स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया की विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय समिति के 78वें सत्र में स्वस्थ वृद्धावस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई


आयुष्मान भारत पीएमजेएवाई में 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों के को शामिल किया गया है, जिससे 6 करोड़ बुजुर्गों को अस्पताल में कैशलेस देखभाल मिलेगी : श्रीमती अनुप्रिया पटेल

भारत ने प्राथमिक स्वास्थ्य और दीर्घकालिक देखभाल का एकीकरण मज़बूत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 16 OCT 2025 5:14PM by PIB Delhi

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया सिंह पटेल ने 13-15 अक्टूबर, 2025 के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया की विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय समिति के कोलंबो में आयोजित 78वें सत्र के मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान, विचार-विमर्श "मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से स्वस्थ वृद्धावस्था" विषय पर केन्‍द्रित था।

भारत ने बुजुर्गों के लिए एक व्यापक और जन-केन्‍द्रित प्रणाली पर आधारित, मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के लिए अपनी निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

श्रीमती पटेल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 153 मिलियन नागरिकों के साथ, भारत एक बड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तन का सामना कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि बुजुर्गों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समान, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हों, सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

राष्ट्रीय वृद्ध स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (एनपीएचसीई), जो अब 92 प्रतिशत जिलों में चल रहा है, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवारक, प्रोत्साहन, उपचारात्मक और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करने के भारत के प्रयासों की आधारशिला है। यह कार्यक्रम परिवारों और समुदायों में सम्मानजनक वृद्धावस्था को सक्षम बनाने के लिए संरचित देखभालकर्ता प्रशिक्षण के साथ-साथ घर, समुदाय और सुविधा-आधारित हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है।

वृद्धजनों की वित्तीय सुरक्षा को और मज़बूत करते हुए, आयुष्मान भारत की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) का विस्तार 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को, चाहे उनकी आय कुछ भी हो, इसके अंतर्गत लाने के लिए किया गया है। इससे 4.5 करोड़ परिवारों के लगभग 6 करोड़ वृद्धजन लाभान्वित होंगे, और उन्हें सार्वजनिक एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस अस्पताल देखभाल प्रदान की जाएगी।

केन्‍द्रीय मंत्री ने दो राष्ट्रीय वृद्धावस्था केन्‍द्रों (एनसीए) की स्थापना पर भी प्रकाश डाला—एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में और दूसरा मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नई और देश भर में 17 क्षेत्रीय वृद्धावस्था केन्‍द्र स्थापित किए गए हैं, जो नैदानिक ​​उत्कृष्टता, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नीति मार्गदर्शन केन्‍द्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, हाल ही में शुरू किए गए 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान', जिसका अर्थ है "स्वस्थ महिलाएँ, सशक्त परिवार", के दौरान लाखों वृद्ध व्यक्तियों, विशेषकर वृद्ध महिलाओं की गैर-संचारी और आयु-संबंधी बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर के लिए जाँच की गई है।

क्षेत्रीय गोलमेज सम्मेलन में, भारत ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और दीर्घकालिक देखभाल (पीएचसी-एलटीसी) का एकीकरण मज़बूत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। भारत ने सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा:

  • पीएचसी-एलटीसी एकीकरण पर ज्ञान साझाकरण और नवाचार के लिए एक क्षेत्रीय मंच की स्थापना;
  • विभिन्न देशों में वृद्धावस्था और देखभाल करने वाले कार्यबल के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करना; और
  • वृद्धों के लिए स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक तकनीकी नवाचारों और स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देना।

संयुक्त राष्ट्र के स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (2021-2030) के साथ भारत के जुड़ाव की पुष्टि करते हुए, केन्‍द्रीय मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि वृद्धावस्था को समावेशी विकास और सामाजिक परिवर्तन के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' की कल्‍पना से प्रेरित होकर, भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वृद्धावस्था सहित जीवन का हर चरण सम्मान, सुरक्षा और देखभाल के साथ जिया जाए।"

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पीके/केसी/केपी/डीए


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