और ये गति वित्त वर्ष 2026 में और मजबूत हुई, जो किसी भी वित्त वर्ष में पहले 7 महीनों में सबसे अधिक है। चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही के 1.3 प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद का 0.8 प्रतिशत घटा है।
मध्यम अवधि वित्तीय नीति एवं रणनीति
वित्तीय सूचक
केन्द्रीय बजट 2026-27 में वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में अंकित ऋण को भी दर्शाया गया है और यह वित्त वर्ष 2021-22 में घोषित वित्तीय समयकन के परिपेक्ष में भी बताता है, जो वित्तीय अनिश्चिताओं से समझौता किए बगैर उपलब्ध संसाधनों के साथ मजबूत नीव प्रदान करता है। बजट 2021-22 में घोषित सरकार ने अपनी सोच को दर्शाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के घरेलू उत्पाद में राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत रखा। इससे आगे सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को अपनाया जिसने केन्द्र सरकार के ऋण को कम किया। सरकार के वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों को सकल घरेलू उत्पाद प्रतिशत के विवरण नीचे दिया गया है।
प्राप्ति
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में कुल कर राजस्व के 44.04 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। प्रत्यक्ष कर 26.97 लाख करोड़ रुपये का जीटीआर (जीटीआर का 61.2 प्रतिशत) में मुख्य योगदान है। प्रत्यक्ष करो का अनुमान 17.07 लाख करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों में जीटीआर और जीडीपी का अनुपात 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 2026-27 का बजट 16वें वित्त आयोग (एसएफसी) 16वें वित्त आयोग के पहले वर्ष के लिए पुरस्कार समय भी है। एसएफसी ने राज्यों के विकेन्द्रीयकरण के लिए अलग हिस्से का 41 प्रतिशत बरकरार रहने का सलाह दी है। कर राजस्व (एनटीआर-केन्द्र के लिए कुल) 28.67 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया है। 2026-27 बजट अनुमानों में केन्द्र सरकार के लिए एनटीआर को 6.66 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया है। केन्द्र सरकार की [कर राजस्व (एनटीआर) और गैर कर राजस्व (एनटीआर)] का अनुमान 35.33 लाख करोड़ रुपये है। 2025-26 के संशोधित अनुमानों से राजस्व प्राप्ति अनुमान ने 5.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
व्यय
बजट अनुमान 2026-27 में केन्द्र सरकार का कुल व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 13.6 प्रतिशत) रखा गया है जो 2025-26 के 49.65 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमानों से 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 3.1 प्रतिशत) रखा गया है। इसमें एसएएससीआई (पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को विशेष सहायता ऋण) के माध्यम से पूंजीगत सहायता शामिल है। केन्द्र सरकार के प्रभावी पूंजीगत व्यय में भारत सरकार का पूंजीगत व्यय और पूंजीगत परिसंपत्ति हासिल करने के लिए अनुदान सहायता राशि शामिल है। यह दोनों मिलकर निवेश करते हैं जो अर्थव्यवस्था की क्षमता को बढ़ाता है। 2026-27 के बजट अनुमानों में अनुदान सहायता राशि के अंतर्गत पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए 4.93 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) रखे गए हैं। इस प्रकार वित्त वर्ष 2026-27 में प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 4.4 प्रतिशत) रहने का अनुमान है।
राज्य के लिए कर विकेन्द्रीयकरण और वित्त आयोग द्वारा सहायता
वित्त आयोग के परामर्श पर आधारित केन्द्र सरकार ने वित्त आयोग चरण के दौरान राज्यों के लिए कर विकेन्द्रीयकरण किया है। जैसा कि पहले बताया गया है कि राज्यों के लिए 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखी है और सरकार द्वारा इस परामर्श को स्वीकार कर लिया गया है। 2026-27 के बजट अनुमान में राज्यों के लिए 2025-26 के संशोधित अनुमान 13.93 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15.26 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें 9084.02 करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन शामिल है, जो पिछलें वर्षों में विकेन्द्रीयकरण के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा केन्द्रों से प्राप्ति पर आधारित है। 2026-27 के बजट अनुसार राज्यों के लिए कर विकेन्द्रीयकरण जीडीपी का 3.9 प्रतिशत है और वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 1.33 लाख करोड़ रुपये अधिक है। 2026-27 बजट अनुमानों में वित्त आयोग ने 1.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदान अनुमानित किए हैं। इस प्रकार वित्त आयोग के माध्यम से राज्यों के साथ कुल संसाधनों की हिस्सेदारी जैसे कर विकेन्द्रीयकरण और वित्त आयोग अनुदान, 2026-27 के बजट के अनुमानों में 16.56 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया है।

2026-27 के लिए राजकोषीय नीति रणनीति
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय नीति रणनीति 2025-26 के बजट में दर्शाते हुए ऋण के द्वारा निर्धारित रहेगी। मध्यम अवधि का उद्देश्य वित्त वर्ष 2030-31 तक ऋण और जीडीपी का अनुपात लगभग 50 प्रतिशत रहने का उद्देश्य है। जिसमें राजकोषीय घाटा मुख्य भूमिका निभाएगा। 2026-27 के बजट अनुमानों में उपरोक्त लक्ष्यों के अनुरूप यह अनुमान लगाया गया है कि केन्द्र सरकार के ऋण और जीडीपी का अनुपात 55.6 प्रतिशत रहेगा, जिसमें जीडीपी के 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य शामिल है। राजकोषीय रणनीति के अन्य प्रावधानों में पूंजीगत व्यय पर लगातार ध्यान देने के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को सहायता, वैश्विक आर्थिक घटनाओं तथा देश के विकसित भारत की ओर अग्रसर होने और संवृद्धि सुनिश्चित करना शामिल है। अन्य प्रावधानों में कर नीति में सुधार, व्यय नीति, सरकार उधारी, देनदारी और निवेश शामिल है।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई-15
(रिलीज़ आईडी: 2221397)
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