प्रविष्टि तिथि:
24 JAN 2026 7:49PM by PIB Delhi
बौद्ध चिंतन पर आधारित संवाद को बढ़ावा देने में वैश्विक स्तर पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पदभार संभालने के बाद से भारत ने बौद्ध भिक्षुओं, गुरुओं, विद्वानों और चिंतकों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की सक्रिय जिम्मेदारी निभाई है। इससे शांति और सद्भाव के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने ये उद्गार 24 जनवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

मंत्री महोदय ने कहा, “ज्ञान भारतम के अंतर्गत भारत सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु विश्व की सबसे बड़ी पहलों में से एक का क्रियान्वयन कर रही है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह महत्वपूर्ण पहल अपनी समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने तथा उसे विश्व के साथ साझा करने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

श्री शेखावत ने प्रतिनिधियों एवं नागरिकों से राय पिथोरा सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में प्रदर्शित भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी “द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” का भ्रमण करने और भगवान बुद्ध को श्रद्धा अर्पित करने का आग्रह किया। उन्होंने 127 वर्षों बाद भारत वापस लाई गई पिपरहवा धरोहरों का स्मरण करते हुए उन्हें भारत की प्राचीन सभ्यता और शाश्वत आध्यात्मिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में वर्णित किया।

दो दिवसीय द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन 24–25 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से किया गया। इस शिखर सम्मेलन में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू, वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

“सामूहिक ज्ञान, एकजुट आवाज़, पारस्परिक सहअस्तित्व” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में विश्वभर से लगभग 200 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख बौद्ध संगठनों के नेता, प्रतिष्ठित भिक्षु, विद्वान तथा धम्म के अनुयायी शामिल थे। इस शिखर सम्मेलन ने समकालीन और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों पर बौद्ध दृष्टिकोण से संवाद करने हेतु एक साझा मंच प्रदान किया।


इस अवसर अपने संबोधन में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने बुद्ध धर्म के समावेशी और सार्वभौमिक स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल बौद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विश्वभर में साधक अधिक से अधिक धर्म का रुख कर रहे हैं, भारत पर करुणा, अहिंसा, सद्भाव और सह-अस्तित्व के अपने सिद्धांतों को संरक्षित करने, साझा करने और उनके अनुसार जीवन जीने की विशेष जिम्मेदारी है।
द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन ने बुद्ध की भूमि तथा सामूहिक ज्ञान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक समझ के वैश्विक पथप्रदर्शक के रूप में की भारत की भूमिका की पुनः पुष्टि की।
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