नीति आयोग
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सतत् उद्यम विकास के माध्यम से आदिवासी और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाना

प्रविष्टि तिथि: 28 JAN 2026 9:00PM by PIB Delhi

नीति राज्य कार्यशाला श्रृंखला के अंतर्गत, नीति आयोग ने झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समाज (जेएसएलपीएस), ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के सहयोग से रांची, झारखंड में “सतत् उद्यम विकास के माध्यम से आदिवासी और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाना” विषयक कार्यशाला का आयोजन किया।

अपने मुख्य संबोधन में, नीति आयोग के सदस्‍य, प्रो. रमेश चंद ने जोर देकर कहा कि समावेशी विकास के लिए योजनाबद्ध शहरीकरण और रोजगार ढूँढने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में जाना आवश्यक है। साथ ही उन्‍होंने उद्यम-संचालित विकास और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों को रोजगार सृजनकर्ता के रूप में सशक्त बनाने के महत्व पर बल दिया।

जेएसएलपीएस के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी, श्री अनन्य मित्तल ने कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला-संचालित आजीविका और उद्यम पहलों को सुदृढ़ बनाने में विशेष रूप से सहायक है।

कार्यशाला के उद्देश्यों पर जोर देते हुए, श्री सुरेंद्र मेहरा, कार्यक्रम निदेशक (आरडी एवं पीआर), नीति आयोग, ने बताया कि इसका उद्देश्य अन्य राज्यों से आने वाली चुनौतियों और उन अनुकरणीय मॉडलों की पहचान करना है, जिन्हें झारखंड में समन्वय और क्रॉस-लर्निंग के माध्यम से लागू किया जा सके। उन्होंने आदिवासी उद्यमों के लिए स्‍थायी मार्ग तैयार करने हेतु विभागों और योजनाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया और शिक्षा, कौशल विकास तथा आजीविका की गुणवत्ता में और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया।

महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने पर बोलते हुए, श्री के. श्रीनिवासन, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार, ने भूमि उपयोग, वित्त तक पहुँच और मजबूत बाज़ार संपर्क को सक्षम बनाने पर जोर दिया, साथ ही गैर-लकड़ी वनोत्पाद आधारित आजीविकाओं की संभावना और ब्रांड पलाश और आदिवा जैसी राज्य की प्रमुख पहलों भी को रेखांकित किया।

माननीय अतिथियों ने प्रदर्शनी क्षेत्र का भी दौरा किया, जहाँ 22 स्टालों में सामुदायिक नेतृत्व वाली इनोवेशन, कौशल-आधारित उद्यम और स्थानीय संसाधन एवं पारंपरिक ज्ञान पर आधारित बाज़ार-संबद्ध आजीविका मॉडल प्रदर्शित किए गए।

दोपहर के भोजन के बाद वाले सत्र में दो पैनल चर्चाएँ शामिल थीं, जिनमें ग्रामीण और आदिवासी झारखंड में उभरते उद्यम अवसरों पर और सरकार, शैक्षणिक संस्थाओं, उद्योग और नागरिक समाज को सम्मिलित कर, एक समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र सह-निर्माण के माध्यम से सतत् उद्यमों के जरिए ग्रामीण और आदिवासी आजीविकाओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

समापन सत्र में नीति आयोग के उप-सलाहकार, श्री अमित भारद्वाज ने भविष्‍य की दिशा का विवरण देते हुए नीति समन्वय, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण एवं आदिवासी आजीविकाओं को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले उद्यम मॉडलों पर जोर दिया, साथ ही राज्य-आधारित पहलों का समर्थन करने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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पीके/केसी/पीके


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