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केंद्रीय मत्स्य सचिव ने कहा कि भारत जल्द ही मछली पकड़ने की दूरस्थ निगरानी के लिए ई-ऑब्जर्वर प्रणाली लेकर आएगा
‘विज्ञान-समर्थित विश्वसनीय डेटा गैर-टैरिफ बाधाओं एवं आरोपों के खिलाफ भारत का सबसे मजबूत बचाव है’
कोच्चि में प्रजातियों की पहचान पर अंतर्राष्ट्रीय आईओटीसी-एफएसआई कार्यशाला शुरू हुई
प्रविष्टि तिथि:
29 SEP 2025 4:42PM by PIB Delhi
केरल के कोच्चि में आज मत्स्य पालन डेटा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के भारत के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि सरकार जल्द ही समुद्री मछली पकड़ने की दूरस्थ निगरानी और रिकॉर्डिंग के लिए एक ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक पर्यवेक्षक प्रणाली लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार के जहाजों में मछली पकड़ने के कार्यों का अवलोकन करके स्टॉक आकलन एवं प्रबंधन के लिए सटीक वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराना है।

मत्स्य पालन सचिव सोमवार को यहां हिंद महासागर टूना आयोग (आईओटीसी) और भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) द्वारा प्रजातियों की पहचान पर आयोजित पांच दिवसीय वैश्विक कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे।

टूना मछली और टूना जैसी मछलियों के पकड़े जाने और मछली पकड़ने की गतिविधियों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कुशल डेटा संग्रह, आईओटीसी दिशा-निर्देशों के अनुसार इन मत्स्य पालन के प्रबंधन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें पर्यवेक्षक कवरेज और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अनिवार्य है। ई-ऑब्जर्वर को मत्स्य मंत्रालय के अंतर्गत एफएसआई द्वारा विकसित किया जा रहा है।

सचिव ने कहा कि संरक्षण के एक साधन के अलावा, विज्ञान-समर्थित विश्वसनीय आंकड़े गैर-शुल्क बाधाओं और आरोपों के विरुद्ध भारत का सबसे मज़बूत बचाव हैं। डॉ. लिखी ने आगे कहा, "यह वह पासपोर्ट है जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक हमारी पहुंच सुनिश्चित करता है और हमारे मछुआरों और निर्यातकों को निर्यात बाज़ारों में समान अवसर प्रदान करके व्यापारिक चुनौतियों से बचाता है।"
सचिव ने इस दिशा में सरकार के मध्यवर्तन प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के बारे में कहा कि लगभग 36000 मछली पकड़ने वाले जहाजों को वास्तविक समय निगरानी के लिए ट्रांसपोंडर से सुसज्जित किया गया है।
डॉ. लिखी ने कहा कि टूना, टूना जैसी प्रजातियां और पेलेगिक शार्क अत्यधिक प्रवासी जीव हैं, भारत डेटा संग्रह एवं प्रबंधन में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए हाथ मिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश इस क्षेत्र पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका की सुरक्षा करते हुए अपनी मछली पालन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए कदम उठाएगा।
वैश्विक कोटा प्रणाली पर पुनर्विचार का आह्वान
वाणिज्यिक टूना मछली पकड़ने के लिए मौजूदा वैश्विक कोटा आवंटन प्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए, केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने भारत जैसे विकासशील देशों के लिए उच्च एवं निष्पक्ष कोटा सुनिश्चित करने हेतु इस प्रणाली में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने टूना निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक सुविकसित कोल्ड चेन अवसंरचना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे टूना की गुणवत्ता बनी रहेगी, खराब होने की संभावना कम होगी और वैश्विक बाजार में भारतीय टूना की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
आईओटीसी सचिवालय सदस्य लॉरेन नेल्सन ने कहा, "यह कार्यशाला भारत के टूना एवं संबद्ध प्रजातियों के मत्स्य पालन में विश्वसनीय स्टॉक आकलन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा संग्रह और प्रजातियों की पहचान की महत्वपूर्ण आवश्यकता को संबोधित करेगी।"
कार्यशाला में जापान, फ्रांस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका सहित 12 देशों के मत्स्य विशेषज्ञ और अधिकारी तथा भारत के विभिन्न तटीय राज्यों के 18 अधिकारी भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर समुद्री जीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (सीएमएलआरई) के प्रमुख डॉ. आर एस महेशकुमार, एफएसआई के महानिदेशक डॉ. श्रीनाथ के आर और क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सिजो वर्गीस ने भी अपने विचारों को साझा किया।
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पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2172897)
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