पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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सीएक्यूएम ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा GRAP के चरण-IV के अनुसार 5-सूत्रीय कार्ययोजना तुरंत प्रभाव से लागू की


वायु की कम गति और प्रदूषकों के प्रसार में कमी सहित प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों का बने रहना, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्‍यूआई) के अचानक बढ़ने के प्रमुख कारण हैं

प्रविष्टि तिथि: 13 DEC 2025 10:22PM by PIB Delhi

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी दैनिक एक्‍यूआई  बुलेटिन के अनुसार, आज दिल्ली का दैनिक औसत एक्‍यूआई अपराह्न 4 बजे 431 दर्ज किया गया, जो आज ही शाम 6 बजे बढ़कर 441 हो गया। दिल्ली-एनसीआर में प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण एक्‍यूआई  की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान की उप-समिति ने आज एक आपात बैठक बुलाई।

उप-समिति ने बैठक के दौरान क्षेत्र में समग्र वायु गुणवत्ता परिदृश्य के साथ-साथ मौसम संबंधी परिस्थितियों और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के पूर्वानुमानों की आईएमडी/आईआईटीएम द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी की व्यापक समीक्षा करते हुए देखा कि आज अपराह्न 4 बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 431 दर्ज किया गया, जो धीरे-धीरे और बढ़ने लगा। निरंतर प्रतिकूल मौसमी और जलवायु परिस्थितियों के कारण आज अपराह्न 5 बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 436  पर पहुंचा, जो 6 बजे बढ़कर 441 हो गया।

इस अचानक वृद्धि का प्रमुख कारण उत्सर्जन नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा कमजोर पश्चिमी विक्षोभ है। वर्तमान मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण वायु की गति में उल्लेखनीय कमी आई है, जो कई बार शांत अवस्था में भी पहुँच जाती है, वायु की दिशा में पश्चिम से पूर्व की ओर परिवर्तन हुआ है तथा निचले वायुमंडल में नमी की मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई है। शीत ऋतु के दौरान ऐसी परिस्थितियाँ स्मॉग और कोहरे के निर्माण के लिए अनुकूल होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषक ठीक से तितर-बितर नहीं हो पाते और वे सतह के निकट फँस जाते हैं। इन प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता में अचानक गिरावट देखी गई है।

क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की वर्तमान प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए तथा वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के उद्देश्य से, उप-समिति ने आज मौजूदा जीआरएपी के चरण-IV — ‘गंभीर+’ वायु गुणवत्ता (दिल्ली का एक्‍यूआई > 450) — के अंतर्गत परिकल्पित सभी कार्यवाहियों को पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मौजूदा जीआरएपी के चरण-I, II एवं III के अंतर्गत पहले से लागू निवारक/प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों के अतिरिक्त है। जीआरएपी के अंतर्गत उपायों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार विभिन्न एजेंसियों तथा एनसीआर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (पीसीबी) एवं डीपीसीसी को भी इस अवधि के दौरान, चरण-I, II एवं III के अंतर्गत पहले से लागू सभी कार्यवाहियों के अतिरिक्त, मौजूदा जीआरएपी की चरण-IV अनुसूची के अंतर्गत निर्धारित कार्यवाहियों के कड़े कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मौजूदा जीआरएपी के चरण-IV के अनुसार 5-सूत्रीय कार्ययोजना पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू है। इस 5-सूत्रीय कार्ययोजना में विभिन्न एजेंसियों तथा एनसीआर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और डीपीसीसी द्वारा लागू/सुनिश्चित किए जाने वाले कदम शामिल हैं। ये कदम इस प्रकार हैं:

1. दिल्ली में बीएस-IV ट्रक यातायात के प्रवेश पर रोक (आवश्यक वस्तुओं का परिवहन अथवा आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने वाले ट्रकों को छोड़कर)।

हालांकि सभी एलएनजी/सीएनजी/इलेक्ट्रिक/बीएस-VI डीज़ल ट्रकों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी।

2. आवश्यक वस्तुओं का परिवहन अथवा आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने वाले वाहनों को छोड़कर, दिल्ली में दिल्ली-पंजीकृत डीज़ल चालित बीएस-IV एवं उससे नीचे की श्रेणी के भारी माल वाहकों (एचजीवी) के संचालन पर सख्त प्रतिबंध लागू किया जाएगा।

3. जीआरएपी के चरण-III के अनुसार, राजमार्ग, सड़कों, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, विद्युत पारेषण, पाइपलाइन, दूरसंचार आदि जैसी रेखीय सार्वजनिक परियोजनाओं सहित, निर्माण एवं विध्वंस (सी एण्‍ड डी) गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

4.

i. एनसीआर की राज्य सरकारों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) को एनसीटी दिल्ली के क्षेत्राधिकार तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जिलों में कक्षा VI से IX तथा XI तक के विद्यार्थियों के लिए विद्यालयों में कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से “हाइब्रिड” मोड, अर्थात् भौतिक एवं ऑनलाइन (जहाँ ऑनलाइन माध्यम संभव हो), दोनों माध्यमों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ii. एनसीआर की राज्य सरकारें एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों के लिए उपर्युक्त “हाइब्रिड” मोड में कक्षाओं के संचालन पर विचार कर सकती हैं।

टिप्‍पणी: सूचना: जहाँ भी ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प उपलब्ध होगा, उसका उपयोग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के विवेक पर निर्भर होगा। 

5. राज्य सरकारें अतिरिक्त आपात उपायों पर विचार कर सकती हैं, जैसे कॉलेज/शैक्षिक संस्थानों को बंद करना, गैर-आपातकालीन व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करना, वाहनों के परिचालन की अनुमति पंजीकरण संख्या के आधार पर विषम-सम संख्या प्रणाली पर देना आदि।

इसके अतिरिक्त, सीएक्यूएम एनसीआर के नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे चरण-I, चरण-II और चरण-III के नागरिक चार्टर के साथ-साथ, जीआरएपी के तहत नागरिक चार्टर का पालन करें और क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को बनाए रखने और सुधारने के उद्देश्य से जीआरएपी उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग दें। नागरिकों को निम्नलिखित सलाह दी जाती है:

बच्चे, बुजुर्ग और श्वसन, हृदय, मस्तिष्क रक्त वाहिनी या अन्य दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्‍त व्यक्ति यथासंभव बाहरी गतिविधियों से बचें और घर के अंदर ही रहें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो उन्हें मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।

जीआरएपी की वर्तमान अनुसूची आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है और इसे https://caqm.nic.in पर एक्सेस किया जा सकता है।

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पीके/केसी/पीके


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