अणु ऊर्जा विभाग
संसद का प्रश्न: परमाणु सुरक्षा और बचाव
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 5:02PM by PIB Delhi
भारत में परमाणु एवं विकिरण संयंत्रों में परमाणु सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक मजबूत प्रणाली उपलब्ध है। भारत में नागरिक परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) एक विस्तृत एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आईएमएस) के माध्यम से परमाणु सुरक्षा, विकिरण संरक्षण और परमाणु सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय योजना का संचालन करता है। यह प्रणाली सभी नियामक एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं को एक एकीकृत ढांचे जोड़ती है, जिससे नियामक निर्णय लेने में सामंजस्य, एकरूपता और प्रभावशीलता तय होती है। विनियमन को सुव्यवस्थित करने और एकसमान मानकों को प्रोत्साहन देने के लिए, एईआरबी ने सुरक्षा संहिताओं, दिशानिर्देशों और मानकों का एक व्यापक सेट तैयार किया है, जिसका पालन सभी संचालकों के लिए अनिवार्य है।
परमाणु संयंत्रों को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए एईआरबी से जरूरी लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। ये लाइसेंस निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन पर निर्भर करते हैं। एईआरबी के निरीक्षक लाइसेंस प्राप्त संयंत्रों का नियमित निरीक्षण करके अनुपालन की पुष्टि करने हेतु अधिकृत हैं। अनुपालन न किए जाने की स्थिति में, एईआरबी सुधारात्मक सुझाव और तकनीकी मार्गदर्शन देता है। अनुपालन न होने की गंभीर स्थिति में, एईआरबी के पास संचालन लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने का अधिकार है।
परमाणु सुरक्षा से जुड़े वे पहलू जिनका सुरक्षा पर असर पड़ता है, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) के नियामक ढांचे में जोड़े गए हैं। सुरक्षा और संरक्षा के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए आंतरिक व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सुरक्षा उपायों को सुरक्षा उद्देश्यों से समझौता किए बिना तैयार और संचालित किया जाए। एईआरबी सुविधाओं और गतिविधियों पर लागू होने वाली परमाणु सुरक्षा जरूरतों को तैयार करता है और सुरक्षा और संरक्षा दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण करता है। परमाणु और विकिरण सुविधाओं के सुरक्षा पहलुओं से जुड़ी जानकारी परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ औपचारिक कार्य व्यवस्था के माध्यम से साझा की जाती है, जिससे समन्वित निगरानी और प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिलती है।
भारत के परमाणु संयंत्रों में अंतरराष्ट्रीय परमाणु और विकिरण सुरक्षा समझौतों का अनुपालन परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की ओर से एक सुव्यवस्थित ढांचे के माध्यम से व्यवस्थित तौर पर निगरानी सुनिश्चित की जाती है, जिसमें नियामक निरीक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक स्तर पर स्वीकृत सुरक्षा मानकों के साथ तालमेल शामिल है। यह फ्रेमवर्क अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और पारदर्शिता के उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की ओर से आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यों के लिए दिए गए सार्वजनिक क्षेत्र में परमाणु आपातकाल के प्रबंधन के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी जरूरतें स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय प्राधिकरण के समन्वय से अच्छी तरह से स्थापित की जाती हैं और बनाए रखी जाती हैं।
आपातकालीन स्थितियों में जनता की सुरक्षा के लिए एईआरबी की ओर से दिए गए निर्देशों और आवश्यकताओं के अनुसार आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का समय-समय पर अभ्यास कर परीक्षण किया जाता है और वर्तमान आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुरूप इनमें संशोधन भी किया जाता है।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2220423)
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