नीति आयोग
अटल नवाचार मिशन के सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम से जम्मू-कश्मीर में 500 नई अटल टिंकरिंग लैब्स का मार्ग प्रशस्त हुआ
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कश्मीर में एटीएल सारथी और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम का शुभारंभ किया
उपराज्यपाल सिन्हा ने विद्यार्थियों के नेतृत्व वाले नवाचार की सराहना की
प्रविष्टि तिथि:
25 SEP 2025 9:15PM by PIB Delhi
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत सरकार के नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन (एआईएम) ने कश्मीर विश्वविद्यालय के सहयोग से आज कश्मीर विश्वविद्यालय के कन्वोकेशन कॉम्प्लेक्स में एटीएल सारथी और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह ऐतिहासिक पहल, 500 नई अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) की घोषणा के साथ, केंद्र शासित प्रदेश में नवाचार को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल एवं कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मनोज सिन्हा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की माननीय शिक्षा मंत्री सुश्री सकीना मसूद (इत्तू), नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक डॉ. दीपक बागला और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में कश्मीर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के दिग्गजों, इनक्यूबेटरों, शिक्षकों और 2000 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत के लक्ष्य 2047 का पथप्रदर्शक बनने की क्षमता रखता है।
कश्मीर विश्वविद्यालय में नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन (एआईएम) के एटीएल सारथी और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था चौथे स्थान से तीसरे स्थान और उससे भी आगे बढ़ेगी, मूल्यवर्धन उन क्षेत्रों और संसाधनों से आएगा, जिन्हें अब तक कम उपयोग में लाया गया है, और जम्मू-कश्मीर दोनों ही मापदंडों पर खरा उतरता है। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद ही इस क्षेत्र को उचित महत्व मिलने लगा है और इस सरकार द्वारा शुरू किए गए अरोमा मिशन जैसी पहलों से हिमालय और नदियों के विशाल संसाधनों को नए अवसर मिले हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अगले दो दशकों में भारत की विकास गाथा में नवाचार पर आधारित अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरने की क्षमता मौजूद है।
श्रीनगर में एटीएल सारथी पहल के शुभारंभ की बधाई देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर को “दोहरा उत्सव” - भारत की विकास यात्रा में कश्मीर विश्वविद्यालय के जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा में शामिल करने के साधन बनने और इस सीमावर्ती केंद्र शासित प्रदेश में एआईएम के लिए अपने नवाचार नेटवर्क का विस्तार करने- का प्रतीक है।
मंत्री महोदय ने घोषणा की कि सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत, जम्मू-कश्मीर में 100 करोड़ रुपये के निवेश से 500 नई अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) स्थापित की जाएँगी, जो सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए स्वीकृत 2,500 लैब्स का सबसे बड़ा हिस्सा होंगी। उन्होंने कहा कि ये लैब्स स्कूली विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्याधुनिक उपकरणों से परिचित कराएँगी, जिससे वे कम उम्र में ही नवाचार करने में सक्षम होंगे।
वैश्विक मानकों और सार्वजनिक-निजी सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा, “जब तक हम निजी कंपनियों को शामिल करने का कोई तरीका नहीं अपनाते, हम विकास को बरकरार नहीं रख सकते। अंतरिक्ष अनुसंधान में इनस्पेस और जैव प्रौद्योगिकी में बीआईआरएसी जैसी पहलों ने दिखाया है कि संरचित सहयोग किस प्रकार सफल हो सकता है।”
जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने सभा को संबोधित करते हुए, समावेशी विकास के लिए नवाचार-संचालित शिक्षा की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “अटल टिंकरिंग लैब्स पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को सच्ची श्रद्धांजलि है। ये लैब्स हमारे युवा विद्यार्थियों को सशक्त बना रही हैं और उन्हें नई खोज और आत्म-विकास के साधन प्रदान कर रही हैं, साथ ही समस्या-समाधान जैसे कौशल भी सिखा रही हैं। भारत की 'अमृत पीढ़ी' की जिज्ञासा को बढ़ावा देते हुए, एटीएल लैब्स विकसित और आकांक्षी राष्ट्र की नींव रख रही हैं।”
उपराज्यपाल ने स्कूलों के स्तर पर अटल टिंकरिंग लैब्स द्वारा जम्मू-कश्मीर के नवाचार इकोसिस्टम में निरंतर हो रहे परिवर्तन पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि जम्मू, उधमपुर, राजौरी, कुलगाम, शोपियां, श्रीनगर और कई अन्य जिलों में विद्यार्थियों -नेतृत्व वाले नवाचार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस किया जा रहा है।
उपराज्यपाल ने सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से 500 अतिरिक्त अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करके ये अतिरिक्त लैब्स समावेशी नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
उपराज्यपाल ने जम्मू संभाग में अटल टिंकरिंग लैब्स की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये लैब्स क्षेत्र के युवाओं को कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय समस्याओं के प्रभावी समाधान तलाशने के व्यापक अवसर प्रदान करेंगी।
उपराज्यपाल ने कश्मीर विश्वविद्यालय से अटल टिंकरिंग लैब के शिक्षकों के लिए कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने, उनकी क्षमता को उजागर करने तथा रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक, दीपल बागला ने नवाचार को सभी के लिए सुलभ बनाने और अंतिम छोर तक प्रभाव सुनिश्चित करने के एआईएम के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के प्रतिभावान लोगों की प्रशंसा की और क्षेत्र में स्कूलों, विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच मज़बूत संबंध बनाने की एआईएम की प्रतिबद्धता दोहराई।
“अटल नवाचार मिशन, नवाचार को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू -कश्मीर, अपनी अपार प्रतिभा और अद्वितीय क्षमता के साथ एआईएम के सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के केंद्र में है। यहाँ के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और इनक्यूबेटरों के बीच सहयोग देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श बनेगा।“
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों नवोन्मेषकों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने वाली एक कॉफ़ी टेबल बुक का विमोचन किया गया, जिसके बाद एआईएम और कश्मीर विश्वविद्यालय के बीच एटीएल सारथी साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए। गणमान्य व्यक्तियों ने केंद्र शासित प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों की रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता को दर्शाने वाली शीर्ष 50 परियोजनाओं का अवलोकन और उनके साथ संवाद किया।
इसके अलावा, बोइंग इंडिया, अमेज़न इंडिया, पाई जैम फ़ाउंडेशन और लर्निंग लिंक्स फ़ाउंडेशन जैसे संगठनों ने स्कूल स्तर पर नवाचार को मज़बूत करने के लिए नए निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में अटल इनोवेशन मिशन द्वारा जम्मू -कश्मीर के इन्क्यूबेटरों की गोलमेज बैठक का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में उद्यमिता के लिए एक सहयोगात्मक रोडमैप तैयार करना था। इस गोलमेज बैठक ने संस्थागत संबंधों को मज़बूत करके, उद्यमियों को और अधिक प्रभावी सहायता प्रदान करने हेतु संयुक्त पहलों और संसाधनों को साझा करने का मार्ग प्रशस्त किया। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में इन्क्यूबेटरों का लोकल चैप्टर स्थापित करने, विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने, ज्ञान साझा करने और क्षेत्र की नवाचार प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक सामूहिक मंच तैयार करने के बारे में भी चर्चा हुई।
आयोजन का समापन परंपरा और नवाचार के मिश्रण की प्रतीक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत प्रदर्शनों के साथ हुआ, जो राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन में जम्मू-कश्मीर के अद्वितीय योगदान को परिभाषित करता है।
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पीके/केसी/आरके
(रिलीज़ आईडी: 2171537)
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