वित्त मंत्रालय
सड़कें, आवास, स्वच्छ पेयजल कनेक्शन और डिजिटल संपर्क सहित ग्रामीण आधारभूत ढांचे में जबर्दस्त प्रगति
पीएमजीएसवाई-I योजना में 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र बसावटों को संपर्क सुविधा प्रदान की गई
पीएमजीएसवाई-II योजना के तहत 6,664 सड़कों (49,791 किलोमीटर) और 759 पुलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है-पीएमजीएसवाई-I और II के सफल क्रियान्वयन के बाद पीएमजीएसवाई-III योजना अपने पूर्ण होने के अग्रिम चरण पहुंची
‘सभी के लिए आवास’ के उद्देश्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण क्रियान्वित की जा रही है, पिछले 11 वर्षों में 3.70 करोड़ आवासों का निर्माण पूरा कर लिया गया है
ग्रामीण क्षेत्रों में, ‘हर घर जल’ के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत 15.74 करोड़ (81.31 प्रतिशत) घरों को इसके दायरे में लाया गया है
स्वामित्व योजना के तहत लक्षित लगभग 3.44 लाख गांवों के मुकाबले 3.28 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 1:46PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि है कि सड़कें, आवास, स्वच्छ पेयजल कनेक्शन और डिजिटल संपर्क समेत मजबूत आधारभूत ढांचा समावेशी विकास के लिए बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह समुदायों को बाज़ारों, सेवाओं और अवसरों से जोड़ता है, जो जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं।
सरकार ने 25 दिसम्बर 2000 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसवाई की शुरुआत की थी, जिसे पीएमजीएसवाई-I कहा गया है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य (वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण भारत में मैदानी क्षेत्रों में 500 व्यक्ति या उससे अधिक और उत्तर-पूर्वी भारत तथा पवर्तीय क्षेत्रों में 250 व्यक्ति या उससे अधिक) बिना संपर्क पात्र पर्यावासों को सभी मौसम के अनुकूल सड़क सुविधा से जोड़ना है। 15 जनवरी 2026 तक 99.6 प्रतिशत पात्र बसावटों तक यह संपर्क सुविधा प्रदान करा दी गई है। इसके अलावा पीएमजीएसवाई-I, के तहत 1,64,581 सड़कों (6,44,735 किलोमीटर) और 7,453 पुलों की मंजूरी दी गई है तथा 1,63,665 सड़कों (6,25,117 किलोमीटर) और 7,210 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। पीएमजीएसवाई-II को 2013 में शुरू किया गया था, जिसमें 6,664 सड़कों (49,791 किलोमीटर) और 759 पुलों को मंजूरी दी गई और 15 जनवरी 2026 तक 6,612 सड़कों (49,087 किलोमीटर) और 749 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।
सरकार ने बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यावासों, ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्चतर माध्यमिक स्कूलों तक संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए 1,25,000 किलोमीटर लंबे मार्गों के निर्माण के लिए जुलाई 2019 में पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी। पीएमजीएसवाई-III योजना के तहत 15,965 सड़कों (1,22,363 किलोमीटर) और 3,211 पुलों को मंजूरी दी गई थी और 15 जनवरी 2026 तक 12,699 सड़कों (1,02,926 किलोमीटर) तथा 1,734 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
सरकार ने सभी के लिए आवास के उद्देश्य को हासिल करने की दिशा में प्रधानमंत्री आवास-ग्रामीण योजना शुरू की थी, जो एक अप्रैल 2016 से क्रियान्वित की जा रही है और इसका उद्देश्य वर्ष 2029 तक ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे आवासों में रहने वाले सभी पात्र आवासहीन लोगों को बुनियादी सुविधाओं सहित 4.95 करोड़ पक्के आवास उपलब्ध कराना है। राज्यों/संघशासित प्रदेशों को कुल 4.14 करोड़ आवासों का लक्ष्य दिया गया था, जिनमें से 3.86 करोड़ आवासों को मंजूरी दी जा चुकी है और 2.93 करोड़ आवासों का निर्माण अब तक कर लिया गया है। इसके अलावा पिछली योजनाओं में शेष रह गए 76.98 लाख आवासों का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिससे पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 3.70 करोड़ आवासों का निर्माण कर लिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना लागू कर रही है। इस योजना की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण आवासों के पास स्वच्छ पेयजल की सुविधा थी। 20 नवम्बर 2025 तक इसके दायरे में 12.50 करोड़ से अधिक आवासों को लाया गया और इस योजना के दायरे में शामिल आवासों की संख्या बढ़कर 15.74 करोड़ (81.30 प्रतिशत) हो गई, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है।
ग्रामीण भारत में तकनीकी-प्रेरित सहभागिता
तकनीक समावेशी विकास के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हुए बाधाओं को तोड़ कर प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंच संभव हो जाती है। अत्याधुनिक मोबाईल फोन, सैटेलाइट इंटरनेट और कृषि के क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों जैसे नवाचार ‘डिजिटल क्षेत्र’ के अंतराल को कम करने में मदद कर रहे हैं और सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। हालिया समग्र मॉड्यूलर समीक्षा: दूरसंचार 2025 इस सकारात्मक प्रवृत्ति की पुष्टि करता है। ग्राम आबादी समीक्षा एवं उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्राम क्षेत्रों का मानचित्रण (स्वामित्व) तथा नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाएँ इस बात के सशक्त उदाहरण हैं कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी ग्राम जीवन में समावेशन को बढ़ावा दे सकती है।
दिसंबर 2025 तक, स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन समीक्षा लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गांवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण किया जा चुका है। लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। वर्ष 2023–24 के दौरान, अग्रणी उर्वरक कंपनियों ने अपने स्वयं के संसाधनों से स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत 500 ड्रोन प्रदान किए गए।
इसके अतिरिक्त सरकार डिजिटल भारत भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) योजना के तहत वित्त वर्ष 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण को क्रियान्वित कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुल उपलब्ध भूमि रिकॉर्डों का 99.8 प्रतिशत मालिकाना रिकॉर्ड डिजिटलीकरण (आरओआर) कार्य पूरा कर लिया गया है।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई – 24
(रिलीज़ आईडी: 2219935)
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