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सरदार@150 पदयात्रा ने 115 किलोमीटर की दूरी तय की; सातवें दिन भारी जनभागीदारी दिखी

 
“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल का अखंड भारत का दृष्टिकोण राष्ट्र का मार्गदर्शन कर रहा है”: सरदार@150 पदयात्रा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

 “आज का मजबूत और एकजुट भारत सरदार पटेल के संकल्प की ही देन है”: सरदार@150 स्मृति समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया

 “एक भारत श्रेष्ठ भारत सरदार पटेल के राष्ट्रीय संकल्प की परिणति है”: पुष्कर सिंह धामी

 “सरदार@150 पदयात्रा एक राष्ट्रव्यापी विचारयात्रा बन गई है, जो भारत के लौह पुरुष में लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है” - केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा

प्रविष्टि तिथि: 02 DEC 2025 4:36PM by PIB Delhi

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय अपने माई भारत मंच के जरिए सरदार@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा का आयोजन कर रहा है, यात्रा आज सातवें दिन भी उत्साहपूर्वक आगे बढ़ती रही और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के राष्ट्रव्यापी स्मरण को आगे बढ़ाया।

आज 7वें दिन भी यह पदयात्रा पूरे उत्साह के साथ जारी है। यह पदयात्रा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम मनाने के प्रयासों को आगे बढ़ा रही है। पिछले सप्ताह पदयात्रा के दौरान वृक्षारोपण गतिविधियां, योग शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवाओं की भागीदारी, सरदार गाथा, ग्राम सभाएं, स्वच्छता अभियान और व्यापक सामुदायिक सहभागिता देखने को मिली तथा पहले छह दिनों में इसने 93 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है। आज 21.5 किलोमीटर की दूरी तय करने के साथ, पदयात्रा की कुल दूरी अब 115 किलोमीटर तक पहुंच गई है, जो जन-भागीदारी की अभूतपूर्व भावना के साथ आगे बढ़ रही है।

 

सातवें दिन की शुरुआत स्मृति वन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पेड़ लगाने की गतिविधि के साथ हुई, जिसमें स्वयंसेवकों, पदयात्रियों, छात्रों और स्थानीय निवासियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम में वृक्षारोपण, पदयात्रा, सरदार सभा और ग्राम सभा सहित विभिन्न चरणों में कई प्रमुख गणमान्य लोग शामिल हुए। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे आज सुबह पदयात्रा में शामिल हुईं, इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी पदयात्रियों के साथ चले और युवाओं से बातचीत की।

 

दिन का मुख्य आकर्षण वडोदरा के साधली में आयोजित सरदार गाथा थी, जिसका विषय था “विरासत और पुनरुद्धार – शाश्वत सरदार।” इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे की विशिष्ट उपस्थिति रही।

सरदार गाथा की शुरुआत केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करने और पदयात्रा की प्रगति पर रोशनी डालने के साथ की। उन्होंने कहा कि केवल सात दिनों में ही यह पदयात्रा एक सच्ची विचार-यात्रा में बदल गई है, जिसमें नागरिकों, विशेषकर किसानों ने रास्ते में पदयात्रियों को स्थानीय उत्पाद दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल दो साल तक चलने वाले देशव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम का हिस्सा है, जो सरदार पटेल की विरासत के प्रति नागरिकों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता है।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री पुष्कर सिंह धामी ने सरदार पटेल को हार्दिक श्रद्धांजलि दी और याद किया कि कैसे महान नेता ने राष्ट्र को एकजुट करने और रियासतों के एकीकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सरदार पटेल के एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपने को पूरा कर रहा है और उन्होंने नागरिकों से इस राष्ट्रीय संकल्प में योगदान देते रहने की अपील की।

श्री गुलाब चंद कटारिया ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल ने लाखों लोगों में देशभक्ति और एकता की भावना का संचार किया और इस बात पर जोर दिया कि आज भारत में जो एकता है—और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का अस्तित्व—यह सब सरदार पटेल के निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि आज के जागरूक और देशभक्त युवा भारत को दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक बनाएंगे।

श्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में हर दिन 17-18 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए पदयात्रियों की प्रशंसा की और इसे सरदार पटेल के आदर्शों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पदयात्रा भारत की एकता के उज्ज्वल अध्यायों को पुनर्जीवित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण का हिस्सा है। श्री सिंह ने कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में सरदार पटेल के योगदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा और उन्होंने इस राजनेता को नेताओं की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बताया।

रक्षा मंत्री ने बारदोली सत्याग्रह में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया, जहां महिलाओं ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी थी। उन्होंने भूमि सुधार समेत किसानों के लिए पटेल के परिवर्तनकारी प्रयासों को रेखांकित किया और गांधीजी के दृष्टिकोण को व्यवहार में लागू करने में पटेल के अभूतपूर्व योगदान को स्वीकार किया।

रक्षा मंत्री ने बताया कि कैसे सरदार पटेल ने भारत की मजबूत सिविल सेवाओं की नींव रखी, जिसे अक्सर शासन का “लौह ढांचा” कहा जाता है। श्री सिंह ने यह भी बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था 2014 से पहले 11वें स्थान से बढ़कर आज चौथे स्थान पर पहुंच गई है और सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक एकता के बल पर आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने दोहराया कि पटेल की प्रेरणा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व से सशक्त होकर भारत तेजी से विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री के संबोधन के बाद, आत्मनिर्भरता की शपथ भी ग्रहण की गई।

जैसे-जैसे पदयात्रा आगे बढ़ी, सातवें दिन निम्नलिखित मार्ग तय किए गए:

कायावरोहण साधली रोड टिम्बरवा बिरसा मुंडा सर्कल सधाली साधली बस स्टैंड सुरासामल शिनोर सिनोर एपीएमसी।

शाम को, शिनोर एपीएमसी में एक शानदार ग्राम सभा होगी, जिसमें नृत्य नाटिका, स्थानीय दयरो तथा “सरदार एवं गृह मंत्रालय – व्यवस्था के वास्तुकार” और “सरदार एवं प्रशासन – भारत का लौह ढांचा” थीम पर आधारित प्रदर्शनी शामिल होगी।

दिन के कार्यक्रम में मार्ग में बड़े पैमाने पर व्यापक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सामुदायिक समूहों के साथ संवाद और सरदार@150 आंदोलन की एकता और भावना की थीम पर आधारित कथावाचन सत्र भी शामिल हैं। पदयात्रा एकता नगर की ओर बढ़ रही है, वहीं मजबूत सामुदायिक भागीदारी, प्रेरक नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता की नयी भावना के साथ सातवें दिन ने सरदार पटेल के संदेश को गांवों से राष्ट्रीय चेतना तक ले जाने के सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि की है।

 

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पीके/केसी/एसएस/डीए


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