आयुष
azadi ka amrit mahotsav

यूनानी चिकित्सा पद्धति का संवर्धन

प्रविष्टि तिथि: 02 DEC 2025 9:50PM by PIB Delhi

वर्तमान में देश में कुल 57 यूनानी शैक्षणिक संस्थान कार्यरत हैं। इन शैक्षणिक संस्थानों की राज्य-वार सूची अनुलग्नक-I में संलग्न है।

आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की केंद्र प्रायोजित योजना को राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के माध्यम से लागू कर रहा है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यूनानी सहित आयुष इकाइयों की स्थापना, नए यूनानी औषधालयों की स्थापना, यूनानी औषधालयों/अस्पतालों के उन्नयन और यूनानी स्वास्थ्य संस्‍थानों को दवाओं की आपूर्ति के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों को समर्थन दे रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न भागों में यूनानी चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है। तदनुसार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारें एनएएम दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार, राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) के माध्यम से उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करके वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

इसके अलावा, आयुष मंत्रालय ने यूनानी चिकित्सा प्रणाली में शिक्षा और अनुसंधान के लिए नई दिल्‍ली में केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरएम) और बेंगलुरु में राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम) की स्थापना की है, जिसमें नई दवाओं का विकास और वैज्ञानिक आधार पर नैदानिक ​​परीक्षण करना शामिल है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 200 बिस्तरों वाले अस्पताल सहित राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान का एक सेटेलाइट संस्थान भी  स्थापित किया गया है। सीसीआरयूएम के तहत देश भर में कुल 24 संस्थान/केंद्र/इकाइयाँ भी कार्यरत हैं, जिनका राज्य-वार विवरण अनुलग्नक-II में दिया गया है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का विवरण निम्नलिखित है:

आयुष मंत्रालय आयुर्ज्ञान योजना नामक एक केंद्रीय क्षेत्र योजना का कार्यान्वयन करता है, जिसका उद्देश्य एक्‍सट्राम्‍युरल अनुसंधान गतिविधियों एवं शिक्षा के माध्‍यम से यूनानी सहित आयुष प्रणालियों में अनुसंधान एवं नवाचार को समर्थन देना है। इसके अंगर्तत शैक्षणिक गतिविधियां, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण आदि किए जाते हैं। इस योजना के योजना के तीन घटक हैं: (i) आयुष में क्षमता निर्माण एवं सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई), (ii) आयुष में अनुसंधान एवं नवाचार और (iii) आयुर्वेद जीवविज्ञान एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान (एबीआईएचआर)।

आयुष मंत्रालय आयुर्स्वास्थ्य योजना नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना को लागू करता है, जिसका उद्देश्य प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार सहित  आयुष पेशेवरों की दक्षताओं को सुदृढ़ करने हेतु संस्‍थागत कार्यों और सुविधाओं की स्थापना एवं उन्नयन के लिए रचनात्मक एवं नवोन्मेषी प्रस्तावों को समर्थन देना है। इस योजना का एक प्रमुख घटक उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) है, जिसके माध्यम से यूनानी सहित आयुष का राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संवर्धन किया जाता है।

आयुष मंत्रालय आयुष में सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) संवर्धन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना का भी कार्यान्वयन करता है, जिसका उद्देश्य यूनानी चिकित्सा पद्धति सहित आयुष के बारे में जागरूकता पैदा करना है। इस योजना का लक्ष्य देश भर में आबादी के सभी वर्गों तक पहुंचना है। इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय/राज्य आरोग्य मेलों, योग उत्सवों, आयुर्वेद पर्वों आदि के आयोजन के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मंत्रालय यूनानी सहित आयुष पद्धतियों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मल्टीमीडिया और प्रिंट मीडिया अभियान भी चलाता है।

आयुष मंत्रालय ने आयुष चिकित्सा प्रणाली के वैश्विक प्रचार और मान्यता के लिए आयुष में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की योजना नामक एक केंद्रीय क्षेत्र योजना विकसित की है। इस योजना के तहत मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुष अनुसंधान, उत्पादों और सेवाओं, शिक्षाविदों आदि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न हितधारकों को सहायता प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय ने गुजरात के जामनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र स्थापित हेतु समर्थन प्रदान किया है। यह केंद्र साक्ष्य एवं अधिगम, डेटा एवं विश्लेषण, सततता एवं समानता तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी पर रणनीतिक रूप से केंदित है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य एवं सतत विकास में पारंपरिक चिकित्सा के योगदान को अधिकतम किया जा सके। दूसरा डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस शिखर सम्मेलन का विषय होगा "संतुलन की बहाली: स्वास्थ्य एवं कल्याण का विज्ञान और अभ्यास", जिसमें जैव विविधता संरक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इसके अलावा, यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सीसीआरयूएम देश के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधान पहलों में भी संलग्न है। इन पहलों में प्री-क्लिनिकल ​​एवं क्लिनिकल​ ​​अनुसंधान, औषधि मानकीकरण अनुसंधान, मौलिक अनुसंधान, लिटरेरी अनुसंधान, औषधीय पौधों का सर्वेक्षण एवं संवर्धन शामिल हैं। अनुसंधान गतिविधियों का विवरण निम्‍लिखित है:

  • चल रही नैदानिक ​​सत्यापन परियोजनाएं: 76

  • चल रहे यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण (आरसीटी): 17

  • इंट्रा-म्यूरल रिसर्च (आईएमआर) योजना के अंतर्गत चल रही परियोजनाएं: 14

  • भारतीय पेटेंट कार्यालय (आईपीओ) द्वारा प्रदत्त पेटेंट: 19

  • शोध पत्र प्रकाशित: 3250

सीसीआरयूएम ने 11 और 12 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत में "एकीकृत स्वास्थ्य समाधानों के लिए यूनानी चिकित्सा में नवाचार – एक आगे का रास्ता" विषय पर यूनानी दिवस 2025 और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां:

  • 8 सीसीआरयूएम प्रकाशनों का विमोचन

  • 1 टीज़र और 3 वीडियो का लॉन्च

  • यूनानी आहार की शुरुआत- तल्बीना कुकीज़, तल्बीना फ्लेक्स, तल्बीना इंस्टेंट दलिया और फोर्टिफाइड जौ का पानी।

  • सीसीआरयूएम द्वारा विकसित पेटेंट प्रौद्योगिकी का उद्योग जगत को हस्तांतरण

  • सीसीआरयूएम परिधीय संस्थानों को एनएबीएच और एनएबीएल प्रत्यायन प्रमाण पत्र प्रदान करना

  • सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान करना

  • यूनानी चिकित्सा में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रख्यात हकीमों को सम्‍मानित करना

  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला संस्थान को सम्‍मानित करना

  • सम्मेलन की मुख्य विशेषताएं विदेशी प्रतिनिधियों के साथ पैनल चर्चा, 4 मुख्य भाषण तथा प्रतिष्ठित संगठनों एवं संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा 9 वैज्ञानिक सत्र शामिल थे। इसके अतिरिक्‍त, यूनानी एवं हर्बल औषधि क्षेत्र में नवाचारों को प्रदर्शित करने हेतु वैज्ञानिक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।

इनके अलावा, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से, एनसीआईएसएम द्वारा स्नातक छात्रों में अनुसंधान अभिरूचित को प्रोत्‍साहित करने हेतु यूनानी अनुसंधान छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत दो माह की अविध के लिए 25,000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

अनुलग्‍नक 

केन्‍द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने ये जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित में दी।

****

पीके/केसी/आईएम/ओपी


(रिलीज़ आईडी: 2210526) आगंतुक पटल : 45
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English