संचार मंत्रालय
ग्रामीण और दूरदराज वाले क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 6:27PM by PIB Delhi
संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने हेतु भारतनेट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। भारतनेट के पहले और दूसरे चरण के अंतर्गत कुल 2,22,341 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें से 2,14,904 ग्राम पंचायतें सेवा के लिए तैयार हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की 46,746 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने 04.08.2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके तहत देश की लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों और लगभग 3.8 लाख गैर-ग्राम पंचायत वाले गांवों को मांग के आधार पर ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इनमें उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतें और 44,530 गैर-ग्राम पंचायत वाले गांव शामिल हैं।
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के जरिए देश भर के 39,799 ग्रामीण और दूरदराज वाले गांवों में 4जी मोबाइल कनेक्टिविटी की योजना बनाई गई है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,359 गांव भी शामिल हैं। दिनांक 31.12.2025 तक, इस योजना से संबद्ध गांवों में से 33,044 गांवों को कवर किया जा चुका है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,199 गांव भी शामिल हैं।
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) में, नेटवर्क की संरचना को उन्नत करने और नेटवर्क की विश्वसनीयता में सुधार करने हेतु निम्नलिखित विशेषताओं के साथ एक संशोधित कार्यान्वयन मॉडल तैयार किया गया है:
(i) रिंग संरचना में भारतनेट नेटवर्क का निर्माण और उन्नयन
(ii) सेवा स्तरीय समझौते (एसएलए) के आधार पर संपूर्ण नेटवर्क का संचालन एवं रखरखाव
(iii) प्रत्येक पैकेज में नेटवर्क के निर्माण और संचालन एवं रखरखाव के लिए एकल परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए)
(iv) समर्पित नेटवर्क संचालन केन्द्र
(v) रिमोट फाइबर मॉनिटरिंग सिस्टम
सरकार ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के दृष्टिकोण से डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इसका लक्ष्य डिजिटल पहुंच, डिजिटल समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण सुनिश्चित करना और डिजिटल विभाजन को कम करना है। इसकी विस्तृत जानकारी डिजिटल इंडिया वेबसाइट (https://www.digitalindia.gov.in) पर उपलब्ध है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) जैसी योजनाएं शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य देश भर में 6.39 करोड़ व्यक्तियों को डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण प्रदान करना था। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के जरिए विभिन्न डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
टेलीकॉम – साइबर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (टी-सीएसआईआरटी) दूरसंचार संचार इकोसिस्टम के लिए क्षेत्रीय घटना प्रतिक्रिया और साइबर सुरक्षा समन्वय कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी), आईएसपी और संबंधित महत्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना को प्रभावित करने वाली साइबर घटनाओं और कमजोरियों का समय पर पता लगाना, विश्लेषण करना, समन्वय करना और उनका निवारण करना है।
विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ), जो नीति आयोग का एक संबद्ध कार्यालय है, आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (ओओएमएफ) का रखरखाव करता है, जिसमें डीबीएन द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं सहित डिजिटल कनेक्टिविटी कार्यक्रमों के लिए संकेतक शामिल हैं। विस्तृत विवरण डीएमईओ की वेबसाइट (https://dmeo.gov.in/output-outcome-framework?ministry=55&tid_1=223) पर उपलब्ध हैं।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2220641)
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