विधि एवं न्याय मंत्रालय
जनजातीय क्षेत्रों में विधिक संसाधन केंद्रों की स्थापना
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 8:32PM by PIB Delhi
सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम (एलएसए), 1987 के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना की है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों सहित गरीब और वंचित वर्गों को निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएँ प्रदान करना है, ताकि किसी भी नागरिक का न्याय प्राप्त करने का अवसर आर्थिक या अन्य कारणों से छिन न जाए। इसके अलावा इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना है कि कानूनी प्रणाली का संचालन समान अवसरों के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे। ओडिशा सहित देश के कोने-कोने में लोगों तक पहुँच कायम करने के लिए, तालुका स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थाएँ स्थापित की गई हैं।
एनएएलएसए ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (विधिक सेवा क्लिनिक्स) नियम, 2011 अधिसूचित किए हैं, जो सभी गाँवों या गाँवों के समूह में, इन गाँवों या गाँवों के समूह के आकार के अनुसार, जिला विधिक सेवा क्लिनिक्स स्थापित करने का प्रावधान करते हैं। ऐसे क्लिनिक्स को ग्राम कानूनी देखभाल एवं सहायता केंद्र कहा जाता है। तदनुसार, ओडिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और तालुका विधिक सेवा समितियों (टीएलएससी) द्वारा, जनजातीय लोगों समेत हाशिए पर पड़े लोगों को ज़रूरत पड़ने पर उनकी कानूनी समस्याओं को सुलझाने में मदद करने के लिए 132 ग्राम कानूनी देखभाल एवं सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। ओडिशा में पिछले दो वर्षों में जिन व्यक्तियों ने ग्राम कानूनी देखभाल एवं सहायता केंद्र का दौरा किया और जिन्हें वहाँ कानूनी सहायता प्रदान की गई, उनका विवरण इस प्रकार है:
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वर्ष
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दौरा करने वाले व्यक्तियों की संख्या
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कानूनी सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की संख्या
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2024
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8,029
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4,593
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2025
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7,638
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5,644
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वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र के अंतर्गत, ओडिशा में 2025 में, तालुका न्यायालयों से लेकर ओडिशा उच्च न्यायालय तक राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा निर्धारित तिथियों पर कुल 04 राष्ट्रीय लोक अदालतें (एनएलए) लगाई गईं। इसके अलावा, ओएसएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष के निर्देश पर, ओडिशा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने 27.7.2025 को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मामलों पर एक जिला स्तर की लोक अदालत भी लगाई थी। इसके अलावा, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े मामलों को देखने के लिए ओडिशा में 22 स्थायी लोक अदालतें चल रही हैं।
यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आरके
(रिलीज़ आईडी: 2220631)
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