जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

आदिवासी कार्य मंत्रालय आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य पहुंच को मजबूत बनाने  के लिए आदिवासी इलाकों के वैद्यों का पहला राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करेगा।


प्रोजेक्ट डृष्टि के तहत सीएमआर- आरएमआरएसी, भुवनेश्वर के साथ भारत ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी की स्थापना के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन

16–17 जनवरी 2026 | कन्हा शांति वनम, हैदराबाद, तेलंगाना

प्रविष्टि तिथि: 15 JAN 2026 5:58PM by PIB Delhi

 भारत सरकार के आदिवासी कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा 16–17 जनवरी 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद में आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य पहुंच मजबूत करने के लिए आदिवासी वैद्यों का भारत का पहला राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कदम प्रधानमंत्री जी के समावेशी, समान तथा आदिवासी समुदायों के सांस्कृतिक जड़ों पर आधारित विकास के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ।

यह कार्यक्रम भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आदिवासी एवं स्वदेशी वैद्यों को विश्वसनीय समुदाय-स्तरीय साझेदार के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान करने, उनकी क्षमता निर्माण को एकीकृत करने की एक प्रकार से प्रथम राष्ट्रीय पहल का भी प्रतिनिधित्व करेगा।

यह कार्यक्रम आदिवासी कार्य मंत्री श्री जुएल ओरांव , आदिवासी कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके तथा आदिवासी कार्य मंत्रालय की सचिव स्मति रंजना चोपड़ा के सान्निध्य में आयोजित होगा। साथ ही इसमें साझेदार मंत्रालयों एवं संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे, जो भारत सरकार के समावेशी, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील तथा साक्ष्य-आधारित आदिवासी स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने के उच्चतम स्तर के संकल्प को प्रतिबिंबित करेंगे।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आदिवासी कार्य मंत्रालय तथा ICMR-क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (RMRC), भुवनेश्वर के बीच भारत का पहला राष्ट्रीय आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला है। – भारत आदिवासी स्वास्थ्य वेधशाला (B-THO) की स्थापना के लिए प्रोजेक्ट दृष्टि के तहत एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया जायेगा ।

यह ऐतिहासिक सहयोग देश के आदिवासी जिलों में जनजाति-विशिष्ट स्वास्थ्य निगरानी, कार्यान्वयन अनुसंधान तथा अनुसंधान-प्रेरित रोग उन्मूलन पहलों को संस्थागत बनाएगा, जो आदिवासी-विशिष्ट स्वास्थ्य आंकड़ों, विश्लेषण तथा नीति साक्ष्यों में लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय कमी को भी दूर करेगा।

गौरतलब है कई वर्षों से, आदिवासी कार्य मंत्रालय राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, क्षय रोग, कुष्ठ रोग तथा मलेरिया के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ  आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार तथा प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी महा न्याय अभियान (PM JANMAN) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) सहित कई प्रमुख प्रयासों  जैसे केंद्रित हस्तक्षेपों के माध्यम से आदिवासी स्वास्थ्य परिणामों को बढ़ावा देने में एक प्रमुख नोडल मंत्रालय के रूप में उभरा है।

इन निरंतर प्रयासों ने मंत्रालय को आदिवासी तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) क्षेत्रों में स्वास्थ्य असमानताओं को दूर करने के अग्रिम मोर्चे पर स्थापित किया  है।

क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद्, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (नई दिल्ली तथा जोधपुर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, आयुष मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मजबूत तकनीकी एवं ज्ञान साझेदारियों के साथ किया जा रहा है।

 ये सहयोग आदिवासी मंत्रालय के उन प्रयासों के प्रति संकल्पबद्धता को दर्शाता है जिसमें वह घरेलू परंपरागत ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बीच एक समुचित संयोजन स्थापित कर उपेक्षित आदिवासी इलाकों में सतत समावेशी स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।

ICMR-RMRC के साथ समझौता ज्ञापन एक सुरक्षित डिजिटल आदिवासी स्वास्थ्य निगरानी मंच के विकास को सुगम बनाएगा, जिसमें डैशबोर्ड, जीआईएस-सक्षम विश्लेषण तथा आवधिक आदिवासी स्वास्थ्य उत्पाद शामिल होंगे। यह भारत आदिवासी परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (BTFHS) तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अनुरूप रोग-विशिष्ट कार्यान्वयन अनुसंधान के प्रसार को भी सक्षम बनाएगा। इसके अतिरिक्त, यह सहयोग राज्य एवं जिला स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता निर्माण का समर्थन करेगा, साथ ही आदिवासी वैद्यों के लिए संवेदीकरण तथा संदर्भन-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम तथा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर आदिवासी विकास में एक महत्वपूर्ण तथा अभूतपूर्व कदम का प्रतीक हैं। पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण से आगे बढ़ते हुए, यह पहल संरचित क्षमता निर्माण, नैतिक सुरक्षा उपायों, संस्थागत संपर्कों तथा आंकड़ा-प्रेरित कार्रवाई पर केंद्रित है। यह आदिवासी कार्य मंत्रालय के स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों तथा आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचों के बीच तालमेल स्थापित करने के संकल्प को रेखांकित करता है, जिसका उद्देश्य देश के सबसे वंचित आदिवासी क्षेत्रों में सतत स्वास्थ्य परिणाम प्रदान करना है।

 

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पीके/ केसी/ एमएम / डीए


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