वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप की 96वीं बैठक में रेल और सड़क परियोजनाओं की समीक्षा की गई


मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक प्रभाव के लिए चार परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया

प्रविष्टि तिथि: 01 JUL 2025 8:02PM by PIB Delhi

रेलवे और सड़क परिवहन क्षेत्रों में प्रमुख बुनियादी ढांचा प्रस्तावों की समीक्षा के लिए आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) की 96वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस एनएमपी) के सिद्धांतों के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस अवसर पर कुल चार परियोजनाओं - रेल मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित तीन ब्राउनफील्ड रेलवे परियोजनाएं और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित एक ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के एकीकृत नियोजन, अंतिम-छोर तक कनेक्टिविटी तथा अंतर-मॉडल समन्वय के मुख्य उद्देश्यों के साथ उनके संरेखण के लिए किया गया था। एक बार परियोजनाओं के लागू होने के बाद से यात्रा के समय में कमी आने, रसद दक्षता को बढ़ावा देने और क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ उत्पन्न होने की आशा है।

रेल मंत्रालय (एमओआर)

  1. आसनगांव-कसारा चौथी लाइन

रेल मंत्रालय ने मध्य रेलवे के माध्यम से महाराष्ट्र के ठाणे जिले में आसनगांव और कसारा के बीच लगभग 34.97 किलोमीटर लंबी चौथी रेलवे लाइन के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना का उद्देश्य रेल क्षमता को बढ़ाना और मौजूदा कॉरिडोर पर भीड़भाड़ कम करना है, जो यात्री तथा माल ढुलाई दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस मार्ग में दो बड़े पुल, 129 छोटे पुल, एक रोड ओवरब्रिज (आरओबी) और छह रोड अंडरब्रिज (आरयूबी) शामिल हैं। यह खंड एचडीएन-2 कॉरिडोर का हिस्सा है और जेएनपीए (97 किमी), दिघी पोर्ट, जेएसडब्ल्यू डोलवी तथा अमेजन, फ्लिपकार्ट व अडाणी लॉजिस्टिक्स के वेयरहाउसिंग क्लस्टर सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की सेवा करता है।

  1. बख्तियारपुर से तिलैया के बीच दोहरीकरण

इस परियोजना में बिहार के पटना, नालंदा, गया और नवादा जिलों से होकर गुजरने वाली करनौती से राजगीर होते हुए तिलैया तक 103.528 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का दोहरीकरण शामिल है। यह संरेखण बख्तियारपुर, हरनौत, बिहार शरीफ, राजगीर और हिसुआ जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है। यह कॉरिडोर एसजेवीएन चौसा पावर प्लांट और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट को माल ढुलाई का समर्थन करता है। यह वर्तमान में 28.33 एमटीपीए संभालता है और वित्त वर्ष 2029-30 तक अतिरिक्त 26.02 एमटीपीए ले जाने का अनुमान है। इस परियोजना में 18 प्रमुख पुल, 284 छोटे पुल, चार आरओबी और 49 आरयूबी शामिल हैं।

  1. दिल्ली और अंबाला के बीच तीसरी तथा चौथी लाइन

प्रस्ताव में दिल्ली और अंबाला के बीच तीसरी तथा चौथी ब्रॉड-गेज लाइन का निर्माण शामिल है, जिसकी कुल लंबाई 193.60 किलोमीटर होगी। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और हरियाणा में सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला से होकर गुजरेगी। 33 स्टेशनों वाले इस मार्ग में 79 आरयूबी और दो आरओबी शामिल हैं। यह गलियारा प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-44, एनएच-9, एनएच-48, एनएच-344जीएम, एनएच-152) से जुड़ता है और चंडीगढ़, लुधियाना और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों तक पहुंच को बेहतर बनाता है। इससे कृषि, पर्यटन और व्यापार को लाभ मिलने की उम्मीद है, साथ ही क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच)

  1. एनएच-80 के मोकामा-मुंगेर खंड को चार लेन का बनाया जाएगा

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार में मोकामा खास (एनएच-31) से सफियाबाद मोर्चा तक राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के 82.4 किलोमीटर हिस्से को चार लेन का बनाने का प्रस्ताव दिया है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित किया जाने वाला यह कॉरिडोर एनएच-33, एनएच-31 और एसएच-18 को जोड़कर क्षेत्रीय संपर्क में सुधार करेगा, साथ ही पटना, लखीसराय और मुंगेर जैसे प्रमुख केंद्रों तक पहुंच सुनिश्चित करेगा। इस परियोजना से बरुआनी औद्योगिक क्षेत्र को मदद मिलने और पटना व झारखंड के बीच निर्बाध माल तथा यात्री आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। यह वाणिज्यिक वाहनों को हाई-स्पीड बाईपास पर डायवर्ट करके शहर के मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने, सुरक्षा बढ़ाने और यात्रा के समय को कम करने में भी मदद करेगा।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव श्री पंकज कुमार ने की।

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एमजी/केसी/एनके


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