जल शक्ति मंत्रालय
सुजलम भारत विजन पर विभागीय शिखर सम्मेलन - व्यवहार परिवर्तन के लिए सामुदायिक और संस्थागत सहभागिता पर विषयगत कार्यशाला
प्रविष्टि तिथि:
01 OCT 2025 7:59PM by PIB Delhi
जल शक्ति मंत्रालय नदियों के पुनर्जीवन, ग्रे वाटर के पुन: उपयोग; कुशल जल प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग की दिशा में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सुजलम भारत के विजन पर विभागीय शिखर सम्मेलन को आगे बढ़ाने के लिए नोडल मंत्रालय है। इसी क्रम में, आज "व्यवहार परिवर्तन के लिए सामुदायिक और संस्थागत जुड़ाव" पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया , जिसमें देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने भाग लिया। सत्र की शुरुआत श्री प्रतुल सक्सेना, सदस्य सचिव, सीजीडब्ल्यूए और परियोजना निदेशक, अटल भूजल योजना के स्वागत भाषण से हुई। अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में, राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, सुश्री अर्चना वर्मा ने स्पष्ट रूप से बताया कि इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर आगे की कार्रवाई के लिए राज्यों से जमीनी स्तर के मुद्दों, चुनौतियों और नीतिगत बाधाओं के बारे में जानकारी एकत्र करना है।

कार्यशाला के नोडल अधिकारी, श्री प्रतुल सक्सेना ने "व्यवहार परिवर्तन के लिए सामुदायिक एवं संस्थागत सहभागिता" विषय पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने इसकी अवधारणा, प्रमुख मुद्दों, चुनौतियों और आगे के मार्ग को रेखांकित किया। उन्होंने भारत में उन महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी प्रकाश डाला जो जल प्रबंधन के लिए सामुदायिक एवं संस्थागत सहभागिता को अपनाती हैं। इसके बाद मेघालय, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना की राज्य-विशिष्ट प्रस्तुतियाँ दीं गईं, साथ ही एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ), चेन्नई की ओर से भी एक प्रस्तुति दी गई।
राज्यों और विशेषज्ञ संगठन द्वारा दी गई प्रस्तुतियों में सामुदायिक और संस्थागत सहभागिता के माध्यम से कुशल जल संरक्षण और प्रबंधन के सर्वोत्तम तरीकों और नवीन दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया। मेघालय ने पारंपरिक और आधुनिक प्रथाओं से युक्त ग्राम परिषद के माध्यम से भागीदारी योजना का प्रदर्शन किया। गुजरात ने समान सिंचाई के लिए जल उपयोगकर्ता संघों और सचिव सलाहकार समिति को प्रस्तुत किया, जबकि मेहसाणा की महिला किसानों ने साझा किया कि कैसे समुदाय के नेतृत्व वाले प्रयासों ने स्थानीय जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया। आंध्र प्रदेश ने जल शक्ति केंद्रों और मैजिक ड्रेन पहल पर जोर दिया। राज्य ने एक सतत योजना चक्र बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर की योजना (2 अक्टूबर को प्रतिवर्ष शुरू) को 22 मार्च (विश्व जल दिवस) को जल बजट के साथ जोड़ने का सुझाव दिया। कर्नाटक ने स्थानीय निकायों को मजबूत करने और क्षमता निर्माण और सामुदायिक लामबंदी के लिए गैर सरकारी संगठनों को शामिल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। राज्य ने आग्रह किया कि सरकार को समुदाय के नेतृत्व वाली योजनाओं में गैर सरकारी संगठनों को प्रोत्साहित करना चाहिए एमएसएसआरएफ की कार्यकारी निदेशक सुश्री रेंगालक्ष्मी ने प्रभावी अभिसरण, मनरेगा निधियों के विवेकपूर्ण उपयोग और भूजल पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर ज़ोर दिया। उन्होंने उन प्रभावी कारकों पर भी प्रकाश डाला जो सतत जल प्रबंधन में व्यवहार परिवर्तन के लिए सामुदायिक और संस्थागत सहभागिता में मददगार हो सकते हैं।

गुजरात के मेहसाणा की महिला नेता मीनाक्षी बेन पंचाल और लीलाबेन पटेल ने अपने क्षेत्र में घटते भूजल स्तर और पानी की कमी से जुड़ी समस्याओं के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे जल निगरानी, जल परीक्षण और प्रबंधन के लिए महिलाओं को संगठित करने से भूजल की कमी को दूर करने में मदद मिली।

कार्यशाला का समापन डॉ. सुदर्शन साहू द्वारा मुख्य निष्कर्षों का सारांश प्रस्तुत करने और प्रतिभागियों को उनकी अंतर्दृष्टि और योगदान के लिए धन्यवाद देने के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सुजलम भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में सामुदायिक संस्थानों, जमीनी स्तर के नेतृत्व और राज्य-संचालित नवाचारों के महत्व की पुष्टि की ।
पीके/केसी/पीएस
(रिलीज़ आईडी: 2174049)
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