पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसद प्रश्न: मौसम पूर्वानुमान क्षमताएं

Posted On: 03 APR 2025 6:38PM by PIB Delhi

मंत्रालय मौसम संबंधी प्रेक्षणों, संचार, मॉडलिंग उपकरणों और पूर्वानुमान प्रणालियों को निरंतर उन्नत करता रहता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) गंभीर मौसम की घटनाओं की भविष्यवाणी करने के लिए नवीनतम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है। इसमें उच्च स्थानिक और टेम्पोरल रसोलूशन्स पर परिष्कृत गतिशील संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल, बहु-मॉडल समूह विधियाँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) और डेटा विज्ञान पद्धतियाँ शामिल हैं, जो वास्तविक समय की निगरानी और पूर्वानुमानों के लिए बेहतर ग्राउंड-आधारित और ऊपरी वायु अवलोकन और उन्नत रिमोट सेंसिंग नेटवर्क के साथ पूरक हैं। आईएमडी कुशल, प्रभावी और समय पर पूर्व चेतावनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल (सीएपी), मोबाइल ऐप, वेबसाइट, एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित नवीनतम प्रसार उपकरणों का उपयोग करता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) भौतिकी-आधारित संख्यात्मक मॉडलों के अतिरिक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) प्रौद्योगिकियों को मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में एकीकृत करने पर विचार कर रहा है। यह पहल मौसम संबंधी भविष्यवाणियों की सटीकता और दक्षता बढ़ाने की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने पुणे में भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) में एआई/एमएल/डीप लर्निंग (डीएल) पर एक समर्पित वर्चुअल सेंटर स्थापित किया है। एआई/एमएल में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आईएमडी में एक समर्पित कार्यात्मक समूह की स्थापना की गई है। ये केंद्र पृथ्वी विज्ञान में प्रगति के लिए एआई, एमएल और डीएल तकनीकों का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसने पहले ही स्थानीय पूर्वानुमानों और मौसम और जलवायु पैटर्न के विश्लेषण के लिए अनुकूलित कई AI/ML-आधारित अनुप्रयोग विकसित किए हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) आदि के सहयोग से मौजूदा 130 कृषि-मौसम विज्ञान क्षेत्र इकाइयों (एएमएफयू) के माध्यम से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीकेएमएस) परियोजना के तहत किसानों को मौसम पूर्वानुमान आधारित कृषि-सलाह सेवाएं प्रदान कर रहा है। एएमएफयू अपने-अपने जिलों के लिए कृषि-सलाह तैयार करते हैं और उन्हें जनसंचार माध्यमों, मोबाइल ऐप, एसएमएस आदि सहित विभिन्न तरीकों से प्रसारित करते हैं।

यह जानकारी आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।

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