पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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आईईडब्ल्यू 2026: भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के तीसरे दिन ऊर्जा सुरक्षा के लिए डेटा, प्रौद्योगिकी और संतुलित मार्गों पर प्रकाश डाला गया


जैव ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि, एकीकृत डेटा, स्वच्छ उत्पादन, हाइड्रोजन उत्पादन में प्रगति और कोयले का व्यावहारिक उपयोग भारत के विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण को आकार देते हैं

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 7:33PM by PIB Delhi

भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 का तीसरा दिन इस स्पष्ट संदेश के साथ समाप्त हुआ कि भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नीति, डेटा, प्रौद्योगिकी और निवेश का समन्वय आवश्यक है क्योंकि सरकार, उद्योग और वैश्विक संस्थानों के नेताओं ने एक सुरक्षित, लचीले और समावेशी ऊर्जा भविष्य के लिए मार्ग प्रस्तुत किए।

वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन में आईईए इंडिया बायोएनर्जी मार्केट रिपोर्ट: आउटलुक फॉर लिक्विड एंड गैसियस बायोफ्यूल्स टू 2030 और पीपीएसी जर्नल एनश्योरिंग एनर्जी सिक्योरिटी: रोल ऑफ स्टेट एनर्जी पॉलीसीज के 5वें संस्करण के विमोचन के अवसर पर आयोजित सत्र के दौरान डॉ. मित्तल ने कहा कि भारत के जैव ऊर्जा क्षेत्र में समग्र ऊर्जा मांग की तुलना में काफी तेजी से बढ़ने और ऊर्जा सुरक्षा, उत्सर्जन में कमी और ग्रामीण विकास के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरने की क्षमता है।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रति व्यक्ति आधार पर भारत की ऊर्जा खपत वैश्विक स्तर पर निचले आधे हिस्से में है, लेकिन इसकी वृद्धि दर लगभग विश्व औसत से दोगुनी है। अगले दशक में भारत की ऊर्जा वृद्धि वैश्विक वृद्धि से दो गुना या उससे भी अधिक हो सकती है।’’ नीति-प्रेरित परिणामों को रेखांकित करते हुए उन्होंने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उदाहरण दिया और बताया कि 2014 में मिश्रण मात्र 1.4 प्रतिशत था, जो आज लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि बायोडीज़ल, संपीड़ित बायोगैस और टिकाऊ विमानन ईंधन के लिए भी इसी तरह के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के नवीकरणीय ऊर्जा प्रभाग के प्रमुख डॉ. पाओलो फ्रैंकल ने आईईए रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत ने 2020 से आधुनिक जैव ऊर्जा की खपत को तीन गुना कर लिया है और बेहतर नीतिगत कार्यान्वयन के तहत 2030 तक इसके उपयोग को फिर से दोगुना कर सकता है।

ऊर्जा डेटा के साथ आर्थिक नीति को सशक्त बनाना: विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की वृद्धि का मार्गदर्शन” शीर्षक से एक अन्य लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में पंकज जैन, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव और आठवीं केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन ने प्र प्रतिक्रियात्मक योजना के खिलाफ चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा क्षेत्र पिछड़ने नहीं सकता। ऊर्जा क्षेत्र को पूर्वानुमान लगाना होगा’’। उन्होंने पेट्रोलियम, बिजली, कोयला और गैस से जुड़े डेटा के एकीकरण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, ताकि मैक्रोइकॉनॉमिक पूर्वानुमान और बुनियादी ढांचे की प्राथमिकता तय करने में मदद मिल सके।

अपस्ट्रीम सेक्टर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने पर आयोजित लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीईओ, राजर्षि गुप्ता ने कहा कि भारत में अन्वेषण डेटा के निर्माण, साझाकरण और उपयोग के तरीके में एक मौलिक बदलाव हो रहा है, जिसमें सहयोग पर जोर दिया गया है और एआई-संचालित निर्णय लेने से मूल्य प्राप्त करने के लिए बाधाओं को तोड़ने की आवश्यकता है।

सौर और पवन ऊर्जा के अवसर: भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार की दोहरी क्षमता को साकार करना विषय पर एक अन्य लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि भारत को क्षमता विस्तार से आगे बढ़कर ग्रिड एकीकरण और घरेलू विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, यह देखते हुए कि गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लगभग 267 गीगावाट तक पहुंच गई है।

सौर और पवन अवसर: भारत के नवीकरणीय ऊर्जा के दोहरे संभावित लाभ को साकार करना”, विषय पर आयोजित एक अन्य लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में नवीकरणीय एवं नवीन ऊर्जा मंत्रालय में सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि भारत को केवल क्षमता विस्तार से आगे बढ़कर ग्रिड इंटीग्रेशन और घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि गैर-जीवाश्म ईंधन की क्षमता लगभग 267 गीगावाट तक पहुंच चुकी है।

सुरक्षित ऊर्जा मिश्रण में कोयले की बदलती भूमिका: एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण निर्धारित करना” विषय पर लीडरशिप पैनल में कोयला मंत्रालय में सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत को तीन गुना करने की दिशा में काम करते समय, किफायती और विश्वसनीय बेसलोड पावर बनाए रखना अनिवार्य है, भले ही नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से बढ़ रही हो।

ग्रीन अमोनिया के विस्तार: वैल्यू चेन सहयोग और हाइड्रोजन इकोसिस्टम” पर लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में मिशन डायरेक्टर अभय बक्रे ने कहा कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकीतंत्र निर्णायक रूप से महत्वाकांक्षा से कार्यान्वयन की ओर बढ़ रहा है, जिसे प्रतिस्पर्धी नवीकरणीय ऊर्जा लागत, नीति में स्थिरता और वैश्विक साझेदारियों का समर्थन प्राप्त है।

तीसरे दिन के समापन के साथ, भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 ने इस बात की पुष्टि की कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन किसी एक मार्ग से नहीं, बल्कि एक समन्वित दृष्टिकोण से परिभाषित होगा जो विकास और स्थिरता, नवाचार और विश्वसनीयता तथा महत्वाकांक्षा और यथार्थवाद के बीच संतुलन स्थापित करेगा। नीतिगत स्पष्टता, आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने और सभी हितधारकों के सहयोग से, भारत वैश्विक ऊर्जा प्रणालियों के भविष्य को आकार देने वाली एक केंद्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।

भारत ऊर्जा सप्ताह के बारे में

भारत ऊर्जा सप्ताह देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जो सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए सरकारी नेताओं, उद्योग जगत के अधिकारियों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में, आईईडब्ल्यू वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देने वाले निवेश, नीतिगत समन्वय और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है।

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पीके/केसी/एसएस


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