विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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निशुल्‍क विधिक सहायता सेवाएँ

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 8:39PM by PIB Delhi

सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम (एलएसए),1987 के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना की है, ताकि समाज के गरीब और हाशिए पर रह गए वर्गों को निशुल्‍क और सक्षम कानूनी सेवाएँ प्रदान की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी नागरिक का न्याय प्राप्त करने का अवसर आर्थिक या अन्य कारणों से छिन न जाए। इसके अलावा इसका उद्देश्‍य यह सुनिश्चित के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना है कि कानूनी प्रणाली का संचालन समान अवसरों के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे।

देश के कोने-कोने में लोगों तक पहुँच कायम करने के लिए, तालुका स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थाएँ स्‍थापित की गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (एससीएलएससी) काम करती है, जबकि 38 उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियाँ (एचसीएलएससी),37 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, (एसएलएसए) 707 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और 2440 तालुका विधिक सेवा समितियाँ (टीएलएससी) हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा की जाने वाली गतिविधियों/कार्यक्रमों में विधिक सहायता और सलाह; कानूनी जागरूकता कार्यक्रम; कानूनी सेवा क्लीनिक;  कानूनी साक्षरता क्लब; लोक अदालतें और पीड़ित मुआवजा योजना को लागू करना शामिल है।

पिछले पाँच वित्तीय वर्षों के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत निशुल्‍क विधिक सेवाओं से लाभान्वित हुए व्यक्तियों की संख्या का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और वर्ष-वार विवरण अनुलग्नक-ए में दिया गया है। हालाँकि, ज़िला और मामला-वार डेटा एनएएलएसए द्वारा नहीं रखा जाता है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (निशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएँ) विनियम, 2010 सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, (एसएलएसए) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और तालुका विधिक सेवा समितियों (टीएलएससी) सभी स्तरों पर निगरानी और मेंटरिंग समितियों (एमएमसी) के द्वारा  विधिक सहायता सेवाओं की पुख्‍ता निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था प्रदान करता है। ये समितियाँ न्‍यायालय में मिलने वाली कानूनी सहायता की देखरेख करने, दिए गए मामलों की प्रगति पर नज़र रखने, तथा सूचीबद्ध वकीलों और विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता (एलएडीसी) को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन देने के लिए उत्‍तरादयी हैं।

ये एमएमसी  विधिक सहायता वाले मामलों की रोज़ाना की प्रगति और अंतिम नतीजों को ट्रैक करने के लिए रजिस्टर रखती हैं। वे विधिक सहायता अधिवक्ताओं से समय-समय पर रिपोर्ट लेती हैं, उनके प्रदर्शन का आकलन करती हैं, और संतोषजनक प्रगति न होने पर संबंधित अधिकारियों को सुधार के कदम उठाने की सलाह देती हैं। लगातार फॉलो-अप करने की यह प्रणाली विधिक सेवा में जवाबदेही, पारदर्शिता और गुणवत्‍ता नियंत्रण सुनिश्चित करती है। एमएमसी खराब प्रदर्शन या अनुचित आचरण का पता लगाने के लिए अधिवक्ताओं के कामकाज का भी आकलन करती  हैं । इसके अलावा, एसएलएसए के कार्यकारी अध्‍यक्ष के मार्गदर्शन में एलएडीसीएस के तहत संलग्‍न प्रत्‍येक मानव संसाधन के प्रदर्शन का एसएलएसए द्वारा हर छह महीने में आकलन किया जाता है। इसके अलावा, एलएडीसी द्वारा किए गए मुकदमों के संबंध में किए गए कार्य की  मासिक रिपोर्ट  एसएलएसए की ओर से एनएएलएसए को भेजी जाती है, जिससे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर रियल-टाइम निगरानी और डेटा आधारित आकलन सुनिश्चित होता है।

 (डी) एनएएलएसए द्वारा विधिक सहायता के लंबित मामलों से जुड़ा डेटा नहीं रखा जाता है। हालाँकि, मामलों के निपटान की गुणवत्‍ता और उनकी दरों की विविध स्‍तरों पर नियमित रूप से निगरानी की जाती है, जैसा कि ऊपर पैरा (सी) में बताया गया है।

(ई) विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत पिछले पांच वित्‍तीय वर्षों के दौरान अलग-अलग विधिक सहायता सेवा और कार्यक्रम लागू करने के लिए एनएएलएसए द्वारा जारी और इस्तेमाल की गई निधियों का ब्यौरा नीचे दिया गया है:

वित्तीय वर्ष

अनुदान सहायता (रु. में)

जारी की गई धनराशि

उपयोग की गई धनराशि

2021-22

145,00,00,000

145,00,00,000

2022-23

190,00,00,000

190,00,00,000

2023-24

400,00,00,000

399,31,50,685

2024-25

200,00,00,000

197,10,67,183

147,92,50,000

(एलएडीसीएस योजना के अंतर्गत)

114,66,93,380*

2025-26

(18.01.2026 तक)

200,00,00,000

144,65,24,026

195,84,00,000

(एलएडीसीएस योजना के तहत)

194,17,18,000

 

* पीएफएमएस के नए शुरू किए गए टीएसए/टीएसए हाइब्रिड मॉड्यूल में कुछ टेक्निकल दिक्कतों की वजह से, एसएलएसए और डीएलएसए वित्‍तीय वर्ष 2024-25 के दौरान विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता  प्रणाली (एलएडीसीएस) के तहत पूरी निधियों का इस्तेमाल नहीं कर सके।  

अनुलग्नक - ए

वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 (नवंबर 2025 तक) विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत प्रदान की गई कानूनी सेवाओं से लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या दर्शाने वाला विवरण

क्रम संख्या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्राधिकरण का नाम

2021-22

2022-23

2023-24

2024-25

2025-26

(नवंबर 2025 तक)

1

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

79

134

220

341

278

2

आंध्र प्रदेश

6,371

9,473

8,265

11,266

9,069

3

अरुणाचल प्रदेश

2,657

5,559

5,696

9,236

6,696

4

असम

1,10,254

38,335

63,749

82,694

66,567

5

बिहार

16,89,158

2,09,809

1,51,413

84,505

51,333

6

चंडीगढ़

1,781

2,653

2,822

2,951

2,202

7

छत्तीसगढ़

42,394

44,106

62,164

80,874

55,547

8

दादरा और नगर हवेली

27

28

55

45

61

दमन और दीव

17

24

34

119

92

9

दिल्ली

79,055

96,433

1,21,882

76,526

48,922

10

गोवा

1,101

2,041

1,558

1,889

2,359

11

गुजरात

21,953

32,422

40,569

50,467

60,168

12

हरियाणा

23,260

43,098

76,863

82,194

85,858

13

हिमाचल प्रदेश

4,806

5,998

7,346

6,222

4,442

14

जम्मू और कश्मीर

8,870

7,992

11,396

18,602

16,966

15

झारखंड

6,49,481

1,45,217

2,69,303

3,28,365

2,95,398

16

कर्नाटक

32,794

45,663

53,406

51,245

41,089

17

केरल

16,895

23,418

36,498

26,571

24,175

18

लद्दाख

2,408

711

505

324

181

19

लक्षद्वीप

0

0

0

1

14

20

मध्य प्रदेश

33,43,800

1,91,921

2,25,510

2,33,009

1,65,804

21

महाराष्ट्र

22,595

36,663

53,756

59,454

40,935

22

मणिपुर

22,651

26,929

62,635

99,062

54,743

23

मेघालय

2,346

2,769

2,371

2,754

3,378

24

मिजोरम

3,201

5,038

4,801

3,713

2,427

25

नागालैंड

7,750

7,390

4,603

5,012

7,418

26

ओडिशा

8,849

11,880

19,289

22,134

12,286

27

पुडुचेरी

884

788

621

616

362

28

पंजाब

36,404

56,448

60,361

65,513

55,037

29

राजस्थान

13,833

13,472

20,290

22,216

19,454

30

सिक्किम

986

1,127

1,074

901

814

31

तमिलनाडु

38,181

49,570

45,180

52,528

37,759

32

तेलंगाना

6,712

12,615

13,193

16,021

13,909

33

त्रिपुरा

2,671

5,055

9,964

10,303

7,943

34

उत्तर प्रदेश

1,32,629

24,890

29,079

22,732

20,861

35

उत्तराखंड

3,775

5,386

21,339

34,208

35,333

36

पश्चिम बंगाल

29,015

49,714

62,354

92,914

72,350

 

कुल

63,69,643

12,14,769

15,50,164

16,57,527

13,22,230

 

यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी।

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पीके/केसी/आरके


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