वित्त मंत्रालय
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उद्योग के सकल मूल्य संवर्धन में वास्तविक आधार पर साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है: आर्थिक समीक्षा 2025-26
वित्त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत बढ़ा
भारत के कुल विनिर्माण मूल्य संवर्धन में मध्यम और उच्च-प्रौद्योगिकी गतिविधियों का योगदान 46.3 प्रतिशत रहा
समीक्षा के अनुसार वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्त के प्रवाह में 17.32 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ोतरी दर्ज की गई
भारत के इस्पात और सीमेंट के दूसरे सबसे बड़े वैश्विक उत्पादक बने रहने के साथ, मुख्य उद्योगों की मजबूत बढ़ोतरी बरकरार रही
1,047.52 मिलियन टन (एमटी) कोयले के उत्पादन के साथ, भारत का कोयला उद्योग वित्त वर्ष 25 में ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया
वॉल्यूम के लिहाज से वैश्विक स्तर पर तीसरे पायदान पर रहने के साथ, भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र ने टिकाऊ बढ़ोतरी दर्ज की
वित्त वर्ष 15-25 के दौरान वाहन उद्योग ने उत्पादन में लगभग 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई पहल कीं
इलेक्ट्रॉनिक्स के सातवीं से तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी (वित्त वर्ष 22-25) बनने के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण उद्योग वृद्धि को समर्थन देने वाले प्रमुख क्षेत्र के तौर पर उभरा
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 1:32PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्तविक आधार पर उद्योग का संवर्धित सकल मूल्य (जीवीए) में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में वृद्धि में 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद यह अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार की मुख्य वजह विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जिनमें धीरे-धीरे मंहगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्यम से औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता में सुधार और प्रौद्योगिकी को बड़े स्तर पर अपनाना एवं कंपनियों का औपचारीकरण शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्य संवर्धन में मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसकी मुख्य वजह उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं और भारतीय सेमीकंडटर मिशन जैसी विभिन्न सरकारी पहल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता में विस्तार हैं। समीक्षा में 2023 में प्रतिस्पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 37वें पायदान पर पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति में मजबूती की बात कही गई, जबकि 2022 में भारत 40वें पायदान पर था।
समीक्षा कहती है कि भले ही, वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से बैंक आधारित औद्योगिक कर्ज में बढ़ोतरी वित्त वर्ष 24 के 9.39 प्रतिशत की तुलना में घटकर वित्त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रह गई, लेकिन विभिन्न आकलनों से वर्तमान में जारी विविधीकरण के चलते बैंकों से वित्त के स्रोतों के दूर होने के संकेत मिले हैं। अगस्त 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा का उल्लेख करते हुए समीक्षा कहती है, ‘बैंक कर्ज में कमी वाणिज्यिक क्षेत्र के वित्तीय संसाधनों के समग्र प्रवाह में बढोतरी से मेल खाती है। वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्त के प्रवाह में 17.32 की सीएजीआर बढोतरी दर्ज की गई।
मुख्य इनपुट उद्योग
आर्थिक समीक्षा जोर देकर कहती है कि भारत के इस्पात और सीमेंट क्षेत्र में दुनिया के दूसरे बड़े उत्पादक बने रहने के साथ मुख्य उद्योगों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा सीमेट उत्पादक है। प्रति व्यक्ति 540 किलोग्राम के वैश्विक औसत की तुलना में भारत में सीमेंट की घरेलू खपत प्रति व्यक्ति लगभग 290 किलोग्राम है। समीक्षा कहती है कि सरकार का मुख्य रूप से राजमार्ग, रेलवे, आवासीय योजनाओं, स्मार्ट सिटीज जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ग्रामीण विकास एवं औद्योगिक वृद्धि पर जोर है, जिससे सीमेंट की मांग में खासी बढ़ोतरी का अनुमान है।
निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र से मजबूत घरेलू मांग के चलते, बीते पांच साल में इस्पात क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला।
वित्त वर्ष 25 में 1,047.52 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन के साथ भारत का कोयला उद्योग ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उत्पादन बीते वित्त वर्ष के 997.83 एमटी की तुलना में 4.98 प्रतिशत ज्यादा था।
रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका बनी रही, जिसने वित्त वर्ष 24 में समग्र विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 8.1 प्रतिशत का योगदान किया।
वित्त वर्ष 15-25 के दौरान वाहन उद्योग के उत्पादन में लगभग 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए। समीक्षा में उल्लेख किया गया कि सरकारी पहलों के चलते हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
समीक्षा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेपों में ऑटोमोबाइल और वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआई-ऑटो स्कीम), ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज’ के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआई एसीसी स्कीम), पीएम ई-ड्राइव स्कीम, पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (पीएसएम) स्कीम, स्कीम टू प्रमोट मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया (एसएमईसी) शामिल हैं।
समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 22 के सातवीं की तुलना में वित्त वर्ष 25 में तीसरी बड़ी निर्यात श्रेणी बनने के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर हाल के वर्षों में बड़े ढांचागत बदलाव का साक्षी बना है। इस वृद्धि को घरेलू उत्पादन और निर्यात (चार्ट VIII. 16) में शानदार बढ़ोतरी से बल मिला है। इस बढ़ोतरी के केंद्र में मोबाइल विनिर्माण खंड रहा, जिसका उत्पादन मूल्य वित्त वर्ष 15 के 18,000 करोड़ रुपए से 30 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 5.45 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया।
वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया में तीसरे पायदान पर मौजूद भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वित्त वर्ष 25 में 191 देशों को निर्यात के साथ वैश्विक जेनेरिक्स की मांग में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि पिछले दशक (वित्त वर्ष 15 से वित्त वर्ष 25) में निर्यात में 7 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ोतरी के साथ वित्त वर्ष 25 में फार्मास्युटिकल क्षेत्र का सालाना टर्नओवर 4.72 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया।
भविष्य के विकास के लिए एक रोडमैप
वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक, कारोबार में सुगमता और नवीन प्रणालियों में सुधार के साथ भारत का औद्योगिक क्षेत्र अच्छी तेजी का गवाह बना है। आर्थिक समीक्षा कहती है कि औद्योगीकरण के अगले दौर के लिए देश को आयात विकल्प पर आधारित मॉडल की तुलना में व्यापकता, प्रतिस्पर्धा, नावाचार और जीवीसी में व्यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। हर खंड में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने के बजाए, भारत को विविधीकरण के माध्यम से रणनीतिक लचीलेपन का विकास और व्यापक क्षमताएं हासिल करने की जरूरत है। इसके लिए आरएंडडी, प्रौद्योगिकी को अपनाने, कौशल और गुणवत्ता प्रणालियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की जरूरत है।
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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई – 02
(रिलीज़ आईडी: 2219914)
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